NFHS-6 में उत्तराखण्ड ने रचा स्वास्थ्य विकास का नया इतिहास, मातृ-शिशु स्वास्थ्य और पोषण संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार
गर्भवती महिलाओं की देखभाल, टीकाकरण, पोषण और गैर-संचारी रोग नियंत्रण में राज्य ने दर्ज की बड़ी उपलब्धि, मुख्यमंत्री धामी ने स्वास्थ्य कर्मियों को दिया श्रेय
देहरादून, 31 मई 2026, SKS News।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) के नवीनतम आंकड़ों ने उत्तराखण्ड के स्वास्थ्य क्षेत्र की एक सकारात्मक और प्रेरणादायक तस्वीर प्रस्तुत की है। मातृ स्वास्थ्य, नवजात एवं बाल स्वास्थ्य, पोषण तथा गैर-संचारी रोगों (NCDs) से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण संकेतकों में राज्य ने उल्लेखनीय सुधार दर्ज कर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि राज्य सरकार की स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, सुदृढ़ स्वास्थ्य तंत्र और अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मियों के अथक परिश्रम का प्रतिफल है।
मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में हुआ उल्लेखनीय सुधार
NFHS-6 के अनुसार उत्तराखण्ड में गर्भवती महिलाओं को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई है।
- प्रथम तिमाही में गर्भवती महिलाओं के पंजीकरण की दर 68.8% से बढ़कर 80.6% हो गई।
- प्रसव पूर्व जांच (ANC) कवरेज 91.8% से बढ़कर 98.3% पहुंच गई।
- संस्थागत प्रसव 83.2% से बढ़कर 88.9% हो गए।
- प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा कराए गए प्रसव 83.7% से बढ़कर 90.3% तक पहुंच गए।
- प्रसव के दो दिनों के भीतर माताओं को मिलने वाली प्रसवोत्तर देखभाल 78% से बढ़कर 86.5% हो गई।
यह सुधार राज्य में सुरक्षित मातृत्व एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती पहुंच को दर्शाता है।
नवजात एवं बाल स्वास्थ्य में भी शानदार प्रगति
बाल स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में भी राज्य ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।
- जन्म के दो दिनों के भीतर नवजात शिशुओं को प्रसवोत्तर देखभाल मिलने की दर 78.9% से बढ़कर 86.7% हो गई।
- बच्चों में विटामिन-ए अनुपूरण 53.7% से बढ़कर 59.9% हो गया।
- 6 से 23 माह आयु वर्ग के बच्चों में पर्याप्त आहार प्राप्त करने की दर 12.2% से बढ़कर 19.2% हो गई।
विशेषज्ञों के अनुसार यह सुधार बच्चों के बेहतर पोषण एवं स्वस्थ विकास की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत है।
टीकाकरण अभियान ने दिखाई प्रभावशीलता
उत्तराखण्ड में टीकाकरण कार्यक्रमों के सकारात्मक परिणाम भी NFHS-6 में स्पष्ट रूप से दिखाई दिए हैं।
- पूर्ण टीकाकरण प्राप्त बच्चों का प्रतिशत 81.1% से बढ़कर 86% हो गया।
- खसरा की दूसरी खुराक प्राप्त करने वाले बच्चों का प्रतिशत 71.3% से बढ़कर 83.2% पहुंच गया।
- रोटावायरस वैक्सीन की तीनों खुराक प्राप्त करने वाले बच्चों का प्रतिशत 32.3% से बढ़कर 92.8% तक पहुंच गया।
यह उपलब्धि राज्य के व्यापक टीकाकरण अभियान और स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता को दर्शाती है।
कुपोषण में आई कमी, बच्चों का स्वास्थ्य हुआ बेहतर
कुपोषण से संबंधित संकेतकों में भी उत्तराखण्ड ने सकारात्मक सुधार दर्ज किया है।
- स्टंटिंग (कम लंबाई) 27% से घटकर 20% हो गई।
- वेस्टिंग (कम वजन) 13.2% से घटकर 11% हो गई।
- गंभीर वेस्टिंग 4.7% से घटकर 2% रह गई।
- कम वजन वाले बच्चों का प्रतिशत 21% से घटकर 19.6% हो गया।
- अधिक वजन (ओवरवेट) वाले बच्चों की संख्या 4.1% से घटकर मात्र 0.7% रह गई।
यह सुधार राज्य की पोषण योजनाओं की सफलता को दर्शाता है।
गैर-संचारी रोग नियंत्रण में भी मिली सफलता
NFHS-6 के आंकड़े बताते हैं कि राज्य में गैर-संचारी रोगों की रोकथाम और नियंत्रण के क्षेत्र में भी सकारात्मक परिणाम मिले हैं।
- महिलाओं में उच्च रक्तचाप की दर 22.9% से घटकर 14.5% हो गई।
- पुरुषों में उच्च रक्तचाप की दर 31.8% से घटकर 18.3% रह गई।
यह उपलब्धि नियमित स्क्रीनिंग, समयबद्ध उपचार और जन-जागरूकता अभियानों की सफलता को प्रमाणित करती है।
मुख्यमंत्री धामी ने स्वास्थ्य कर्मियों को दिया श्रेय
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने NFHS-6 के सकारात्मक परिणामों पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह राज्य सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों, मजबूत स्वास्थ्य सेवाओं तथा स्वास्थ्य कर्मियों के समर्पित प्रयासों का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण, टीकाकरण और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूत बनाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
मातृ स्वास्थ्य वार रूम बना प्रभावी पहल
राज्य सरकार द्वारा गर्भवती महिलाओं की निगरानी और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाओं के लिए स्थापित मातृ स्वास्थ्य (Maternal Health) वार रूम भी सकारात्मक परिणाम दे रहा है।
इसके माध्यम से गर्भवती महिलाओं की ट्रैकिंग, नियमित फॉलो-अप और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। सरकार मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) को 70 से कम लाने के सतत विकास लक्ष्य (SDG-2030) की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।
स्वास्थ्य कर्मियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार उत्तराखण्ड जैसी भौगोलिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों वाले राज्य में यह उपलब्धि चिकित्सकों, नर्सिंग अधिकारियों, एएनएम, सीएचओ, आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं तथा राज्य एवं जिला स्तर की स्वास्थ्य टीमों के सामूहिक प्रयासों से संभव हो सकी है।
स्वस्थ उत्तराखण्ड की ओर बढ़ते कदम
NFHS-6 के निष्कर्ष यह स्पष्ट संकेत देते हैं कि उत्तराखण्ड स्वास्थ्य, पोषण और मातृ-शिशु कल्याण के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार सुरक्षित मातृत्व, किशोर स्वास्थ्य, टीकाकरण, पोषण एवं गैर-संचारी रोग नियंत्रण सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
स्वस्थ माँ, स्वस्थ शिशु और स्वस्थ समाज की दिशा में उत्तराखण्ड के ये आंकड़े एक नए और समृद्ध भविष्य की आशा जगाते हैं।
