टिहरी में एडीएम ने जिला प्रोबेशन कार्यालय का किया निरीक्षण, बाल संरक्षण व्यवस्थाओं का लिया जायजा
विशेष दत्तक ग्रहण अभिकरण, चाइल्ड हेल्पलाइन-1098 और एसओएस बाल ग्राम की व्यवस्थाएं देखीं, लंबित मामलों के समयबद्ध निस्तारण के निर्देश
टिहरी गढ़वाल, 06 नवम्बर 2026। जनपद में बाल संरक्षण व्यवस्थाओं और बच्चों से संबंधित विभागीय कार्यों की स्थिति का जायजा लेने के लिए अपर जिलाधिकारी शैलेंद्र सिंह नेगी ने जिला प्रोबेशन कार्यालय का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कार्यालय के विभिन्न पटलों के साथ विशेष दत्तक ग्रहण अभिकरण, चाइल्ड हेल्पलाइन और एसओएस बाल ग्राम की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान अपर जिलाधिकारी ने विभिन्न पत्रावलियों एवं अभिलेखों का अवलोकन कर विभागीय कार्यप्रणाली की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने बाल संरक्षण से जुड़ी संस्थाओं में उपलब्ध व्यवस्थाओं और बच्चों की देखभाल एवं पुनर्वास से संबंधित प्रक्रियाओं की भी समीक्षा की।
विशेष दत्तक ग्रहण अभिकरण की बालिका को मिला परिवार
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बताया कि विशेष दत्तक ग्रहण अभिकरण में आवासित एक बालिका को परिवार मिल गया है। इसके लिए नियमानुसार आवश्यक प्रक्रिया पूरी की गई है।
यह जानकारी मिलने पर बाल संरक्षण एवं दत्तक ग्रहण से संबंधित प्रक्रियाओं की महत्ता पर चर्चा हुई। निरीक्षण का उद्देश्य बच्चों की सुरक्षा, देखभाल और पुनर्वास से जुड़ी व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाए रखना भी रहा।
चाइल्ड हेल्पलाइन-1098 पर मिले 68 मामले, 61 का निस्तारण
अधिकारियों ने अपर जिलाधिकारी को अवगत कराया कि चाइल्ड हेल्पलाइन-1098 पर जनवरी से सितंबर 2026 तक कुल 68 प्रकरण प्राप्त हुए हैं। इनमें से 61 प्रकरणों का निस्तारण किया जा चुका है।
चाइल्ड हेल्पलाइन बच्चों को संकट, शोषण, उत्पीड़न या अन्य कठिन परिस्थितियों में सहायता उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे में प्राप्त शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई और बच्चों को आवश्यक संरक्षण उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है।
बाल संरक्षण मामलों में संवेदनशीलता और तत्परता बरतने के निर्देश
अपर जिलाधिकारी शैलेंद्र सिंह नेगी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाल संरक्षण से जुड़े सभी मामलों में संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्य किया जाए। बच्चों की सुरक्षा, देखभाल एवं पुनर्वास से संबंधित मामलों में निर्धारित प्रक्रियाओं का पूरी गंभीरता से पालन सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने विभागीय पत्रावलियों एवं अभिलेखों को नियमित रूप से अद्यतन रखने, लंबित प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण करने और विभिन्न बाल संरक्षण संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि बच्चों के हितों और अधिकारों की रक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके लिए सभी संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करना आवश्यक है।
निरीक्षण में ये अधिकारी रहे उपस्थित
इस अवसर पर जिला प्रोबेशन अधिकारी ज्योति पटवाल, एसीएमओ डॉ. निधि रावत, मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. निधि, सदस्य बाल कल्याण समिति संगीता भंडारी सहित संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

