गढ़भोज कार्यक्रम में स्थानीय व्यंजन और पारंपरिक बीजों की प्रदर्शनी
नागनाथ पोखरी महाविद्यालय में भाषण, पोस्टर एवं निबंध प्रतियोगिताओं का आयोजन; विद्यार्थियों को स्थानीय संस्कृति, कृषि और उद्यमिता से जोड़ने पर जोर
नागनाथ पोखरी, चमोली। हिमवंत कवि चंद्र कुंवर बर्त्वाल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नागनाथ पोखरी में उच्च शिक्षा विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में गढ़भोज कार्यक्रम के तहत विभिन्न गतिविधियों एवं प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संयोजन गढ़भोज कार्यक्रम की संयोजिका डॉ. कंचन सहगल ने किया।
आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों को उत्तराखंड की पारंपरिक खान-पान संस्कृति, स्थानीय संसाधनों, पारंपरिक कृषि एवं सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के साथ-साथ स्वरोजगार एवं उद्यमिता की संभावनाओं के प्रति जागरूक करना रहा।
स्थानीय भोजन और वेशभूषा की आर्थिक उपयोगिता पर चर्चा
कार्यक्रम में भूगोल विभाग के प्राध्यापक डॉ. केवला नन्द पाण्डे ने मुख्य वक्ता के रूप में पीपीटी के माध्यम से प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने उत्तराखंड के पारंपरिक भोजन एवं वेशभूषा की सांस्कृतिक तथा आर्थिक उपयोगिता पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक व्यंजनों और वेशभूषा को स्वरोजगार तथा उद्यमिता से जोड़कर युवा रोजगार के नए अवसर सृजित कर सकते हैं। स्थानीय संसाधनों और सांस्कृतिक विरासत पर आधारित उद्यम स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कार्यक्रम संयोजिका डॉ. कंचन सहगल ने गढ़भोज की अवधारणा एवं इसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्थानीय खान-पान, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में विद्यार्थियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी संस्कृति को समझने तथा उसके संरक्षण एवं संवर्धन में सक्रिय योगदान देने का अवसर प्रदान करते हैं।
संस्कृति को स्वरोजगार से जोड़ने पर जोर
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मुख्यशास्ता डॉ. शिवचंद सिंह रावत ने कहा कि पारंपरिक व्यंजन एवं वेशभूषा हमारी सांस्कृतिक विरासत के अभिन्न अंग हैं। इनके संरक्षण के साथ इन्हें स्वरोजगार एवं उद्यमिता से जोड़कर युवाओं के लिए आत्मनिर्भरता के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं।
IQAC समन्वयक डॉ. अभय कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि गढ़भोज जैसे आयोजन विद्यार्थियों को स्थानीय संस्कृति एवं पारंपरिक ज्ञान से जोड़ने के साथ स्थानीय उत्पादों में निहित स्वरोजगार एवं उद्यमिता की संभावनाओं से परिचित कराते हैं। उन्होंने कहा कि युवा पारंपरिक संसाधनों को आधुनिक बाजार से जोड़कर नवाचार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दे सकते हैं।
लोकगीत और विचार प्रस्तुतियों ने बढ़ाई कार्यक्रम की रंगत
कार्यक्रम के दौरान छात्रा निशा ने भाषा, सभ्यता, संस्कृति एवं पारंपरिक खान-पान को दैनिक जीवन में अपनाने की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किए। छात्रा मेघा ने प्रसिद्ध लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी के एक गढ़वाली लोकगीत की प्रस्तुति दी।
आयोजन के तहत छात्र-छात्राओं ने घर से तैयार कर लाए गए विभिन्न स्थानीय एवं पारंपरिक व्यंजनों तथा पारंपरिक बीजों की प्रदर्शनी लगाई। विद्यार्थियों ने क्षेत्र में प्रचलित खाद्य पदार्थों, स्थानीय कृषि उत्पादों और पारंपरिक बीजों को प्रदर्शित करते हुए उनकी उपयोगिता एवं विशेषताओं की जानकारी दी।
प्रदर्शनी के माध्यम से स्थानीय जैव-विविधता, पारंपरिक कृषि ज्ञान तथा उत्तराखंड की समृद्ध खान-पान परंपरा के संरक्षण का संदेश दिया गया।
भाषण, पोस्टर और निबंध प्रतियोगिताएं
गढ़भोज कार्यक्रम के अंतर्गत भाषण, पोस्टर एवं निबंध प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया गया। इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों की रचनात्मकता, अभिव्यक्ति क्षमता तथा लोक-संस्कृति एवं पारंपरिक जीवन-पद्धति के प्रति जागरूकता को प्रोत्साहित किया गया।
प्रतियोगिताओं में डॉ. रामानंद उनियाल, डॉ. किरन चौहान, डॉ. आरती रावत एवं डॉ. सोहनी ने निर्णायक की भूमिका निभाई।
भाषण प्रतियोगिता:
- प्रथम — निशा रावत, बीएससी तृतीय सेमेस्टर
- द्वितीय — काजोल, बीए प्रथम सेमेस्टर
- तृतीय — मेघा रावत, बीएससी पंचम सेमेस्टर
पोस्टर प्रतियोगिता:
- प्रथम — निशा रावत, बीएससी तृतीय सेमेस्टर
निबंध प्रतियोगिता:
- प्रथम — प्रियांशी, बीएससी प्रथम सेमेस्टर
- द्वितीय — साक्षी, बीएससी प्रथम सेमेस्टर
- तृतीय — पल्लवी, बीएससी पंचम सेमेस्टर
प्राचार्य ने आयोजन को बताया सराहनीय पहल
महाविद्यालय की प्राचार्य एवं संरक्षक डॉ. रीटा शर्मा ने अपने संदेश में गढ़भोज कार्यक्रम को स्थानीय संस्कृति के संरक्षण एवं युवा उद्यमिता की दिशा में सराहनीय पहल बताया।
कार्यक्रम में डॉ. शाजिया सिद्दीकी, डॉ. कीर्ति गिल, डॉ. शशि चौहान, डॉ. अनुपम रावत, डॉ. आयुष बर्त्वाल, डॉ. प्रवीण मैठाणी, डॉ. प्रियंका घिड़ियाल, श्री दिनेश नेगी, श्री दिगम्बर सिंह, श्री विक्रम कंडारी, श्री विमल बिष्ट, श्री शिवा कुंवर, श्री चंदन सिंह, श्री चंद्रेश भट्ट, श्रीमती ललिता भंडारी, श्री सतीश चमोला, श्री नवनीत, श्री विजयपाल, श्री प्रबल सिंह, श्री प्रदीप सिंह, श्री अनिल कुमार एवं श्री दीपक सिंह सहित महाविद्यालय के प्राध्यापक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
