HNBGU: संस्कृत सप्ताह महोत्सव और आईटीईपी इंडक्शन प्रोग्राम में विद्यार्थियों को ज्ञान एवं अधिकारों की सीख
दूसरे दिन ‘कालिदासस्य विवाहः’ नाटक ने मोहा मन, आईटीईपी विद्यार्थियों को विधिक सेवाओं एवं कानूनी अधिकारों की दी जानकारी
श्रीनगर गढ़वाल, 02 सितंबर 2026। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय में बुधवार का दिन भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृत भाषा, नाट्य कला और विधिक जागरूकता के संदेश से सराबोर रहा। विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग द्वारा आयोजित ‘संस्कृत सप्ताह महोत्सव’ के द्वितीय दिवस जहां छात्र-छात्राओं ने महाकवि कालिदास के जीवन प्रसंग पर आधारित ‘कालिदासस्य विवाहः’ लघु नाटक का प्रभावशाली मंचन कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया, वहीं शिक्षा विभाग के इंडक्शन प्रोग्राम के अंतर्गत आईटीईपी विद्यार्थियों को विधिक सेवाओं एवं उनके अधिकारों की महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।
भारतीय ज्ञान परंपरा में संस्कृत का महत्वपूर्ण स्थान
संस्कृत सप्ताह महोत्सव के द्वितीय दिवस कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के पारंपरिक स्वागत के साथ हुआ। संस्कृत विभाग, बिड़ला परिसर के विभागाध्यक्ष डॉ. विश्वेश वाग्मी ने स्वागत वक्तव्य में अतिथियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा का मूल आधार संस्कृत विद्या में निहित है और भारत के ‘स्व’ का साक्षात्कार संस्कृत के ज्ञान के माध्यम से ही संभव है।
समारोह की मुख्य वक्ता दर्शनशास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. कविता भट्ट ने भारतीय दर्शन और संस्कृत साहित्य के गहरे अंतर्संबंधों पर सारगर्भित व्याख्यान दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान एवं परंपराओं को आज पूरी दुनिया सम्मान के साथ स्वीकार कर रही है।
संस्कृत के वैश्विक महत्व पर दिया जोर
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कृत विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. कमला चौहान ने की। उन्होंने संस्कृत भाषा के वैश्विक महत्व, भारतीय सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक परिप्रेक्ष्य में संस्कृत की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
विशेष अतिथि हिन्दी विभाग के आचार्य डॉ. कपिल पंवार एवं लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र के आचार्य डॉ. महेंद्र पंवार ने विद्यार्थियों की नाट्य प्रतिभा की सराहना की। उन्होंने भविष्य में दोनों विभागों के संयुक्त तत्वावधान में नाटकों के मंचन की संभावनाओं पर भी विचार साझा किए।
‘कालिदासस्य विवाहः’ की प्रस्तुति ने बांधा समां
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण संस्कृत विभाग के छात्र-छात्राओं द्वारा महाकवि कालिदास के जीवन प्रसंग पर आधारित ‘कालिदासस्य विवाहः’ लघु नाटक का जीवंत मंचन रहा। विद्यार्थियों ने अभिनय और संवादों के माध्यम से प्रस्तुति को प्रभावशाली बनाया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा और तालियों से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
इसके साथ ही विद्यार्थियों ने संस्कृत के विभिन्न सुभाषितों का सस्वर पाठ किया। इससे कार्यक्रम में संस्कृत भाषा के लालित्य एवं सौंदर्य की विशेष छटा देखने को मिली।
कार्यक्रम का समापन डॉ. प्रीति के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इसके बाद ध्येय मंत्र एवं शांतिपाठ का सामूहिक गायन किया गया। मंच संचालन डॉ. बालकृष्ण बधानी ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
आईटीईपी विद्यार्थियों को विधिक सेवाओं की जानकारी

इसी दिन विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग में आयोजित इंडक्शन प्रोग्राम के अंतर्गत आईटीईपी विद्यार्थियों को विधिक सेवाओं एवं उनके कानूनी अधिकारों के संबंध में जागरूक किया गया। विश्वविद्यालय में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सहयोग से स्थापित विधिक सेवा केंद्र द्वारा विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही विभिन्न सेवाओं एवं सहायता के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
कार्यक्रम की नोडल अधिकारी डॉ. अनु राही ने विद्यार्थियों को निःशुल्क विधिक सहायता, कानूनी परामर्श, अधिकारों की जानकारी और आवश्यकता पड़ने पर विधिक सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि किसी भी कानूनी समस्या अथवा अधिकारों के हनन की स्थिति में विद्यार्थी विधिक सेवा केंद्र से सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
शिक्षा के साथ कानूनी जागरूकता भी जरूरी
इस अवसर पर डॉ. सिद्धार्थ लोहनी ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से उपस्थित स्वयंसेवी प्रियंका रॉय एवं उनके सहयोगियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ अपने कानूनी अधिकारों और जिम्मेदारियों की जानकारी होना भी आवश्यक है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने विधिक सेवाओं से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों द्वारा समाधान एवं आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में कानूनी जागरूकता, अधिकारों की समझ तथा न्याय तक सहज पहुंच के प्रति जागरूकता विकसित करना रहा।
इस प्रकार HNBGU में आयोजित दोनों कार्यक्रमों ने विद्यार्थियों के सांस्कृतिक, बौद्धिक, व्यावसायिक एवं सामाजिक विकास को केंद्र में रखते हुए ज्ञान और जागरूकता के विविध आयामों को सामने रखा।
