रानीखेत की बंद पड़ी को-ऑपरेटिव ड्रग फैक्ट्री को मिलेगा नया जीवन, 200 से अधिक युवाओं को मिलेगा रोजगार: डॉ. धन सिंह रावत
यूसीएफ ने तैयार किया पुनरुद्धार का रोडमैप, आयुर्वेदिक औषधि निर्माण से किसानों और युवाओं को मिलेगा बड़ा लाभ
देहरादून, 01 जून 2026, SKS News।
उत्तराखंड में सहकारिता आधारित औद्योगिक विकास को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। लंबे समय से बंद पड़ी रानीखेत स्थित को-ऑपरेटिव ड्रग फैक्ट्री (CDF) और हल्दूचैड़ स्थित उत्तराखंड स्टेट मेडिसिन एंड पैरामेडिकल्स लिमिटेड (UMPL) के दिन अब फिर बहुरने वाले हैं। उत्तराखंड राज्य सहकारी संघ (UCF) ने दोनों निष्क्रिय औद्योगिक इकाइयों के पुनरुद्धार के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार कर ली है।
सूबे के सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि राज्य सरकार सहकारिता क्षेत्र को रोजगार, स्वरोजगार और आर्थिक विकास का मजबूत आधार बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से वर्षों से बंद पड़ी इन महत्वपूर्ण इकाइयों को आधुनिक स्वरूप देकर पुनः संचालित किया जाएगा।
आधुनिक तकनीक से होगा कायाकल्प
डॉ. रावत ने बताया कि दोनों इकाइयों में अत्याधुनिक मशीनरी, आधुनिक प्रयोगशालाएं तथा उन्नत उत्पादन प्रणाली स्थापित की जाएगी। गुणवत्ता मानकों के अनुरूप आयुर्वेदिक औषधियों का उत्पादन शुरू कर उत्तराखंड को आयुर्वेदिक उत्पादों के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है।
उन्होंने कहा कि नवीनीकरण और तकनीकी उन्नयन के बाद ये इकाइयां राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी संस्थानों के रूप में स्थापित होंगी।
आयुर्वेदिक औषधियों का होगा बड़े स्तर पर उत्पादन
पुनर्संचालन के बाद दोनों इकाइयों में चूर्ण, वटी, रस, भस्म, तैल, आसव-अरिष्ट, गुग्गुल एवं पाक-अवलेह जैसी पारंपरिक आयुर्वेदिक औषधियों का निर्माण किया जाएगा।
निर्मित होने वाले प्रमुख उत्पादों में—
- महाशंख वटी
- आरोग्यवर्धिनी वटी
- त्रिफला चूर्ण
- अश्वगंधा चूर्ण
- अर्जुनारिष्ट
- दशमूलारिष्ट
- महानारायण तैल
- अभ्रक भस्म
जैसी प्रसिद्ध आयुर्वेदिक औषधियां शामिल रहेंगी।
200 से अधिक युवाओं को मिलेगा प्रत्यक्ष रोजगार
सहकारिता मंत्री ने बताया कि दोनों इकाइयों के पूर्ण संचालन से 200 से अधिक युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। इसके अतिरिक्त रानीखेत, हल्दूचैड़ एवं आसपास के क्षेत्रों के 500 से 1000 किसान औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती के माध्यम से इन परियोजनाओं से सीधे जुड़ सकेंगे।
उन्होंने कहा कि कच्चे माल की आपूर्ति, प्रसंस्करण, परिवहन, पैकेजिंग, विपणन एवं वितरण से जुड़े हजारों लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार एवं आजीविका के अवसर भी प्राप्त होंगे।
100 करोड़ रुपये वार्षिक कारोबार का लक्ष्य
डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि दोनों इकाइयों के पूर्ण क्षमता से संचालन के बाद लगभग 100 करोड़ रुपये वार्षिक कारोबार का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इससे प्रतिवर्ष 10 से 15 करोड़ रुपये तक लाभ अर्जित होने की संभावना है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक उत्पादन तकनीक और गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली के माध्यम से उत्तराखंड के आयुर्वेदिक उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाया जाएगा।
किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा संबल
डॉ. रावत ने कहा कि उत्तराखंड औषधीय एवं सुगंधित वनस्पतियों के मामले में देश के सबसे समृद्ध राज्यों में शामिल है। सरकार का उद्देश्य किसानों को औषधीय खेती से जोड़ना, युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना तथा सहकारिता के माध्यम से आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।
उन्होंने कहा कि सीडीएफ और यूएमपीएल का पुनर्संचालन केवल औषधि निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह सहकारिता आधारित औद्योगिक विकास का एक आदर्श मॉडल बनेगा।
उत्तराखंड के लिए ऐतिहासिक पहल
सहकारिता मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड राज्य सहकारी संघ की यह पहल आयुर्वेदिक औषधि निर्माण, किसान समृद्धि, रोजगार सृजन और सहकारिता आंदोलन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगी।
उन्होंने विश्वास जताया कि इन इकाइयों के पुनर्जीवन से राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और स्थानीय युवाओं को अपने क्षेत्र में ही बेहतर रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।
