विश्व जनसंख्या दिवस 2026: चम्बा में जागरूकता संगोष्ठी, जनसंख्या नियंत्रण में मातृशक्ति की भूमिका पर जोर
अन्नपूर्णा फूड एंड क्राफ्ट इंस्टीट्यूट में आयोजित सेमिनार में विशेषज्ञों ने बढ़ती जनसंख्या, संसाधनों के संतुलन और महिला सशक्तिकरण पर रखे विचार
चम्बा (टिहरी गढ़वाल), SKS News | सोमवारी लाल सकलानी ‘निशांत’।
विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर अन्नपूर्णा फूड एंड क्राफ्ट इंस्टीट्यूट, चम्बा में शुक्रवार को एक जागरूकता संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बढ़ती जनसंख्या, उसके दुष्प्रभाव, कारण एवं समाधान विषय पर विशेषज्ञों ने विस्तार से विचार व्यक्त किए तथा युवाओं को जनसंख्या नियंत्रण, महिला सशक्तिकरण और संसाधनों के संतुलित उपयोग के प्रति जागरूक किया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता शिक्षाविद् एवं जनकवि सोमवारी लाल सकलानी ‘निशांत’ ने अपने संबोधन में कहा कि अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि आज विश्व के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। उन्होंने प्रसिद्ध अर्थशास्त्री थॉमस रॉबर्ट माल्थस के जनसंख्या सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण नहीं रखा गया, तो प्रत्येक 25 वर्ष में जनसंख्या लगभग दोगुनी हो सकती है, जिससे प्राकृतिक संसाधनों पर अत्यधिक दबाव बढ़ता है।
उन्होंने बताया कि जनसंख्या वृद्धि अंकगणितीय नहीं बल्कि ज्यामितीय (Geometric Progression) गति से होती है, जबकि संसाधनों की उपलब्धता सीमित रहती है। परिणामस्वरूप मानव और प्राकृतिक संसाधनों के बीच संतुलन बिगड़ने लगता है तथा जल, स्वच्छ हवा, ईंधन, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
‘नियोजित परिवार ही सुखी परिवार की पहचान’
श्री सकलानी ने कहा कि गरीबी, अशिक्षा और जागरूकता का अभाव जनसंख्या वृद्धि के प्रमुख कारण हैं। उन्होंने कहा कि कुछ सामाजिक एवं धार्मिक मान्यताएँ भी आंशिक रूप से जनसंख्या वृद्धि को प्रभावित करती हैं।
उन्होंने “नियोजित परिवार – सुख का आधार” का संदेश देते हुए कहा कि जनसंख्या नियंत्रण में मातृशक्ति की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। परिवार की खुशहाली, महिलाओं के स्वास्थ्य, बच्चों के बेहतर भविष्य और सामाजिक विकास के लिए छोटा एवं सुनियोजित परिवार आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अधिक जनसंख्या का अर्थ अधिक समृद्धि नहीं, बल्कि बेरोजगारी, संसाधनों की कमी और सामाजिक चुनौतियों में वृद्धि है।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण एवं सामाजिक जागरूकता पर आधारित अपनी स्वरचित प्रेरणादायक कविताओं का भी पाठ किया, जिसे उपस्थित विद्यार्थियों ने सराहा।
नशामुक्ति, पर्यावरण संरक्षण और विधिक जागरूकता पर भी दिया संदेश
कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अधिकार मित्र गुड्डी रावत ने बढ़ती जनसंख्या के दुष्प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए स्वस्थ जीवन, नशामुक्त समाज, वृक्षारोपण तथा प्राकृतिक संसाधनों के समुचित उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा संचालित निःशुल्क विधिक सहायता एवं जनकल्याणकारी योजनाओं की भी जानकारी दी।
युवाओं में जागरूकता बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है ऐसी संगोष्ठियाँ
संस्थान के इंस्ट्रक्टर राघव रमोला ने मुख्य अतिथि एवं सभी वक्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि समाज से जुड़े विषयों पर आयोजित सेमिनारों से विद्यार्थियों को नई जानकारी प्राप्त होती है और उनमें सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित होती है। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से अपील की कि वे संगोष्ठी से प्राप्त ज्ञान को अपने व्यवहार एवं जीवन में भी अपनाएं।
कार्यक्रम में संस्थान के समस्त शिक्षक, गेस्ट फैकल्टी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे।
