चारधाम यात्रा 2026 की तैयारियों पर कांग्रेस का हमला, बोले– सरकार चुनावों में व्यस्त, व्यवस्थाएं शून्य
प्रदेश प्रवक्ता शांति प्रसाद भट्ट ने उठाए सवाल—सड़क, स्वास्थ्य और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर जताई गहरी चिंता
देहरादून | दिनांक: 20 मार्च 2026
उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने आगामी चारधाम यात्रा 2026 की तैयारियों को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रदेश प्रवक्ता शांति प्रसाद भट्ट ने कहा कि चारधाम यात्रा के कपाट खुलने में अब मात्र एक माह का समय शेष है, लेकिन सरकार की तैयारियां पूरी तरह नाकाफी और शून्य नजर आ रही हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार यात्रा की व्यवस्थाओं के बजाय चुनावी तैयारियों, मंत्रिमंडल विस्तार और आंतरिक राजनीतिक गतिविधियों में अधिक व्यस्त दिखाई दे रही है, जिससे चारधाम यात्रा जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन की अनदेखी हो रही है।
प्रदेश प्रवक्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि मां यमुनोत्री और मां गंगोत्री के कपाट अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर 19 अप्रैल 2026 को खुलेंगे, जबकि बाबा केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल और भगवान बद्रीविशाल के कपाट 23 अप्रैल 2026 को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे।
इसके बावजूद यात्रा मार्गों की स्थिति बेहद खराब बनी हुई है। उन्होंने कहा कि ऋषिकेश से लेकर टिहरी, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री मार्गों पर जगह-जगह पिछले वर्षों की आपदाओं का मलबा अब तक साफ नहीं किया गया है, जिससे यात्रियों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
शांति प्रसाद भट्ट ने कहा कि सड़कों की स्थिति अत्यंत दयनीय है और स्वास्थ्य सेवाएं भी चरमराई हुई हैं। घोड़ा-खच्चर संचालकों और हक-हकूकधारियों के साथ कोई ठोस संवाद नहीं हो रहा है, जबकि बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) भी अपने आंतरिक विवादों में उलझी हुई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यात्रा शुरू होने से ठीक पहले दिए जा रहे बयान केवल वास्तविक समस्याओं से ध्यान हटाने का प्रयास हैं। वहीं यात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर भी कोई ठोस कार्ययोजना सामने नहीं आई है।
प्रदेश कांग्रेस ने कहा कि चारधाम यात्रा केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी है। ऐसे में सरकार की लापरवाही न केवल चिंताजनक बल्कि दुर्भाग्यपूर्ण भी है।
कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि यात्रा की तैयारियों को युद्धस्तर पर पूरा किया जाए, मार्गों को सुरक्षित और सुगम बनाया जाए तथा सभी संबंधित हितधारकों के साथ समन्वय स्थापित कर श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं।
