कांग्रेस शिष्टमंडल ने डीएम से की मुलाकात
तपोवन, नरेंद्रनगर, मुनिकीरेती सहित कई क्षेत्रों में प्राधिकरण पर भ्रष्टाचार व अवैध वसूली के आरोप, नियम समान रूप से लागू करने की मांग
📰 टिहरी | 20 जनवरी 2026
जिला विकास प्राधिकरण की मनमानी और भेदभावपूर्ण कार्यशैली के खिलाफ कांग्रेस का एक शिष्टमंडल सोमवार को जिलाधिकारी टिहरी से मिला। शिष्टमंडल का नेतृत्व नरेंद्रनगर के पूर्व विधायक ओम गोपाल सिंह रावत, पूर्व प्रमुख वीरेंद्र सिंह कंडारी, जिला कांग्रेस कमेटी टिहरी गढ़वाल के अध्यक्ष राकेश राणा एवं वरिष्ठ नेता राजेंद्र सिंह भंडारी ने किया।
पूर्व विधायक ओम गोपाल रावत ने कहा कि टिहरी जिले के नरेंद्रनगर, तपोवन, ढालवाला, मुनिकीरेती और अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में जिला विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली अत्यंत चिंताजनक हो चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्राधिकरण की कार्रवाई केवल उन्हीं लोगों पर की जा रही है, जिनकी राजनीतिक पकड़ नहीं है या जो रिश्वत देने में असमर्थ हैं, जबकि प्रभावशाली लोगों को खुली छूट दी जा रही है। यह स्थिति भ्रष्टाचार और अवैध वसूली को बढ़ावा देने वाली है।
पूर्व ब्लॉक प्रमुख वीरेंद्र सिंह कंडारी ने कहा कि यदि तपोवन क्षेत्र में घरातलीय निरीक्षण सही ढंग से किया गया होता, तो 8 फीट की संकरी गली में 6 मंजिला इमारत का निर्माण संभव नहीं होता। उन्होंने आरोप लगाया कि एक ही स्थान पर दोहरी कार्रवाई की जा रही है—एक को एक मंजिल भी बनाने नहीं दी जाती, जबकि उसी क्षेत्र में बहुमंजिला भवन खड़ा हो जाता है। यह स्थिति अवैध वसूली का स्पष्ट उदाहरण है।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष राकेश राणा और वरिष्ठ नेता राजेंद्र सिंह भंडारी ने कहा कि तपोवन में एक भवन पर सीलिंग आदेश होने के बावजूद उसका होटल के रूप में संचालन किया जाना गंभीर भ्रष्टाचार को दर्शाता है।
शिष्टमंडल ने कहा कि जिला विकास प्राधिकरण का गठन विकास कार्यों को गति देने के लिए किया गया था, न कि जनता के उत्पीड़न और अवैध वसूली के लिए।
📌 शिष्टमंडल की प्रमुख मांगें
शिष्टमंडल ने जिलाधिकारी के समक्ष निम्नलिखित मांगें रखीं—
- प्राधिकरण की नियमावली सभी पर समान रूप से लागू की जाए, भेदभाव बंद हो।
- पुराने भवन तोड़कर नए भवन बनाने वालों को विशेष छूट दी जाए।
- अधूरे भवनों को वन-टाइम सेटलमेंट के तहत पूर्ण करने की अनुमति दी जाए।
- लंबे समय से लंबित मास्टर प्लान को शीघ्र लागू किया जाए।
- वर्ष 1960 से लंबित राजस्व अभिलेखों का दुरस्तीकरण किया जाए।
- समझौता एवं क्षेत्रीय निरीक्षण में भ्रष्ट अधिकारियों/कर्मचारियों की तैनाती न की जाए।
- डेपुटेशन पर तैनात भ्रष्ट अधिकारियों को उनके मूल कैडर में वापस भेजते हुए कारण अंकित किया जाए।
- प्राधिकरण द्वारा भवन निर्माण में सुरक्षा, मार्गदर्शन और सहूलियतपूर्ण माहौल बनाया जाए।
शिष्टमंडल ने चेतावनी दी कि यदि दोषपूर्ण कार्यवाही जारी रही तो उन्हें आमरण अनशन, क्रमिक अनशन एवं आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी जिला विकास प्राधिकरण की होगी।
शिष्टमंडल ने यह भी उल्लेख किया कि ब्रिटिश काल 1938 के राजस्व अभिलेखों का भूमि बंदोबस्त वर्ष 1960 में होना था, जो आज तक लंबित है। इसी प्रशासनिक चूक के कारण स्थानीय मूल निवासियों को आज भी अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
👥 शिष्टमंडल में शामिल प्रमुख लोग
शिष्टमंडल में पूर्व विधायक ओम गोपाल रावत, जिला कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राकेश राणा, पूर्व प्रमुख वीरेंद्र सिंह कंडारी, जगमोहन सिंह भंडारी, प्रदेश कांग्रेस सचिव सैयद मुसर्रफ अली, महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष आशा रावत, अनिल भंडारी, अनुराग पयाल, नवीन भंडारी, अनिल रावत, लेखराज भंडारी, रतन सिंह नेगी, संजय पयाल, गिरीश बिष्ट, चैन सिंह बिष्ट, देशराज भंडारी, यशपाल भंडारी, नरेंद्र केंतुरा, मुन्ना सिंह रावत सहित बड़ी संख्या में व्यापार मंडल एवं नगर पंचायत प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
