उत्तराखंड में नकली डेयरी उत्पादों पर शिकंजा, गैर-दुग्ध उत्पादों के निर्माण-बिक्री पर प्रतिबंध
उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाले नकली पनीर, घी और मक्खन जैसे उत्पादों पर होगी सख्त कार्रवाई, प्रदेशभर में चलेगा विशेष जांच अभियान
देहरादून | 8 अगस्त 2026
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशन में उत्तराखंड में खाद्य सुरक्षा को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाले अमानकीकृत डेयरी एनालॉग एवं गैर-दुग्ध उत्पादों के निर्माण, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है।

यह आदेश ऐसे उत्पादों पर लागू होगा, जो पनीर, घी, मक्खन अथवा अन्य दुग्ध उत्पादों के नाम, स्वरूप या पैकेजिंग के जरिए उपभोक्ताओं को भ्रमित करते हैं, जबकि उनमें दूध के स्थान पर वनस्पति वसा, वनस्पति तेल अथवा अन्य गैर-दुग्ध अवयवों का उपयोग किया जाता है।
पूरे प्रदेश में लागू होगा प्रतिबंध
स्वास्थ्य सचिव एवं आयुक्त खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विनय शंकर पांडेय द्वारा जारी आदेश खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 के तहत लागू किया गया है। यह आदेश राजपत्र में प्रकाशित होने की तिथि से प्रभावी होगा और एक वर्ष तक अथवा भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा इस संबंध में अंतिम मानक अधिसूचित किए जाने तक प्रभावी रहेगा।
हालांकि, FSSAI के निर्धारित मानकों के अनुरूप फ्रोजन डेजर्ट, प्रोसेस्ड चीज और मिक्स्ड फैट स्प्रेड जैसे मानकीकृत उत्पाद इस प्रतिबंध के दायरे से बाहर रहेंगे।
डेयरी कारोबार की होगी सघन जांच
प्रतिबंध लागू होने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा पूरे प्रदेश में विशेष प्रवर्तन अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत डेयरी उत्पाद बनाने वाली इकाइयों, गोदामों, थोक एवं खुदरा बाजारों, होटल-रेस्टोरेंट और मिठाई की दुकानों का निरीक्षण किया जाएगा।
संदिग्ध उत्पादों के नमूने लेकर प्रयोगशालाओं में जांच कराई जाएगी। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित कारोबारियों के विरुद्ध खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसमें उत्पाद जब्ती और लाइसेंस संबंधी कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।
चारधाम यात्रा और पर्यटन सीजन में बढ़ती मांग पर विशेष निगरानी
उत्तराखंड में चारधाम यात्रा, पर्यटन सीजन और त्योहारों के दौरान दूध एवं डेयरी उत्पादों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। ऐसे समय में नकली या अमानकीकृत पनीर, घी और अन्य दुग्ध उत्पादों की शिकायतों को देखते हुए विभाग ने निगरानी और जांच को और प्रभावी बनाने का निर्णय लिया है।
सरकार का मानना है कि इस कार्रवाई से उपभोक्ताओं को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के साथ-साथ मानकों के अनुरूप कारोबार करने वाले डेयरी उद्योग को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
जनस्वास्थ्य से समझौता नहीं: विनय शंकर पांडेय
आयुक्त खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विनय शंकर पांडेय ने कहा कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित, शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक परीक्षणों और विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर यह कदम उठाया गया है।
उन्होंने खाद्य कारोबारियों से केवल निर्धारित मानकों के अनुरूप उत्पादों का निर्माण एवं विक्रय करने की अपील की। साथ ही स्पष्ट किया कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उपभोक्ता भी रहें जागरूक
विभाग ने आम उपभोक्ताओं से डेयरी उत्पाद खरीदते समय लेबलिंग, सामग्री, निर्माण संबंधी विवरण और आवश्यक लाइसेंस/अनुमोदन की जानकारी जांचने की अपील की है। किसी उत्पाद के संदिग्ध होने पर उसकी सूचना संबंधित खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को देने का भी आग्रह किया गया है।
सरकार के इस कदम का उद्देश्य नकली एवं भ्रामक डेयरी उत्पादों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने के साथ प्रदेश की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और उपभोक्ताओं के विश्वास को बनाए रखना है।
