नकोट, मखलोगी : महादेव ग्राम छाती में आगामी दो मार्च से आरम्भ होने वाले भक्ति, ज्ञान, वैराग्य एवं मोक्ष प्रदायक श्री शिवमहापुराण एकादश ज्ञान यज्ञ की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। ग्रामीणों द्वारा क्षेत्र में जगह-जगह पोस्टर बैनर लगाकर लोगों इस आशय की जानकारी प्रदान की जा रही है।
गाँव के शिव भक्तों द्वारा मंदिर समेत मंदिर परिसर स्थित भवनों को रंग-रोगन करके सजाया गया है तथा मंदिर परिसर को जाने वाले मार्ग पर बने मुख्य द्वार को भी सुसज्जित किया गया है। यही नहीं गाँव के शिव भक्तों ने गाँव के चारों तरफ स्थित श्री नागराजा मंदिर, श्री भैरव मंदिर तथा श्री कैलापीर मंदिर को भी रंग-रोगन करके सुसज्जित करके सराहनीय कार्य किया है।
ग्रामीण कस्बा नकोट में आने-जाने वाले वाहनों पर भी पोस्टर चस्पा कर श्री शिवमहापुराण का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। आमंत्रण पत्र भी अद्भुत एवं संग्रहणीय मुद्रित किया गया है।
आमंत्रण पत्र के मुखपृष्ठ पर श्री शिव परिवार का अनोखा चित्र मुद्रित किया गया है, जबकि द्वितीय भाग पर श्री शिवमहापुराण प्रवचनकर्ता स्वामी श्री बद्रीश महाराज जी के चित्र सहित व्यास वन्दना व कार्यक्रम दिया गया है।

तृतीय भाग पर कथा स्थल पर स्थित शिवालय के चित्र के साथ निमंत्रण पत्र प्रकाशित है। इसके अलावा आमंत्रण पत्र का अंतिम भाग तो नितान्त संग्रहणीय बनाया गया है, इस भाग पर-
ॐ जय गंगाधर जय हर जय गिरिजाधीशा।
त्वं मां पालय नित्यं कृपया जगदीशा॥ हर…॥
कैलासे गिरिशिखरे कल्पद्रमविपिने।
गुंजति मधुकरपुंजे कुंजवने गहने॥
कोकिलकूजित खेलत हंसावन ललिता।
रचयति कलाकलापं नृत्यति मुदसहिता ॥ हर…॥
तस्मिंल्ललितसुदेशे शाला मणिरचिता।
तन्मध्ये हरनिकटे गौरी मुदसहिता॥
क्रीडा रचयति भूषारंचित निजमीशम्।
इंद्रादिक सुर सेवत नामयते शीशम् ॥ हर…॥
बिबुधबधू बहु नृत्यत नामयते मुदसहिता।
किन्नर गायन कुरुते सप्त स्वर सहिता॥
धिनकत थै थै धिनकत मृदंग वादयते।
क्वण क्वण ललिता वेणुं मधुरं नाटयते ॥हर…॥
रुण रुण चरणे रचयति नूपुरमुज्ज्वलिता।
चक्रावर्ते भ्रमयति कुरुते तां धिक तां॥
तां तां लुप चुप तां तां डमरू वादयते।
अंगुष्ठांगुलिनादं लासकतां कुरुते ॥ हर…॥
कपूर्रद्युतिगौरं पंचाननसहितम्।
त्रिनयनशशिधरमौलिं विषधरकण्ठयुतम्॥
सुन्दरजटायकलापं पावकयुतभालम्।
डमरुत्रिशूलपिनाकं करधृतनृकपालम् ॥ हर…॥
मुण्डै रचयति माला पन्नगमुपवीतम्।
वामविभागे गिरिजारूपं अतिललितम्॥
सुन्दरसकलशरीरे कृतभस्माभरणम्।
इति वृषभध्वजरूपं तापत्रयहरणं ॥ हर…॥
शंखनिनादं कृत्वा झल्लरि नादयते।
नीराजयते ब्रह्मा वेदऋचां पठते॥
अतिमृदुचरणसरोजं हृत्कमले धृत्वा।
अवलोकयति महेशं ईशं अभिनत्वा॥ हर…॥
ध्यानं आरति समये हृदये अति कृत्वा।
रामस्त्रिजटानाथं ईशं अभिनत्वा॥
संगतिमेवं प्रतिदिन पठनं यः कुरुते।
शिवसायुज्यं गच्छति भक्त्या यः श्रृणुते ॥ हर…॥
मोक्ष प्रदायक भगवान गंगाधर की आरती प्रकाशित की गई है।
