🕉️ आस्था, सेवा और समर्पण का अद्भुत संगम
श्री राज राजेश्वरी देवी मंदिर जलेड में दुर्गाष्टमी पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
नकोट, टिहरी: चैत्र नवरात्रि की पावन बेला में दुर्गाष्टमी का दिन, जब मां दुर्गा की आराधना अपने चरम पर होती है, उसी दिव्य अवसर पर श्री राज राजेश्वरी देवी मंदिर, जलेड में आस्था का अनुपम दृश्य देखने को मिला। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का ऐसा सैलाब उमड़ा, मानो हर हृदय मां के चरणों में समर्पित होने को आतुर हो।
घंटियों की गूंज, मंत्रों का उच्चारण और भक्तों की श्रद्धा से परिपूर्ण वातावरण ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। हर कोई मां के दर्शन कर अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना कर रहा था।
🙏 सेवा की मिसाल बना विद्युत विभाग चम्बा
इस धार्मिक आयोजन की सबसे विशेष बात रही सेवा भाव।
विद्युत विभाग चम्बा के एसडीओ अशोक कुमार के नेतृत्व में विभाग के कर्मचारियों—अवर अभियंता सहित पूरी टीम—ने दिनभर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सेवा में अपना अमूल्य योगदान दिया।
भंडारे की व्यवस्था से लेकर श्रद्धालुओं को भोजन वितरण, जल सेवा और व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखने तक, हर कार्य में इन कर्मयोगियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। यह दृश्य इस बात का प्रमाण था कि जब सरकारी तंत्र समाज के साथ जुड़ता है, तो सेवा का स्वरूप और भी विशाल हो जाता है।
🍛 विशाल भंडारा: एकता और समरसता का प्रतीक
दुर्गाष्टमी के अवसर पर आयोजित विशाल भंडारा केवल भोजन वितरण नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और समरसता का प्रतीक बन गया।
यहां हर वर्ग, हर आयु और हर पृष्ठभूमि के लोग एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण कर रहे थे—बिना किसी भेदभाव के।
भंडारे में शामिल हर व्यक्ति के चेहरे पर संतोष और आभार की झलक थी, जो इस आयोजन की सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है।
🌺 आस्था के साथ सामाजिक संदेश
इस आयोजन ने एक महत्वपूर्ण संदेश भी दिया—
धर्म केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं, बल्कि सेवा, सहयोग और समाज के प्रति जिम्मेदारी भी है।
जिस प्रकार विद्युत विभाग के कर्मचारियों ने अपनी ड्यूटी से आगे बढ़कर सेवा का कार्य किया, वह समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। यह बताता है कि सच्ची भक्ति वही है, जो मानवता की सेवा में दिखाई दे।
✨श्री राज राजेश्वरी देवी मंदिर जलेड में दुर्गाष्टमी का यह आयोजन केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आस्था, सेवा और सामाजिक समरसता का जीवंत उदाहरण बन गया।
मां के चरणों में झुके हजारों सिर और सेवा में जुटे कर्मयोगियों के हाथ—दोनों मिलकर यह संदेश दे गए कि
👉 “जहां श्रद्धा है, वहां शक्ति है… और जहां सेवा है, वहीं सच्चा धर्म है।”


