ग्रीन मिशन योजना के अंतर्गत वन सरपंचों का शैक्षिक भ्रमण शुरू
चंंबा, सो.ला.सकलानी ‘निशांत’: वन विभाग की ग्रीन इंडिया मिशन योजना के अंतर्गत विभिन्न जिलों के वन पंचायत सरपंचों का 06 दिवसीय शैक्षिक भ्रमण कार्यक्रम आज से जड़धार गांव के स्व- पोषित वन में शुरू हुआ। जैव विविधता से परिपूर्ण जड़धार गांव के निवासियों के स्व-संरक्षित इस जंगल की आगंतुक उत्तरकाशी के सरपंचों ने की सरहना की। वन विभाग के एसडीओ किशोर नौटियाल ने गांव के लोगों के कार्यों की सराहना करते हुए ग्रामवासियों के योगदान को प्रेरणास्पद बताया।
कहा कि नागरिकों द्वारा इस प्रकार का कार्य करना एक मॉडल और उदाहरण है। गांव के लोगों के इस योगदान में पीढ़ी दर पीढ़ी कार्य गतिमान रहने की उन्होने तारीफ की। योजना के उद्देश्य का जिक्र करते कहा कि वन सरपंचों के शैक्षिक भ्रमण के द्वारा वे तुलनात्मक अध्ययन करके अपने क्षेत्र और गांव मे भी इस तरह का प्रयोग कर सकते हैं।
पर्यावरणविद और इंदिरा गांधी पर्यावरण पुरस्कार प्राप्त विजय जड़धारी ने विस्तार से ग्रामवासियों के द्वारा पोषित वन,वन सुरक्षा,संरक्षण और वनाग्नि से जंगल बचाने के लिए किए प्रयासों पर बातचीत की। कहा कि वन विभाग और शासन स्तर पर वन पंचायतों को वित्त पोषित किया जाय। वित्तीय दायित्व ग्राम वन सरपंच को दिये जांय। आग लगाने वाले असामाजिक तत्वों को कठोर दंड दिया जाय।
गांव द्वारा नियुक्त प्रथम वन सेवक कृपाल सिंह जड़धारी और होशियार सिंह जड़धारी की वन बचाने में दी गई सेवाओं को भी याद किया गया। शैला देवी जड़धारी का भी सम्मान से नामोउल्लेख हुआ। दल ने जंगल के विभिन्न स्थलों- चक सौड, नागपाणी,कटार्या की धार आदि का भी भ्रमण किया।
जड़धार के वन सरपंच राजेन्द्र नेगी के नेतृत्व में किए गये पारदर्शी कार्य की तारीफ की गई जो कि एक मिशाल है। अपने संबोधन में उन्होने अपने सहयोगियों और ग्राम वासियों को इसका श्रेय दिया तथा महत्वपूर्ण सुझाव रखे।
श्री भरत सिंह जड़धारी ने वन विभाग के साथ तालमेल से योजना की सफलता की बात कही साथ ही पलायन की पीड़ा भी बयां की। कहा कि भू माफिया को गांव की जमीन वे नहीं बिकने दगें। साहित्यकार सोमवारी लाल सकलानी ‘निशांत’ ने जड़धार गांव के वन सरपंच राजेंद्र नेगी द्वारा करवाये गये अभूतपूर्व कार्य को सराहनीय बताया। उन्होने कविता के माध्यम से प्रकृति प्रेम और सुरक्षा का पक्ष रखा तथा अपनी अद्यतन पुस्तक “पेड़ो के मसीहा- विश्वेश्वर दत्त सकलानी(वृक्ष मानव) की प्रतियां भी भेंट की।
इस अवसर पर उत्तरकाशी से आये वन सरपंच बनवारी लाल भट्ट ने जंगली फलों की कमी और मानवीय विनाश को बंदर आदि जानवरों के नुकसान का कारण माना। रेंजर प्रबोध पाण्डेय,रेंजर कैलाश रावत,दीपा देवी, कमला देवी,किरण,आशा देवी, हीरालाल,मगनी देवी,जोगेंद्र पंवार, आर एस बिष्ट, हुक्म सिंह जड़धारी,धनवीर सिंह,विनोद जड़धारी,शुभम लेखवार आदि बड़ी संख्या में वन शैक्षिक भ्रमण हेतु आये लोग और ग्रामवासी साथ रहे।
