जिला पंचायत कार्यालय में कर्मचारियों की गेट मीटिंग, 18 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन तेज
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Toggle18 सूत्रीय मांगों को लेकर कर्मचारियों का ऐलान—मांगें पूरी होने तक आंदोलन रहेगा जारी
नई टिहरी, बौराड़ी।
जिला पंचायत कार्यालय परिसर में आज राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद टिहरी गढ़वाल के बैनर तले कर्मचारियों ने गेट मीटिंग आयोजित की। गेट मीटिंग का नेतृत्व परिषद के अध्यक्ष भगवान सिंह राणा, जिला मंत्री जयबीर सिंह रांगड़, जिला पंचायत कर्मचारी संघ इकाई के अध्यक्ष जसपाल सिंह रावत एवं नगर पालिका परिषद की ओर से प्रीतम सिंह नेगी ने किया।
गेट मीटिंग को संबोधित करते हुए अध्यक्ष भगवान सिंह राणा ने कर्मचारियों की मुख्य 18 सूत्रीय मांगों को विस्तार से रखा और स्पष्ट किया कि जब तक इन मांगों पर ठोस कार्यवाही नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
गेट मीटिंग में प्रमुख मांगें
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कर्मचारियों के 10, 16 एवं 26 एसीपी को पूर्व की भांति बहाल किया जाए
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गोल्डन कार्ड के अंतर्गत चिकित्सा प्रतिपूर्ति एवं चिकित्सालयों के लंबित भुगतान सुनिश्चित हों
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विभिन्न संवर्गों की वेतन विसंगतियों को दूर करने हेतु गठित समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए
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कर्मचारियों की सेवा नियमावली का पुनर्गठन किया जाए
विभिन्न विभागों की सक्रिय भागीदारी
गेट मीटिंग में ग्रामीण विकास, पंचायतीराज, नगर पालिका, जिला पंचायत, वन विभाग, सहकारिता, राजस्व विभाग एवं लेखा संवर्ग के कर्मचारियों ने प्रतिभाग किया।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से सुनील कलेठा (अध्यक्ष), आशीष जोशी (महामंत्री, ग्राम विकास अधिकारी संघ), आमोद नोटियाल (उपाध्यक्ष, मत्स्य विभाग), सतेन्द्र चौहान (संरक्षक, सहकारिता विभाग), रतन सिंह शाह (विधि सलाहकार, उद्यान विभाग) सहित रविन्द्र सिंह रावत, दिग्विजय गुनसोला, सुरेश भण्डारी, गौरव राणा, दीपेश्वर अमोला, सुनील राणा, दीपक कोठारी, कलम लाल खत्री, अजीतपाल सजवाण, अनिल डोभाल, परवेज आलम आदि उपस्थित रहे।
जिला पंचायत टिहरी गढ़वाल एवं नगर पालिका परिषद टिहरी से प्रीतम नेगी, शिव सिंह सजवाण, मनोज राणा, राजेन्द्र पाल, कुंवर सिंह भी शामिल हुए।
कर्मचारियों ने एक स्वर में मांगों के शीघ्र समाधान की अपील करते हुए चेतावनी दी कि यदि शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
✍️ केदार सिंह चौहान ‘प्रवर’
(प्रकाशक एवं सम्पादक, सरहद का साक्षी)
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केदार सिंह चौहान ‘प्रवर’
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“खबर वही होती है जिसे दबाने की कोशिश की जाती है, बाकी सब विज्ञापन है। मकसद स्पष्ट होना चाहिए। असल मायने यह है कि हम क्या छापते हैं और क्या नहीं। मैं न केवल कलमकार हूँ, बल्कि खबरों के छपने की नींव भी हूँ। इस व्यवस्था का हिस्सेदार हूँ, और इसे बदलने का इच्छुक भी। भावनाओं के साथ बुद्धि का संतुलन रखता हूँ, सच्चाई का साथ और झूठ का विरोध करता हूँ।“
