बीज बचाओ आंदोलन के सम्मेलन में गूंजी गांव, खेती और जल संरक्षण की आवाज, मुख्यमंत्री को भेजा जाएगा मांग पत्र
जंगली जानवरों से खेती बचाने, बैलों की खरीद पर सब्सिडी और गांवों में अवैध शराब बिक्री पर रोक की उठी मांग, किसानों और पर्यावरण संरक्षकों को किया गया सम्मानित
मांडई/नागणी, टिहरी गढ़वाल। रिपोर्ट: सोमवारी लाल सकलानी ‘निशांत’, SKS News.
हिमालयी गांवों की खेती, जल स्रोतों और पारंपरिक कृषि संस्कृति को बचाने के संकल्प के साथ बीज बचाओ आंदोलन द्वारा मांडई (नागणी) स्थित पिपलेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण में एक महत्वपूर्ण सेमिनार एवं जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। सम्मेलन में क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवी संगठनों, पर्यावरण प्रेमियों एवं ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर गांव और खेती से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर गंभीर मंथन किया।
कार्यक्रम में खेती-बाड़ी की सुरक्षा, जंगली जानवरों से फसलों को हो रहे नुकसान, बैलों की खरीद पर सरकारी सब्सिडी, जल संरक्षण, जैविक खेती के विस्तार तथा गांवों में बढ़ती अवैध शराब बिक्री जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
जंगली जानवरों से खेती बचाने की उठी मांग
सम्मेलन में ग्रामीणों ने कहा कि बंदर, जंगली सूअर तथा अन्य वन्यजीवों के बढ़ते आतंक के कारण खेती करना दिन-प्रतिदिन कठिन होता जा रहा है। किसानों की मेहनत और लागत दोनों प्रभावित हो रही हैं। कई स्थानों पर किसान खेती छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं।
ग्रामीणों ने सरकार से जंगली जानवरों की रोकथाम के लिए प्रभावी नीति बनाने तथा फसलों की सुरक्षा हेतु ठोस कदम उठाने की मांग की।
बैलों की खरीद पर सब्सिडी देने की मांग
वक्ताओं ने कहा कि पारंपरिक खेती की रीढ़ बैल हैं, लेकिन महंगाई और आर्थिक कठिनाइयों के कारण किसानों के लिए बैलों की खरीद कठिन होती जा रही है। ऐसे में सरकार को बैलों की खरीद पर विशेष सब्सिडी प्रदान करनी चाहिए, जिससे खेती और पशुपालन को नया जीवन मिल सके।
गांव के पानी पर गांव का अधिकार
सम्मेलन में जल संरक्षण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। वक्ताओं ने कहा कि गांवों के प्राकृतिक जल स्रोतों पर सबसे पहला अधिकार स्थानीय ग्रामीणों का होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पानी का संरक्षण कम और उपभोग अधिक हो रहा है। जल स्रोतों को बचाने और भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने हेतु सामुदायिक प्रयासों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
जैविक खेती और नशामुक्त गांवों पर जोर
कार्यक्रम में वक्ताओं ने जैविक खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि रासायनिक खेती से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हो रही है। उत्तराखंड की पहचान जैविक खेती से है और इसे पुनः मजबूत बनाने की आवश्यकता है।
ग्रामीणों ने गांवों में अवैध शराब की बिक्री पर चिंता व्यक्त करते हुए इस पर तत्काल रोक लगाने की मांग भी की।
मुख्यमंत्री को भेजा जाएगा मांग पत्र
बीज बचाओ आंदोलन के प्रणेता विजय जड़धारी ने कहा कि सम्मेलन में उठाए गए सभी महत्वपूर्ण मुद्दों को शामिल करते हुए एक विस्तृत मांग पत्र तैयार किया जाएगा और मुख्यमंत्री उत्तराखंड को भेजा जाएगा।
उन्होंने कहा कि खेती, जल संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े इन मुद्दों का समाधान केवल सरकारी स्तर पर प्रभावी नीति बनाकर ही संभव है।
किसानों और पर्यावरण संरक्षकों का हुआ सम्मान
कार्यक्रम के दौरान बीज बचाओ आंदोलन की ओर से खेती, पशुपालन और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित किया गया।
ब्लॉक प्रमुख चंबा सुमन सजवाण, ज्येष्ठ उप प्रमुख संजय मैठाणी, जिला पंचायत सदस्य गीता डबराल, पर्यावरण कार्यकर्ता सुदेशा बहन तथा अन्य सामाजिक व्यक्तियों के हाथों मगनी देवी, छेंणी देवी, बिंदु देवी, नेत्र सिंह, जगवीर सिंह, शमशेर सिंह, चमन दास एवं सुंदरू लाल को सम्मानित किया गया।
चिपको आंदोलन की वरिष्ठ कार्यकर्ता एवं पर्यावरण संरक्षण की प्रतीक सुदेशा बहन को भी विशेष सम्मान प्रदान किया गया।
गीतों और कविताओं से दिया जागरूकता का संदेश
कार्यक्रम में कवि सोमवारी लाल सकलानी ‘निशांत’ एवं लोकगायक रवि गुसाईं ने अपनी कविताओं और लोकगीतों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, खेती और ग्रामीण संस्कृति के महत्व को रेखांकित किया।
वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी रघुभाई जड़धारी ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए बीज बचाओ आंदोलन की ऐतिहासिक भूमिका और वर्तमान चुनौतियों पर प्रकाश डाला।
बड़ी संख्या में जुटे जनप्रतिनिधि और ग्रामीण
सम्मेलन में पूर्व प्रमुख राजेंद्र भंडारी, सामाजिक कार्यकर्ता अरण्य रंजन, पूर्व जिला पंचायत सदस्य अनिल बड़ोनी, सोबत भंडारी, शूरवीर सिंह भंडारी, सिद्धार्थ समीर, कलम सिंह जड़धारी, प्रधान ममता नौटियाल, गुरु प्रसाद डबराल, प्रधान जसपाल नेगी, पूर्व प्रधान दिनेश भंडारी, जयेंद्र भंडारी, विपिन जड़धारी, महेश लखेड़ा, राजेंद्र सिंह नेगी, उत्तम सिंह जड़धारी, विनोद जड़धारी, विनोद बड़ोनी, विजयपाल राणा, शिव सिंह, धन सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।
सम्मेलन का मुख्य संदेश स्पष्ट था कि यदि गांव, खेती, जल और बीज सुरक्षित रहेंगे, तभी हिमालय और उसकी सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रह पाएगी।
