रामलीला टिहरी के अष्टम दिवस में लंका दहन तक के रोमांचकारी प्रसंगों का मंचन, भारी बारिश बनी बाधा
हनुमान-मेघनाद युद्ध और अशोक वाटिका विध्वंस ने बांधा समां, जलभराव से समय पूर्व रोकनी पड़ी रामलीला
नई टिहरी, SKS News।
टिहरी की ऐतिहासिक रामलीला के अष्टम दिवस पर हनुमान जी द्वारा समुद्र पार कर लंका पहुंचने से लेकर लंका दहन तक के रोमांचकारी प्रसंगों का भव्य एवं प्रभावशाली मंचन किया गया। कलाकारों के जीवंत अभिनय, आकर्षक वेशभूषा और दमदार संवादों ने देर रात तक दर्शकों को मंत्रमुग्ध बनाए रखा।
रामलीला का शुभारंभ हनुमान जी के समुद्र लांघकर लंका पहुंचने के प्रसंग से हुआ। इसके बाद माता सीता से भेंट कर भगवान श्रीराम की निशानी स्वरूप अंगूठी प्रदान करने, अशोक वाटिका विध्वंस, मेघनाद-हनुमान युद्ध और लंका दहन जैसे महत्वपूर्ण प्रसंगों का शानदार मंचन किया गया। विशेष रूप से राम, लक्ष्मण, माता सीता, हनुमान, मेघनाद और रावण की भूमिकाओं ने दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी।
हालांकि अष्टम दिवस की रामलीला का मंचन अंगद-रावण संवाद तक प्रस्तावित था, लेकिन देर रात हुई मूसलाधार बारिश के कारण कार्यक्रम को निर्धारित समय से पूर्व ही समाप्त करना पड़ा।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व विधायक घनसाली विधानसभा भीम लाल आर्य उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है, जबकि हमारी सनातन संस्कृति और परंपराएं धीरे-धीरे कमजोर होती दिखाई दे रही हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाकर ही हम अपनी सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रख सकते हैं। रामलीला जैसे आयोजन भारतीय संस्कृति और संस्कारों को जीवित रखने का सशक्त माध्यम हैं।
विशिष्ट अतिथि के रूप में आनंद सिंह रावत (पूर्व जिला पंचायत सदस्य), लक्ष्मी प्रसाद बड़ोनी अधिवक्ता, विजय कठैत सभासद, शैलेश उनियाल, खुशी लाल (पूर्व प्रधान एवं क्षेत्र पंचायत सदस्य), देवेंद्र दुमोगा, ज्योति डोभाल, अशोक कुमार राठौर तथा दर्शन लाल उनियाल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
पूर्व जिला पंचायत सदस्य आनंद सिंह रावत ने रामलीला समिति की सराहना करते हुए कहा कि समिति द्वारा वर्षों से सांस्कृतिक परंपराओं को जीवित रखने का सराहनीय कार्य किया जा रहा है।
रामलीला समिति के अध्यक्ष देवेंद्र नौडियाल ने भारी वर्षा के कारण उत्पन्न अव्यवस्थाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बौराड़ी स्टेडियम में जलभराव की समस्या वर्षों पुरानी है, लेकिन आज तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन हर वर्ष केवल आश्वासन देता है, जबकि समस्या जस की तस बनी हुई है।
उन्होंने बताया कि दर्शकों की सुविधा के लिए समिति द्वारा विशेष वाटरप्रूफ हैंगर टेंट लगाए गए थे, लेकिन स्टेडियम में अत्यधिक जलभराव होने के कारण पानी टेंट के भीतर तक पहुंच गया, जिससे दर्शकों और कलाकारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा और कार्यक्रम को बीच में ही समाप्त करना पड़ा।
रामलीला समिति ने प्रशासन से बौराड़ी स्टेडियम की जलनिकासी व्यवस्था का स्थायी समाधान करने की मांग की, ताकि भविष्य में ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों में व्यवधान उत्पन्न न हो।
कार्यक्रम के दौरान समिति के अध्यक्ष देवेंद्र नौडियाल एवं अन्य पदाधिकारियों ने सभी अतिथियों का अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया।
मंच संचालन समिति के संरक्षक सतीश थपलियाल द्वारा किया गया। इस अवसर पर संयोजक डॉ. राकेश भूषण गोदियाल, संरक्षक मोहन सिंह रावत, महासचिव अमित पंत, निर्देशक अनुराग पंत, सचिव गंगा भगत नेगी सहित समिति के अनेक पदाधिकारी, सदस्य एवं बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालु उपस्थित रहे।
