जिलाधिकारी के आदेश के बावजूद जनपद भर में हो रहा है पोल्ट्री उत्पादों का गुप्त परिवहन, संक्रमण रोकथाम को लेकर बढ़ी चुनौती
बर्ड फ्लू संक्रमण रोकथाम हेतु टिहरी में कुक्कुट पक्षियों व उत्पादों के परिवहन पर रोक जारी
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के सीमावर्ती जिलों में बर्ड फ्लू के मामलों को देखते हुए प्रशासन ने सतर्कता बढ़ाई, टिहरी जिले में कुक्कुट पक्षियों और उनके उत्पादों के प्रवेश व निकासी पर कड़ी निगरानी।
टिहरी गढ़वाल, 26 अगस्त 2025।
पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के जनपद ऊधमसिंह नगर और बागेश्वर में कुक्कुट फार्म पर पक्षियों की असामान्य मृत्यु के मामले सामने आने के बाद प्रशासन अलर्ट मोड पर है। भारत सरकार द्वारा Highly Pathogenic Avian Influenza (बर्ड फ्लू) को रोकने के लिए Prevention and Control of Infectious and Contagious Disease Animal Act, 2009 के अंतर्गत जनपद टिहरी गढ़वाल में विशेष सतर्कता लागू की गई है।
जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल के आदेशानुसार, जिले की सीमा में कुक्कुट पक्षियों, अंडों और कुक्कुट मांस के आयात-निर्यात पर रोक लगाई गई है। यह आदेश 14 अगस्त 2025 से प्रभावी किया गया था और इसे अब 27 अगस्त से एक सप्ताह तक बढ़ा दिया गया है।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जब तक स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक बाहरी राज्यों से कुक्कुट उत्पादों का परिवहन पूर्ण रूप से प्रतिबंधित रहेगा। साथ ही जिले के सभी अधिकारियों को सतर्क रहने और संक्रमण रोकथाम के लिए दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।
जिलाधिकारी का आदेश:
- टिहरी जिले की सीमा में कुक्कुट पक्षियों, अंडों व कुक्कुट मांस का आयात-निर्यात वर्जित रहेगा।
- बाहरी राज्यों से जिले में कोई भी पोल्ट्री उत्पाद नहीं लाया जा सकेगा।
- आदेश तत्काल प्रभाव से लागू रहेगा।
इस रोक का उद्देश्य संक्रमण के प्रसार को रोकना और जिले में पशुधन तथा जनस्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। प्रशासन ने आमजन से भी अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और सतर्क रहते हुए निर्धारित नियमों का पालन करें।
आपको बताते चलें कि जनपद टिहरी गढ़वाल में बर्ड फ्लू संक्रमण की रोकथाम के लिए प्रशासन ने हाल ही में सख्त कदम उठाए हैं। पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के रामपुर जनपद के बिलासपुर विकासखंड के कुछ ग्रामों में बर्ड फ्लू के मामले सामने आने के बाद, टिहरी जिला प्रशासन ने यू.पी. से कुक्कुट और उससे जुड़े उत्पादों के परिवहन पर दो सप्ताह की रोक लगा दी है।
जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल नितिका खण्डेलवाल ने स्पष्ट निर्देश दिए कि इस अवधि में किसी भी प्रकार की पोल्ट्री या उससे संबंधित उत्पाद (जैसे अंडे, मांस इत्यादि) को टिहरी में लाने की अनुमति नहीं होगी।
हालांकि, इस आदेश के बावजूद भी जनपद भर में गुपचुप कुक्कुट पक्षियों व उत्पादों का परिवहन अनवरत जारी है, जिससे संक्रमण रोकथाम की चुनौती और अधिक गंभीर हो गई है।
आदेश और प्रशासनिक पहल
जिलाधिकारी ने पशुपालन एवं खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिले की सभी सीमाओं पर चेक पोस्ट बनाए जाएं और वाहनों की सघन जांच हो।
- सभी पोल्ट्री फार्मों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया जा रहा है।
- ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है ताकि लोग बीमार या मृत पाए जाने वाले पक्षियों की सूचना तुरंत प्रशासन को दें।
- जिला आपदा प्रबंधन विभाग को भी अलर्ट पर रखा गया है।
खतरे की स्थिति
