संयुक्त राष्ट्र की पहल पर दुनिया भर में जागरूकता कार्यक्रम, जेजू (दक्षिण कोरिया) बना वैश्विक मंच; भारत में स्वच्छ भारत मिशन और सिंगल यूज़ प्लास्टिक प्रतिबंध पर ज़ोर
*📝 कलम से — प्रो.डॉ. अनीता तोमर
हर वर्ष 5 जून को मनाया जाने वाला विश्व पर्यावरण दिवस इस वर्ष “प्लास्टिक प्रदूषण का अंत” (End Plastic Pollution) जैसे अत्यंत समयानुकूल और महत्वपूर्ण विषय पर केंद्रित है। यह विषय न केवल पर्यावरण की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डालता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक जागरण और चेतावनी है।
इस वर्ष की मेज़बानी दक्षिण कोरिया का जेजू प्रांत कर रहा है, जो अपने पर्यावरणीय प्रयासों और सतत विकास नीतियों के लिए वैश्विक पहचान रखता है। सम्मेलन में दुनियाभर के वैज्ञानिक, नीति-निर्माता, पर्यावरणविद् और जागरूक नागरिक एकत्र होकर प्लास्टिक प्रदूषण के विरुद्ध व्यावहारिक समाधान खोजने में जुटे हैं।
📌 प्लास्टिक: सुविधा से संकट तक
प्लास्टिक आज जीवन का अभिन्न अंग बन चुका है – चाहे वह खाद्य पैकेजिंग हो, चिकित्सा उपकरण, या फिर दैनिक उपभोग की वस्तुएँ। परंतु जब यही प्लास्टिक अनुपयोगी होकर कचरे का रूप लेता है, तो यह समुद्री जीवन, नदियों, वनों, मृदा और मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन जाता है।
हर वर्ष लगभग 30 करोड़ टन प्लास्टिक का उत्पादन होता है, जिसमें से एक बड़ी मात्रा जल निकायों में चली जाती है। इससे जलजीवों की मृत्यु, जैवविविधता पर संकट और माइक्रोप्लास्टिक के रूप में मानव शरीर तक प्लास्टिक का पहुँचना एक खतरनाक सच्चाई बन चुका है।
शोध बताते हैं कि एक सामान्य व्यक्ति प्रतिदिन लगभग एक क्रेडिट कार्ड जितना प्लास्टिक निगल रहा है, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत घातक है – इससे हृदय रोग, हार्मोनल असंतुलन, प्रजनन समस्याएँ और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियाँ जुड़ी हैं।
🌿 समाधान की ओर कदम
- जेजू प्रांत ने 2040 तक प्लास्टिक मुक्त क्षेत्र बनने का संकल्प लिया है।
- भारत के कई राज्यों ने सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर प्रतिबंध और पुनर्चक्रण की व्यवस्था को लागू किया है।
- स्वच्छ भारत मिशन और UNEP जैसी पहलें प्लास्टिक कचरे के जिम्मेदार निस्तारण की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
🙌 क्या कर सकते हैं हम?
- सिंगल यूज़ प्लास्टिक का बहिष्कार करें – प्लास्टिक थैली, बोतल, कटलरी के स्थान पर कपड़ा, स्टील, बायोडीग्रेडेबल विकल्प अपनाएँ।
- कचरे का पृथक्करण और रीसायक्लिंग को जीवनशैली बनाएँ।
- समुद्र तटों, नदियों, पार्कों की सफाई अभियान में सहभागिता दें।
- परिवार, विद्यालय और समाज को जागरूक करें।
- सरकार और उद्योगों से सस्टेनेबल पैकेजिंग और सर्कुलर इकोनॉमी को प्रोत्साहन की माँग करें।
📚 शिक्षा से समाधान
विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में प्लास्टिक प्रदूषण पर विशेष शिक्षा, प्रदर्शनी, निबंध प्रतियोगिता, और शोध कार्यक्रमों के माध्यम से भावी पीढ़ी को प्रशिक्षित करना आज की सबसे बड़ी ज़रूरत है।
“प्लास्टिक का अंत ही, प्रकृति की नई शुरुआत है।”
विश्व पर्यावरण दिवस 2025 केवल एक चेतावनी नहीं है, बल्कि एक संकल्प है। यह हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम अपनी धरती को प्लास्टिक प्रदूषण से मुक्त करने में सक्रिय भूमिका निभाएँ। एक स्वच्छ, सुंदर और टिकाऊ भविष्य का निर्माण हम आज के फैसलों से ही करेंगे।
गणित विभाग
पंडित ललित मोहन शर्मा परिसर
श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय, ऋषिकेश
