दुर्गाष्टमी पर चंबा क्षेत्र में हरियाली वितरण और भव्य भंडारों का आयोजन, श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
छोटा स्यूटा से सावली मां मंदिर तक आस्था का उत्सव—हरियाली प्रसाद और गढ़ भोज में शामिल हुए सैकड़ों श्रद्धालु
चंबा (टिहरी गढ़वाल) | रिपोर्ट: सोमवारी लाल सकलानी ‘निशांत’ | दिनांक: 23 मार्च 2026
नवरात्र महाष्टमी के पावन अवसर पर टिहरी गढ़वाल के चंबा क्षेत्र में श्रद्धा, आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। क्षेत्र के विभिन्न गांवों और मंदिरों में देवी मां की पूजा-अर्चना के साथ हरियाली (जौ) को प्रसाद स्वरूप वितरित किया गया तथा भव्य भंडारों का आयोजन किया गया।
🌿 छोटा स्यूटा में विशाल सामूहिक भंडारा
छोटा स्यूटा गांव में सामूहिक रूप से विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इस दौरान लोगों ने हरियाली प्रसाद ग्रहण किया और पारंपरिक गढ़ भोज में सम्मिलित होकर धार्मिक उत्सव का आनंद लिया।
ग्राम प्रधान दर्शनी भंडारी ने गांव की खुशहाली और समृद्धि के लिए माता रानी से प्रार्थना की। कार्यक्रम में ब्लॉक प्रमुख सुमन सज्वाण सहित विभिन्न गांवों के गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे। भगवान सिंह भंडारी और दिनेश भंडारी ने अतिथियों का स्वागत और सम्मान किया।
🛕 मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
वीर सौंराल्या मंदिर में भी भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी, जहां श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन कर प्रसाद ग्रहण किया।
वहीं सावली मां पुण्यांसिनी मंदिर में नवरात्र पूजा का समापन विधिवत भंडारे के साथ हुआ। यहां भी सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दर्शन कर प्रसाद ग्रहण किया और मां का आशीर्वाद लिया।
🌾 गांव-गांव में हरियाली काटने की परंपरा
मंजूड, कख्वाड़ी, गुल्डी सहित कई गांवों में पारंपरिक रूप से हरियाली काटी गई। नवरात्र के अष्टमी और नवमी के दिन हरियाली वितरण की यह परंपरा क्षेत्र में विशेष महत्व रखती है।
इस दौरान कन्याओं, ब्राह्मणों, औजी और नाते-रिश्तेदारों को भोजन कराने के बाद दक्षिणा देने की परंपरा का भी निर्वहन किया गया।
🕉️ नवरात्र का सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व
नवरात्र हिंदू धर्म का एक प्रमुख महापर्व है, जो आस्था, भक्ति और विजय का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व समाज में धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करता है।
विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि अब नवरात्र के दौरान पशु बलि (नौरता) जैसी प्रथाएं पूरी तरह से समाप्त हो चुकी हैं, जो समाज में सकारात्मक बदलाव का संकेत है।
दुर्गाष्टमी के अवसर पर चंबा क्षेत्र में आयोजित हरियाली वितरण और भंडारों ने न केवल धार्मिक आस्था को सशक्त किया, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपराओं को भी जीवंत बनाए रखा।
