क्षतिग्रस्त पुस्तों, गहरी दरारें और प्रशासनिक उदासीनता से हर दिन जोखिम में सैकड़ों जानें
पिपलेथ, कठिया, टिहरी:
टिहरी गढ़वाल जनपद के कुंजणी क्षेत्र में स्थित खाड़ी–पीपलेथ संकरा वाहन मार्ग आज स्वयं में एक बड़ा खतरा बन चुका है। लंबे समय से मार्ग के पुस्तों (सपोर्ट वॉल) क्षतिग्रस्त हैं, कई स्थानों पर गहरी दरारें पड़ चुकी हैं और चौड़ाई अत्यधिक कम होने के कारण यहां से गुजरना हर दिन दुर्घटना को आमंत्रण देने जैसा हो गया है। बावजूद इसके, शासन–प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का ध्यान अब तक इस ओर गंभीरता से नहीं जा पाया है—मानो किसी अनहोनी का इंतजार किया जा रहा हो।
मार्ग की मौजूदा हालत: डर के साए में सफर
खाड़ी–पीपलेथ मार्ग पहाड़ी भू-भाग में स्थित होने के कारण पहले से ही चुनौतीपूर्ण है। लेकिन वर्षों से रखरखाव के अभाव में यह मार्ग कई जगहों पर अब जीर्ण–शीर्ण अवस्था में पहुंच गया है। जगह–जगह पुस्ते टूटे हैं, सड़क की सतह पर लंबी दरारें दिखती हैं और बारिश के मौसम में हालात और बिगड़ जाते हैं।
- संकरापन इतना अधिक है कि दो वाहन आमने–सामने आ जाएं तो रुकना मजबूरी बन जाता है।
- किनारों पर सुरक्षा अवरोध न होने से फिसलन या चूक सीधे खाई की ओर ले जा सकती है।
आधा दर्जन से अधिक गांवों की जीवनरेखा
यह मार्ग केवल एक सड़क नहीं, बल्कि कठिया, चौंपा, कुमाली, पिपलेथ, उदखंडा सहित आधा दर्जन से अधिक गांवों की जीवनरेखा है।
- स्कूली बच्चे रोज़ाना इसी रास्ते से पढ़ने जाते हैं।
- आम नागरिक, दुपहिया और चौपहिया वाहन इसी मार्ग पर निर्भर हैं।
- आपातकालीन सेवाएं (बीमारी, प्रसव, दुर्घटना) भी इसी संकरे रास्ते से गुजरने को मजबूर हैं।
हर गुजरता दिन इस आशंका को मजबूत करता है कि यदि समय रहते स्थायी समाधान नहीं हुआ, तो कोई भी छोटी चूक बड़े हादसे में बदल सकती है।
वर्तमान सड़कों की तुलना में अत्यधिक संकरा
क्षेत्र की अन्य ग्रामीण सड़कों की तुलना में यह मार्ग काफी संकरा है। जहां मानक के अनुसार सुरक्षित चौड़ाई और साइड प्रोटेक्शन होना चाहिए, वहां कटाव और धंसाव के निशान स्पष्ट हैं। भारी वाहन तो दूर, कई बार दुपहिया वाहन भी फिसलन में असंतुलित हो जाते हैं।
बरसात में बढ़ता खतरा
मानसून के दौरान पहाड़ों में भूस्खलन और कटाव आम समस्या है। इस मार्ग पर पानी निकासी (ड्रेनेज) की उचित व्यवस्था न होने से:
- दरारें और फैल जाती हैं,
- पुस्तो पर दबाव बढ़ता है,
- सड़क के किनारे धंसने लगते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर बरसात के बाद हालात और खराब हो जाते हैं, लेकिन मरम्मत के नाम पर चुप्पी ही दिखती है।
स्थानीय आवाज़ें: कब होगी सुनवाई?
ग्रामीणों और अभिभावकों में रोष और चिंता दोनों है। उनका कहना है कि वे शिकायतें देते–देते थक चुके हैं, पर स्थायी मरम्मत आज तक नहीं हुई।
“हम अपने बच्चों को रोज़ डर के साथ स्कूल भेजते हैं। कब कौन–सी दरार खुल जाए, कहा नहीं जा सकता।”
“एक छोटी सी लापरवाही किसी बड़े हादसे में बदल सकती है।”
प्रशासनिक उदासीनता या संसाधनों की कमी?
सवाल यह भी है कि क्या यह प्रशासनिक उदासीनता है या योजनागत प्राथमिकताओं की कमी?
- क्या निरीक्षण रिपोर्ट समय पर तैयार नहीं होती?
- क्या बजट आवंटन पर्याप्त नहीं है?
- या फिर जवाबदेही तय नहीं हो पा रही?
जब तक इन सवालों के ठोस जवाब नहीं मिलते, तब तक खतरा जस का तस बना रहेगा।
समाधान क्या हो सकते हैं? (विशेषज्ञ सुझाव)
- तत्काल सुरक्षा उपाय:
- टूटे पुस्तो की आपात मरम्मत,
- खतरनाक मोड़ों पर क्रैश बैरियर और रिफ्लेक्टर,
- रात के लिए सोलर लाइटिंग।
- स्थायी निर्माण योजना:
- मार्ग की मानक चौड़ाई सुनिश्चित करना,
- आरसीसी पुस्तोंं और ड्रेनेज सिस्टम का निर्माण।
- नियमित निरीक्षण:
- मानसून से पहले और बाद में तकनीकी सर्वे,
- स्थानीय स्तर पर शिकायत निवारण तंत्र।
- जनभागीदारी:
- ग्राम सभाओं के माध्यम से निगरानी,
- पारदर्शिता के लिए कार्य प्रगति सार्वजनिक करना।
बच्चों और नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि
किसी भी विकास का पहला पैमाना मानव सुरक्षा है। जब एक मार्ग पर स्कूली बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग रोज़ाना जोखिम उठाने को मजबूर हों, तो यह केवल सड़क की नहीं, व्यवस्था की विफलता भी है।
निष्कर्ष: अनहोनी से पहले चेत जाना ज़रूरी
खाड़ी–पीपलेथ संकरा वाहन मार्ग की स्थिति चेतावनी है—एक ऐसा संकेत जिसे नज़रअंदाज़ करना अपराध बन सकता है। समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो किसी भी दिन यह मार्ग दुर्घटना का गवाह बन सकता है।
अब भी वक्त है कि शासन–प्रशासन और जनप्रतिनिधि मिलकर इस मार्ग को सुरक्षित बनाएं, ताकि आधा दर्जन से अधिक गांवों के लोग बेफिक्र होकर आवागमन कर सकें।
