पहली कैबिनेट में मेडिकल कॉलेज की स्वीकृति का दावा हुआ फेल! राकेश राणा बोले—किशोर उपाध्याय जनता से मांगें माफी
7 अगस्त की कैबिनेट बैठक में टिहरी मेडिकल कॉलेज पर निर्णय न होने से कांग्रेस का हमला; बोले—जनता अब आश्वासन नहीं, स्वीकृति और धरातल पर काम चाहती है
नई टिहरी। टिहरी मेडिकल कॉलेज की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव राकेश राणा ने टिहरी विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री किशोर उपाध्याय के उस दावे पर सवाल उठाए हैं, जिसमें पहली ही कैबिनेट बैठक में मेडिकल कॉलेज को स्वीकृति मिलने की बात कही गई थी।
राकेश राणा ने कहा कि टिहरी मेडिकल कॉलेज को लेकर सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की ओर से लगातार आश्वासन दिए जा रहे हैं, लेकिन अब तक जनता के सामने ऐसी कोई ठोस स्वीकृति अथवा कार्ययोजना नहीं आई है, जिससे मेडिकल कॉलेज की स्थापना की दिशा में वास्तविक प्रगति दिखाई दे।
मुख्यमंत्री आवास पर हुई थी त्रिपक्षीय वार्ता
राकेश राणा के अनुसार, टिहरी मेडिकल कॉलेज की मांग को लेकर जब टिहरी की जनता आंदोलनरत थी, उस दौरान मुख्यमंत्री आवास पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, किशोर उपाध्याय और स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के बीच त्रिपक्षीय वार्ता हुई थी।
उन्होंने दावा किया कि वार्ता के बाद किशोर उपाध्याय ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि पहली ही कैबिनेट बैठक में टिहरी मेडिकल कॉलेज को स्वीकृति प्रदान कर दी जाएगी।
राणा ने कहा कि इस सार्वजनिक दावे के बाद टिहरी की जनता की उम्मीदें बढ़ गई थीं और लोगों को विश्वास था कि अब मेडिकल कॉलेज की वर्षों पुरानी मांग निर्णायक चरण में पहुंच गई है।
7 अगस्त की कैबिनेट बैठक पर टिकी थीं टिहरी की निगाहें
राकेश राणा ने कहा कि 7 अगस्त 2026 को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक हुई। टिहरी जनपद की जनता की निगाहें इस बैठक पर टिकी थीं। लोगों को उम्मीद थी कि किशोर उपाध्याय द्वारा किए गए दावे के अनुरूप कैबिनेट में टिहरी मेडिकल कॉलेज को स्वीकृति मिल जाएगी।
लेकिन उनके अनुसार कैबिनेट बैठक समाप्त होने के बाद मेडिकल कॉलेज को लेकर कोई स्पष्ट निर्णय अथवा सार्वजनिक घोषणा सामने नहीं आई।
इसी को लेकर उन्होंने किशोर उपाध्याय से सवाल करते हुए कहा कि यदि पहली कैबिनेट में स्वीकृति का दावा किया गया था, तो अब जनता यह जानना चाहती है कि टिहरी मेडिकल कॉलेज की स्वीकृति कहां है?
‘जनता को गुमराह करने के बजाय स्थिति स्पष्ट करें’
राकेश राणा ने कहा कि जनता को आश्वासन देना और फिर उस पर खरा न उतरना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज जैसे संवेदनशील और जनहित से जुड़े विषय पर केवल राजनीतिक बयान या आश्वासन पर्याप्त नहीं हैं।
उन्होंने किशोर उपाध्याय से मांग की कि वे टिहरी की जनता के सामने मेडिकल कॉलेज की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करें और यदि उनके द्वारा किया गया दावा पूरा नहीं हुआ है तो जनता से माफी मांगें।
राणा ने कहा कि जनता को यह स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि मेडिकल कॉलेज के लिए क्या निर्णय हुआ है, प्रस्ताव किस स्तर पर है, भूमि और बजट की क्या स्थिति है तथा निर्माण कार्य कब शुरू होगा।
‘मेडिकल कॉलेज कोई चुनावी जुमला नहीं’
प्रदेश कांग्रेस महासचिव ने कहा कि टिहरी मेडिकल कॉलेज कोई राजनीतिक घोषणा अथवा चुनावी जुमला नहीं है, बल्कि यह टिहरी जनपद की वर्षों पुरानी और जनस्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों के लोगों को गंभीर बीमारियों और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं के लिए देहरादून अथवा अन्य मैदानी क्षेत्रों पर निर्भर रहना पड़ता है। मेडिकल कॉलेज की स्थापना होने से टिहरी सहित आसपास के पर्वतीय क्षेत्रों को बेहतर चिकित्सा सेवाएं मिल सकती हैं।
इसके साथ ही चिकित्सा शिक्षा, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता, रोजगार, आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी इसका लाभ मिलने की उम्मीद है।
कांग्रेस ने आंदोलन को समर्थन देने का किया ऐलान
राकेश राणा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी टिहरी की जनता की इस मांग के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने सरकार से मांग की कि बयानबाजी और आश्वासनों से आगे बढ़कर मेडिकल कॉलेज के संबंध में स्पष्ट, समयबद्ध और दस्तावेजी निर्णय लिया जाए।
उन्होंने कहा कि जनता अब केवल घोषणाएं सुनने के लिए तैयार नहीं है। लोगों को मेडिकल कॉलेज की वास्तविक स्वीकृति, बजट और निर्माण कार्य शुरू होने की जानकारी चाहिए।
राणा बोले—‘जनता अब नींव देखना चाहती है’
राकेश राणा ने कहा कि टिहरी की जनता को बार-बार आश्वासन देने के बजाय मेडिकल कॉलेज की वास्तविक स्थिति तथ्यों के साथ सार्वजनिक की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा, “जनता अब केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि मेडिकल कॉलेज की वास्तविक स्वीकृति और धरातल पर काम शुरू होते देखना चाहती है।”
उन्होंने दोहराया कि सरकार यदि टिहरी मेडिकल कॉलेज को लेकर गंभीर है तो उसे जल्द से जल्द औपचारिक स्वीकृति, बजट, भूमि और निर्माण की समय-सीमा सार्वजनिक करनी चाहिए।
