एक मां का टूटता हुआ दिल: जसपाल राणा के निधन के चार दिन बाद मां श्यामा देवी ने भी दुनिया को कहा अलविदा उत्तराखंड के गौरव निशानेबाज जसपाल राणा के जाने का सदमा नहीं सह पाईं मां, परिवार पर कुछ ही दिनों में टूटा दुखों का दूसरा पहाड़
उत्तराखंड के गौरव निशानेबाज जसपाल राणा के जाने का सदमा नहीं सह पाईं मां, परिवार पर कुछ ही दिनों में टूटा दुखों का दूसरा पहाड़
संपादकीय | SKS News | सरहद का साक्षी डिजिटल मीडिया
कभी-कभी जीवन ऐसे दर्दनाक अध्याय लिख देता है, जिन्हें शब्दों में बयां करना आसान नहीं होता। उत्तराखंड से आई एक बेहद मार्मिक खबर ने हर संवेदनशील व्यक्ति की आंखें नम कर दी हैं। देश के प्रसिद्ध निशानेबाज और उत्तराखंड के गौरव रहे जसपाल राणा के निधन के महज कुछ दिनों बाद उनकी माता श्यामा देवी राणा ने भी इस दुनिया को अलविदा कह दिया।
बताया जा रहा है कि 12 जून को बेटे जसपाल राणा के निधन के बाद श्यामा देवी गहरे सदमे में थीं। मां के लिए संतान का बिछोह संसार का सबसे बड़ा दुख माना जाता है। जिस बेटे को गोद में खिलाया, जिसके सपनों को अपने सपनों से सींचा और जिसकी उपलब्धियों पर जीवनभर गर्व किया, उसी बेटे की विदाई का दर्द शायद वह सहन नहीं कर सकीं। आखिरकार 78 वर्ष की आयु में दिल्ली के एक अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली।
यह घटना केवल एक परिवार का व्यक्तिगत दुःख नहीं है, बल्कि मां और बेटे के उस अटूट रिश्ते की भावनात्मक कहानी भी है, जो जीवन की हर सीमा से परे होता है। एक मां अपने बच्चे की सफलता पर सबसे ज्यादा खुश होती है, लेकिन उसी बच्चे के जाने का दर्द भी सबसे अधिक उसी को झेलना पड़ता है।
पूर्व खेल मंत्री नारायण सिंह राणा के परिवार पर कुछ ही दिनों में दु:खों का ऐसा पहाड़ टूटा है, जिसकी कल्पना भी कठिन है। पहले बेटे का असमय निधन और फिर मां का संसार से विदा हो जाना, पूरे परिवार को गहरे शोक में डुबो गया है। क्षेत्र में शोक की लहर है और बड़ी संख्या में लोग परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कर रहे हैं।
यह घटना हमें एक बार फिर याद दिलाती है कि परिवार केवल रिश्तों का समूह नहीं, बल्कि भावनाओं की वह दुनिया है जहां एक सदस्य का दर्द पूरे परिवार को प्रभावित करता है। मां का प्रेम, त्याग और समर्पण शब्दों से परे होता है। शायद यही कारण है कि दुनिया की हर भाषा में मां को ईश्वर का दूसरा रूप कहा गया है।
आज जब हम श्यामा देवी राणा को अंतिम विदाई दे रहे हैं, तब यह केवल एक मां को श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि मातृत्व की उस महान शक्ति को नमन है, जो अपने बच्चों के लिए हर खुशी और हर दर्द को चुपचाप अपने भीतर समेट लेती है।
सरहद का साक्षी परिवार स्वर्गीय श्यामा देवी राणा एवं स्वर्गीय जसपाल राणा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है तथा शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता है।
“मां कभी जाती नहीं, वह अपनी संतानों की यादों, संस्कारों और प्रेम में हमेशा जीवित रहती है।”
ॐ शांति।