विशेषज्ञों का कहना है कि बर्ड फ्लू संक्रमण केवल पक्षियों तक सीमित नहीं है, बल्कि मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर डाल सकता है। संक्रमित मुर्गियों या उत्पादों के सीधे संपर्क में आने पर यह वायरस फैल सकता है।
टिहरी जैसे पर्वतीय और ग्रामीण क्षेत्रों में जहां मुर्गीपालन आजीविका का एक प्रमुख स्रोत है, वहां बर्ड फ्लू का खतरा और भी अधिक गंभीर माना जा रहा है।
गुपचुप परिवहन की चुनौती
जिले के कई इलाकों से शिकायतें मिल रही हैं कि कुछ व्यापारी प्रशासनिक आदेशों की अनदेखी करते हुए रात के समय या गुप्त रास्तों से कुक्कुट उत्पादों की सप्लाई कर रहे हैं।
- इससे न केवल आदेश की अवहेलना हो रही है, बल्कि संक्रमण का खतरा भी बढ़ रहा है।
- स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बाजारों में खुलेआम अंडे और चिकन बिक रहे हैं, जबकि प्रशासन ने रोक लगाने की घोषणा कर दी है।
ग्रामीणों की यह चिंता वाजिब है कि यदि समय रहते इस गतिविधि पर रोक नहीं लगी तो यह संक्रमण गांव-गांव और घर-घर तक पहुंच सकता है।
ग्रामीणों और व्यापारियों की प्रतिक्रिया
- कुछ ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को सख्ती से जांच करनी चाहिए और यदि कोई व्यापारी इस नियम का उल्लंघन करता पाया जाता है तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
- दूसरी ओर, कुछ पोल्ट्री व्यापारी इसे अपने व्यवसाय पर संकट बता रहे हैं। उनका कहना है कि पहले से ही पर्वतीय जिलों में परिवहन महंगा है, और अब यह प्रतिबंध उनकी आजीविका पर भारी पड़ रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की तैयारी
जिला अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को सतर्क मोड पर रखा गया है।
- बर्ड फ्लू के लक्षणों की पहचान के लिए डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।
- संदिग्ध मरीजों और पक्षियों के लिए अलग आइसोलेशन वार्ड बनाए गए हैं।
- पशुपालन विभाग ने गांव-गांव जाकर वैक्सिनेशन और जांच अभियान शुरू कर दिया है।
प्रशासन की अपील
जिलाधिकारी ने अपील की है कि –
- ग्रामीण और नागरिक संक्रमित पक्षियों को छुएं नहीं।
- बीमार पक्षियों की सूचना तुरंत पशुपालन विभाग को दें।
- अंडे या चिकन का सेवन करने से पहले उसे अच्छी तरह पकाकर ही खाएं।
- अफवाहों पर ध्यान न दें, बल्कि केवल आधिकारिक सूचना स्रोतों पर विश्वास करें।
संक्रमण रोकथाम में जनभागीदारी की भूमिका
किसी भी आपदा या संक्रमण को रोकने में केवल प्रशासन की भूमिका पर्याप्त नहीं होती।
- यदि ग्रामीण स्तर पर पंचायतें और स्वयंसेवी संगठन आगे आएं तो स्थिति को और प्रभावी ढंग से संभाला जा सकता है।
- स्वयं सहायता समूह और महिला मंडल गांव-गांव में जनजागरूकता अभियान चला सकते हैं।
- बच्चों और युवाओं को भी स्कूलों और महाविद्यालयों के माध्यम से इसके खतरों से अवगत कराया जाना जरूरी है।
भविष्य की रणनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की संक्रामक बीमारियों से बचने के लिए दीर्घकालिक रणनीति अपनानी होगी।
- राज्य स्तर पर पोल्ट्री परिवहन पर डिजिटल निगरानी व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।
- सीमा क्षेत्रों पर स्थायी हेल्थ चेक सेंटर बनाए जाएं।
- पोल्ट्री फार्मों में सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य किया जाए।
- ग्रामीण स्तर पर छोटे-छोटे कोल्ड स्टोरेज और टेस्टिंग लैब स्थापित किए जाएं।
बर्ड फ्लू संक्रमण रोकथाम के लिए टिहरी प्रशासन ने सराहनीय पहल की है। लेकिन, यदि गुपचुप परिवहन पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई, तो यह बीमारी जनपद में फैल सकती है।
ऐसे में केवल आदेश जारी कर देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी जमीनी निगरानी और सख्ती से अनुपालन भी उतना ही आवश्यक है।
