गढ़वाल विश्वविद्यालय में गूंजा ‘खेलो इंडिया संवाद’, युवाओं ने सुना प्रधानमंत्री का संदेश
‘खेल की बात, प्रधानमंत्री के साथ’ कार्यक्रम में खेल संस्कृति, फिटनेस, नशामुक्ति और विकसित भारत पर हुआ संवाद
श्रीनगर गढ़वाल/28 अगस्त, 2026। राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के चौरास परिसर स्थित स्वामी मनमंथन ऑडिटोरियम में ‘खेलो इंडिया संवाद—खेल की बात, प्रधानमंत्री के साथ’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्चुअल संबोधन को सुना और खेल, फिटनेस, युवा सहभागिता तथा राष्ट्र निर्माण से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरित करने, खेल संस्कृति को मजबूत करने तथा देश के विकास में युवा शक्ति की भूमिका को रेखांकित करना रहा।
पहाड़ों में खेल प्रतिभाओं की अपार संभावनाएं
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में देश में खेल संस्कृति को मजबूत करने, अधिक से अधिक युवाओं को खेलों से जोड़ने और प्रतिभावान खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने पहाड़ी क्षेत्रों की भौगोलिक एवं प्राकृतिक परिस्थितियों को खेल प्रतिभाओं के विकास के अवसर के रूप में देखने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि खेल केवल प्रतियोगिता अथवा मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि अनुशासन, स्वास्थ्य, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र निर्माण से जुड़ा महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
कुलपति ने कहा—खेल के लिए जुनून, अनुशासन और निरंतर मेहनत जरूरी
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री के विचारों को सुनना मात्र पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें अपने जीवन और कार्य व्यवहार में उतारना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि खेलों में सफलता हासिल करने के लिए संसाधनों के साथ-साथ जुनून, अनुशासन और निरंतर परिश्रम सबसे महत्वपूर्ण हैं। विद्यार्थियों को आलस्य से दूर रहकर अपनी प्रतिभा को पहचानना चाहिए और उसे सही दिशा में विकसित करना चाहिए।
कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय में खेल गतिविधियों के लिए आवश्यक संसाधन विकसित करने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में खेलों को लेकर सोच में सकारात्मक परिवर्तन आया है और युवाओं को ऐसा कार्य करना चाहिए जिससे उनके परिवार, विश्वविद्यालय और राष्ट्र का गौरव बढ़े।
युवाओं को दिलाया नशामुक्ति का संकल्प
कुलपति ने विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने का संदेश देते हुए नशामुक्त भारत अभियान के अंतर्गत उपस्थित युवाओं को संकल्प भी दिलाया।
उन्होंने कहा कि स्वस्थ, अनुशासित और लक्ष्य के प्रति समर्पित युवा ही मजबूत राष्ट्र की आधारशिला बन सकते हैं। खेलों को युवाओं के जीवन का हिस्सा बनाने से उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के साथ अपनी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने में भी मदद मिलती है।
विधायक विनोद कंडारी ने जरूरतमंद बच्चों के सहयोग का किया आह्वान
कार्यक्रम में विधायक विनोद कंडारी ने युवाओं को प्रधानमंत्री के युवा-केंद्रित दृष्टिकोण से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय और समाज को अभावग्रस्त एवं जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा तथा उनके विकास में सहयोग के लिए आगे आना चाहिए।
उन्होंने युवाओं से अपनी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाते हुए राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
अर्जुन पुरस्कार विजेता सुरेंद्र सिंह केनवाशी ने साझा किए अनुभव
कार्यक्रम का महत्वपूर्ण आकर्षण राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित खिलाड़ी सुरेंद्र सिंह केनवाशी का संवाद रहा। भारतीय सेना में रहते हुए नौकायन के माध्यम से देश को अनेक पदक दिलाने वाले केनवाशी ने विद्यार्थियों के साथ अपने खेल जीवन के अनुभव साझा किए।
उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियां सफलता की राह में बाधा जरूर बन सकती हैं, लेकिन दृढ़ संकल्प, अनुशासन और निरंतर अभ्यास के बल पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की जा सकती है।
उन्होंने युवाओं को खेलों के प्रति समर्पित रहने तथा प्रधानमंत्री के खेल और विकसित भारत के सपने को साकार करने में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
सविता गुरुंग ने खेलों को कैरियर से जोड़ने पर दिया जोर
विश्वविद्यालय की पूर्व छात्रा एवं राष्ट्रीय स्तर की जूडो खिलाड़ी कुमारी सविता गुरुंग ने भी विद्यार्थियों के साथ संवाद किया। उन्होंने जूडो में अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि युवाओं को खेल को केवल शौक के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि इसे कैरियर और रोजगार की संभावनाओं से भी जोड़कर देखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज खेल प्रतिभाओं के लिए प्रशिक्षण, प्रतियोगिता, रोजगार और कैरियर के अनेक अवसर उपलब्ध हैं। सही मार्गदर्शन और नियमित अभ्यास के माध्यम से युवा खेलों को अपने भविष्य की मजबूत आधारशिला बना सकते हैं।
विद्यार्थियों ने पूछे खेल और कैरियर से जुड़े सवाल
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने मंच पर मौजूद अतिथियों एवं खेल प्रतिभाओं से खेल प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं, संसाधनों, कैरियर तथा खेल क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे।
अतिथियों ने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए अपने अनुभव और उपयोगी सुझाव साझा किए। संवाद के माध्यम से युवाओं को खेलों में आगे बढ़ने के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका पर जोर
कार्यक्रम में यह संदेश प्रमुखता से सामने आया कि खेल, शिक्षा, स्वास्थ्य और युवा नेतृत्व एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। स्वस्थ एवं सक्षम युवा ही विकसित भारत के लक्ष्य को गति दे सकते हैं।
कार्यक्रम के लिए सांसद अनिल बलूनी का संदेश भी पढ़कर सुनाया गया। कार्यक्रम संयोजक डॉ. राकेश नेगी ने संचालन किया, जबकि मोहित बिष्ट ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर बिड़ला परिसर निदेशक प्रो. एच.बी.एस. चौहान, अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. ओ.पी. गुसाईं, संकायाध्यक्ष नियुक्ति एवं प्रोन्नति प्रो. मोहन पंवार, प्रो. दीपक कुमार, प्रो. एस.एस. बिष्ट, प्रो. अनिल नौटियाल, प्रो. जे.पी. मेहता, प्रो. ममता आर्य सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

