नकोट में श्रम विभाग का शिविर बना परेशानी का सबब! दो दिन लाइन में लगे श्रमिक, फिर भी खाली हाथ लौटे
श्रम विभाग के शिविर में अफरा-तफरी का आरोप, दूर-दराज से पहुंचे श्रमिकों को हुई भारी परेशानी; जनप्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी से हस्तक्षेप और कार्रवाई की मांग की
नकोट, टिहरी गढ़वाल। जिला श्रम विभाग टिहरी गढ़वाल के तत्वावधान में न्याय पंचायत नकोट के नकोट बाजार स्थित पंचायत भवन में श्रमिकों के पंजीकरण एवं नवीनीकरण के लिए आयोजित दो दिवसीय शिविर अव्यवस्थाओं के आरोपों के चलते सवालों के घेरे में आ गया है। क्षेत्रीय लोगों के अनुसार शिविर में अपेक्षित संख्या में श्रमिकों के पंजीकरण एवं नवीनीकरण नहीं हो सके, जिसके चलते दूर-दराज के गांवों से पहुंचे श्रमिकों को निराश होकर लौटना पड़ा।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि दो दिनों तक श्रमिक महिलाएं और पुरुष पंजीकरण एवं नवीनीकरण की उम्मीद में लंबी कतारों में खड़े रहे, लेकिन व्यवस्थाएं ऐसी नहीं थीं कि अधिकाधिक पात्र श्रमिकों को समय पर विभागीय सेवाओं का लाभ मिल सके। कई श्रमिकों को अपना काम अधूरा छोड़कर शिविर में पहुंचना पड़ा। उनका कहना है कि समय और श्रम खर्च करने के बावजूद यदि निर्धारित कार्य ही पूरा न हो, तो ऐसे शिविरों के आयोजन की उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
दूर-दराज के गांवों से पहुंचे श्रमिक, लेकिन नहीं मिला अपेक्षित लाभ
नकोट न्याय पंचायत के अंतर्गत आने वाले विभिन्न गांवों के साथ ही मखलोगी क्षेत्र के दूरस्थ ग्रामीण इलाकों से भी बड़ी संख्या में श्रमिक शिविर में पहुंचे। इनमें महिला एवं पुरुष दोनों श्रमिक शामिल थे।
क्षेत्रवासियों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में श्रमिकों के लिए पंजीकरण एवं नवीनीकरण की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लगाए गए शिविर से उम्मीद थी कि उन्हें चंबा, नई टिहरी अथवा अन्य दूरस्थ स्थानों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। लेकिन पर्याप्त व्यवस्था एवं तकनीकी सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण श्रमिकों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका।
स्थानीय लोगों का कहना है कि श्रमिकों के लिए शिविर तभी सार्थक है, जब मौके पर अधिकतम पात्र लोगों का पंजीकरण एवं नवीनीकरण सुनिश्चित हो।
नकोट में CSC सेंटर को आईडी न देने से बढ़ी परेशानी
क्षेत्रीय लोगों ने श्रम विभाग की कार्यप्रणाली पर एक अन्य गंभीर सवाल भी उठाया है। उनका कहना है कि जिले के कई क्षेत्रों में कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) संचालकों को श्रमिक पंजीकरण एवं नवीनीकरण से संबंधित आईडी उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर श्रमिकों को सुविधाएं मिल सकें।
लेकिन उनके अनुसार नकोट क्षेत्र में ऐसी सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण श्रमिकों को पंजीकरण एवं नवीनीकरण के लिए चंबा, नई टिहरी अथवा अन्य स्थानों का रुख करना पड़ रहा है।
इससे ग्रामीण श्रमिकों को न केवल आने-जाने में समय खर्च करना पड़ता है, बल्कि परिवहन एवं अन्य खर्च के रूप में अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी उठाना पड़ता है। विशेष रूप से दिहाड़ी मजदूरों के लिए एक दिन का काम छूटना भी सीधे उनकी आय को प्रभावित करता है।
‘शिविर लगाकर भी समस्या का समाधान नहीं तो फायदा क्या?’
क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का कहना है कि श्रमिक पंजीकरण एवं नवीनीकरण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए प्रशासन और विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में शिविर आयोजित करना स्वागतयोग्य पहल है, लेकिन शिविर केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहने चाहिए।
यदि दूर-दराज से श्रमिकों को बुलाया जाए और पर्याप्त तकनीकी संसाधन, कर्मचारी तथा व्यवस्थाएं उपलब्ध न हों, तो इससे श्रमिकों की परेशानी और बढ़ जाती है।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब श्रमिक पहले ही रोजगार और रोजमर्रा की आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं, ऐसे में उन्हें बार-बार दूरस्थ कार्यालयों के चक्कर लगाने के लिए मजबूर करना उनके साथ न्यायसंगत नहीं है।
जनप्रतिनिधियों में आक्रोश, जिलाधिकारी से हस्तक्षेप की मांग
मखलोगी क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय जनता ने शिविर की कथित अव्यवस्थाओं को लेकर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने श्रम विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि श्रमिकों के हित में आयोजित होने वाले शिविर प्रभावी, पारदर्शी और परिणाममुखी होने चाहिए।
जनप्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल से पूरे मामले का संज्ञान लेने, शिविर की व्यवस्थाओं एवं कार्यप्रणाली की समीक्षा कराने तथा यदि कहीं लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
उन्होंने यह भी मांग की कि नकोट एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष पुनः शिविर आयोजित कर छूटे हुए श्रमिकों का पंजीकरण एवं नवीनीकरण कराया जाए, ताकि किसी पात्र श्रमिक को विभागीय सुविधा से वंचित न रहना पड़े।
न्याय पंचायत स्तर पर नियमित सुविधा की उठी मांग
क्षेत्रीय लोगों ने मांग की है कि नकोट क्षेत्र में श्रमिकों की संख्या एवं भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए न्याय पंचायत स्तर पर नियमित अथवा विशेष अंतराल में श्रमिक पंजीकरण एवं नवीनीकरण शिविर आयोजित किए जाएं।
साथ ही स्थानीय स्तर पर अधिकृत CSC Centre में सुविधा उपलब्ध कराने, शिविर से पहले व्यापक प्रचार-प्रसार, आवश्यक दस्तावेजों की स्पष्ट जानकारी, पर्याप्त कंप्यूटर एवं इंटरनेट व्यवस्था तथा पर्याप्त संख्या में कर्मचारियों की तैनाती सुनिश्चित की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि इससे श्रमिकों को चंबा या नई टिहरी जाने की आवश्यकता कम होगी और सरकार की श्रमिक कल्याणकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ गांव के अंतिम पात्र व्यक्ति तक पहुंच सकेगा।
क्षेत्रवासियों की मांग है कि श्रम विभाग इस प्रकरण को महज एक शिविर की अव्यवस्था न मानकर ग्रामीण श्रमिकों के सामने आ रही व्यापक समस्या के रूप में देखे और स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए।
