तमिलनाडु के मदुरै शहर स्थित विश्व प्रसिद्ध मिनाक्षी सुन्दरी मंदिर में विराजमान साक्षात शंकर भगवान व मां मिनाक्षी का दर्शन लाभ करें प्राप्त
मदुरै, तमिलनाडु, डॉ. शोभा राम उनियाल: मां गंगे शिवशंकर तीर्थ यात्रा कम्पनी ऋषिकेश द्वारा धर्मार्थ करवाये जा रहे तीर्थयात्रियों का एक दल आज दक्षिण भारत के तमिलनाडु प्रान्त के मदुरै शहर के अन्तर्गत विश्व प्रसिद्ध मिनाक्षी सुन्दरी मंदिर में विराजमान साक्षात भगवान सुन्दरम (शंकर भगवान) व मां मिनाक्षी का दर्शन लाभ प्राप्त करने हेतु मदुरै पंहुचा।
स्थानीय लोगों व पौराणिक कथा के अनुसार के अनुसार मदुरै के राजा मलय ध्वज पांड्या और उनकी पत्नी ने पुत्र पाने के लिए यज्ञ किया था। इस यज्ञ से उन्हें जो पुत्री प्राप्त हुई, उसकी आयु तीन वर्ष थी। एक सामान्य बच्चे से आयु में बड़ी जन्मीं पुत्री की एक विशेष बात यह थी कि उसकी आंखें मछली की तरह बड़ी-बड़ी और सुडौल थी। इस कारण से राजा मलय ध्वज और उनकी पत्नी ने अपनी पुत्री का नाम मीनाक्षी रखा।
भगवान शिव सुंदरेश्वर के रूप में मदुरै आए थे, ताकि वे पांड्या शासक की बेटी मीनाक्षी से विवाह कर सकें. मीनाक्षी देवी पार्वती का ही एक रूप थीं।
इस प्रकार मीनाक्षी अम्मन मंदिर उनके मिलन को समर्पित है। विशाल मंदिर ऊंची दीवारों से घिरा हुआ है, जिसमें ऊंची-ऊंची मीनारें बंधी हैं।
मीनाक्षी देवी पार्वती का ही एक रूप थीं। मीनाक्षी अम्मन मंदिर उनके मिलन को समर्पित है। विशाल मंदिर ऊंची दीवारों से घिरा हुआ है, जिसमें ऊंची-ऊंची मीनारें बंधी हैं। गोपुर , या प्रवेश द्वार टॉवर।
मीनाक्षी देवी मंदिर 2500 साल पुराना है। मंदिर की भव्य बनावट के अलावा मंदिर में स्थित मीनाक्षी देवी की प्रतिमा भी लोगों के लिए बहुत ही रहस्यमय है क्योंकि मीनाक्षी देवी की प्रतिमा में तीन स्तन है।
मां मीनाक्षी के पास एक तोता भी है। इस सम्बन्ध में स्थानीय लोगों से जानकारी लेनें पर पता चला कि देवी मीनाक्षी (पार्वती) तोते के रूप में पति भगवान शिव के प्रति अपना प्रेम प्रदर्शित करती हैं। देवी पार्वती को आमतौर पर तोते के साथ दर्शाया जाता है।
यह मंदिर पहली बार 2000 साल पहले अस्तित्व में आया था और थिरुमलाई नायक (1623-55 ई.) के शासनकाल के दौरान इसका काफी विस्तार किया गया था।
यहां भगवान शिव अपने सुंदरेश्वर अवतार में और उनकी मछली जैसी आँखों वाली पत्नी मीनाक्षी इस जुड़वां मंदिर में विराजमान हैं।
तमिलनाडु प्रान्त के मुदरै शहर में स्थित इस मीनाक्षी सुंदरम मंदिर में हजारों की संख्या में भक्तजन यहां के विभिन्न दिशाओं के मुख्यद्वार से प्रवेश करते हैं।
यद्यपि मंदिर के अन्दर की सभी व्यवस्थाएं चुस्त दुरुस्त हैं किन्तु प्रवेश द्वारों पर मोवाइल व सामान आदि के जमा करवानें पर देश व विभिन्न प्रदेशों से आये हुये यात्रियों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है,जिस ओर मंदिर प्रशासन को विशेष ध्यान दिये जानें से समाधान हो सकता है।
