एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय में मशरूम तकनीक प्रशिक्षण कार्यक्रम के पोस्टर का विमोचन
16 से 20 नवंबर तक होगा पांच दिवसीय प्रशिक्षण, मशरूम उत्पादन, स्पॉन निर्माण और कृषि उद्यमिता का दिया जाएगा सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक ज्ञान
श्रीनगर (गढ़वाल), 04 नवम्बर 2026। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के ग्रामीण प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से आयोजित किए जाने वाले पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के पोस्टर का बुधवार को विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्री प्रकाश सिंह ने विमोचन किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम का विषय है—“मशरूम तकनीक: सतत आजीविका सृजन हेतु मशरूम उत्पादन, स्पॉन निर्माण, मूल्य संवर्धन एवं कृषि उद्यमिता”।
पोस्टर विमोचन समारोह में ग्रामीण प्रौद्योगिकी विभाग के विभागाध्यक्ष एवं कृषि एवं संबद्ध विज्ञान संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो. राजेंद्र सिंह नेगी, छात्र कल्याण अधिष्ठाता (डीएसडब्ल्यू) प्रो. ओमप्रकाश गुसाईं, अधिष्ठाता (भर्ती एवं पदोन्नति) प्रो. मोहन सिंह पंवार, बिड़ला परिसर के निदेशक प्रो. हरभजन सिंह चौहान, मुख्य नियंता प्रो. दीपक कुमार तथा टिहरी परिसर (बादशाहीथौल) के निदेशक प्रो. ए.ए. बौराई उपस्थित रहे।
इसके अलावा डीएसीई के समन्वयक प्रो. एम.एम. सेमवाल, कार्यक्रम के सह-संरक्षक डॉ. संतोष सिंह, आयोजन सचिव डॉ. अंकित सती, मॉडरेटर डॉ. आर.सी. नौटियाल एवं डॉ. ऋषिका नेगी तथा ग्रामीण प्रौद्योगिकी विभाग के शोधार्थी प्रणव सिंह सहित अन्य सदस्य भी मौजूद रहे।
16 से 20 नवंबर तक चलेगा प्रशिक्षण कार्यक्रम
विश्वविद्यालय की ओर से यह पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम 16 से 20 नवंबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा। इसमें प्रतिभागियों को ऑयस्टर मशरूम की वैज्ञानिक उत्पादन तकनीक, स्पॉन (बीज) निर्माण, मशरूम के मूल्य संवर्धन और कृषि उद्यमिता से संबंधित जानकारी दी जाएगी।
प्रशिक्षण के दौरान सैद्धांतिक जानकारी के साथ व्यावहारिक अभ्यास भी कराया जाएगा, जिससे प्रतिभागी मशरूम उत्पादन की तकनीकी प्रक्रिया को समझ सकें और इसे स्वरोजगार के रूप में अपनाने की दिशा में आगे बढ़ सकें।
पर्वतीय क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसरों पर जोर
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य मशरूम आधारित स्वरोजगार और कृषि उद्यमिता को प्रोत्साहित करना है। इसके माध्यम से विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर विकसित करने तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन की संभावनाओं को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा।
मशरूम उत्पादन, स्पॉन निर्माण और मूल्य संवर्धन जैसी तकनीकों का प्रशिक्षण ग्रामीण युवाओं, किसानों और इच्छुक उद्यमियों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। विश्वविद्यालय की यह पहल कृषि आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने के साथ सतत आजीविका के विकल्पों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
