टीबी स्क्रीनिंग में तेजी लाएं, हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की नियमित मॉनिटरिंग करें: डीएम नितिका खण्डेलवाल
टिहरी में 34 स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से 3,085 एक्स-रे स्क्रीनिंग; हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की निगरानी के लिए तैयार होगा वार रूम और टोल-फ्री कॉल सेंटर
टिहरी, 18 अगस्त 2026। जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल ने मंगलवार को जिला सभागार में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संचालित विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों एवं मातृत्व स्वास्थ्य कार्यक्रम की समीक्षा की। बैठक में टीबी मुक्त भारत अभियान, टीबी स्क्रीनिंग, एचपीवी वैक्सीनेशन, वैक्सीनेबल पॉपुलेशन, एनसीडी स्क्रीनिंग, फेस ऑथेंटिकेशन सहित अन्य स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रगति की जानकारी ली गई।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों में टीबी स्क्रीनिंग की प्रगति कम है, वहां स्क्रीनिंग का दायरा तत्काल बढ़ाया जाए। उन्होंने विकासखंडवार आयोजित स्वास्थ्य शिविरों, प्रतिदिन लगाए जा रहे कैंपों और उनमें की जा रही जांच की जानकारी लेते हुए आवश्यकता के अनुसार शिविरों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए।
34 स्वास्थ्य शिविरों में हुई 3,085 एक्स-रे स्क्रीनिंग
बैठक में बताया गया कि जनपद में 5 से 16 अगस्त 2026 तक 34 स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया गया। इन शिविरों के माध्यम से कुल 3,085 एक्स-रे स्क्रीनिंग की गई हैं।
डीएम ने निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, वहां स्क्रीनिंग कार्य में किसी प्रकार की कमी न आए। उन्होंने कहा कि जांच से छूटे हुए व्यक्तियों को भी चिन्हित कर स्क्रीनिंग के दायरे में लाया जाए, ताकि टीबी की समय रहते पहचान और उपचार सुनिश्चित किया जा सके।
उन्होंने विकासखंडवार एचपीवी वैक्सीनेशन, एनसीडी स्क्रीनिंग के अंतर्गत हाइपरटेंशन (HTN) की जांच तथा फेस ऑथेंटिकेशन की स्थिति की भी समीक्षा की। जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप प्रगति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की बनेगी अलग सूची
मातृत्व स्वास्थ्य कार्यक्रम की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों की समय पर पहचान करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं को आवश्यकता के अनुसार समय रहते उच्च स्वास्थ्य केंद्रों पर रेफर किया जाए।
जिलाधिकारी ने गर्भवती महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य जांच और निरंतर मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की अलग सूची तैयार कर विशेष निगरानी की जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में समय पर उपचार और रेफरल की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।
हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की निगरानी के लिए बनेगा वार रूम
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राम प्रकाश ने बताया कि हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए वार रूम तैयार किया जा रहा है। इसमें टोल-फ्री नंबर के माध्यम से कॉल सेंटर स्थापित किया जाएगा।
कॉल सेंटर के जरिए गर्भवती महिलाओं और उनसे संबंधित स्वास्थ्य सेवाओं की नियमित निगरानी की जाएगी। इससे हाई रिस्क मामलों में समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने और आवश्यक रेफरल सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
टीबी निवारक उपचार की भी हुई समीक्षा
बैठक में टीपीटी (टीबी निवारक उपचार) की प्रगति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि टीपीटी के माध्यम से टीबी संक्रमण के जोखिम वाले पात्र व्यक्तियों को निवारक उपचार उपलब्ध कराया जाता है, जिससे संक्रमण के सक्रिय टीबी रोग में बदलने की संभावना को कम किया जा सके।
जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को जोखिम वाले पात्र व्यक्तियों की पहचान, जांच और उपचार की प्रक्रिया को प्रभावी एवं समयबद्ध तरीके से संचालित करने के निर्देश दिए।
स्वास्थ्य कार्यक्रमों की नियमित समीक्षा पर जोर
जिलाधिकारी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुंचाना प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और कार्यक्रमों की प्रगति की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए, ताकि निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा किया जा सके।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी वरुणा अग्रवाल, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. निधि रावत, डॉ. अमलेश, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ब्रजेश डोभाल, टीबी मुक्त भारत अभियान के समस्त नोडल अधिकारी, समस्त प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, समस्त एसटीएस सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं संबंधित कार्मिक उपस्थित रहे।
