सहसपुर की महिलाओं ने रचा ‘तिरंगा आत्मनिर्भरता’ का इतिहास, 5 हजार से अधिक हैंडमेड झंडे तैयार
‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को मिल रही नई ताकत; स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को मिला रोजगार, सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण का अवसर
देहरादून/सहसपुर, प्रतीक उनियाल: 10 अगस्त 2026। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ आह्वान और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आत्मनिर्भर उत्तराखंड के विजन को सहसपुर विकासखंड की स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाएं धरातल पर साकार कर रही हैं। शंकरपुर स्थित सिलाई यूनिट में महिलाएं सूती कपड़े से हैंडमेड तिरंगे तैयार कर रही हैं, जिससे इस वर्ष ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को स्थानीय स्तर पर नई गति मिल रही है।
आस्था क्लस्टर लेवल फेडरेशन से जुड़ी महिलाओं ने अब तक 5,000 से अधिक राष्ट्रीय ध्वज तैयार कर लिए हैं। राष्ट्रीय पर्व स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के दौरान इन तिरंगों की मांग बढ़ने से महिलाओं को अपने हुनर को रोजगार में बदलने का अवसर मिल रहा है।
यह पहल केवल तिरंगा निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार, आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक पहचान का मजबूत माध्यम बनकर सामने आई है।
शंकरपुर की सिलाई यूनिट बनी महिलाओं के स्वरोजगार का केंद्र
शंकरपुर स्थित सिलाई यूनिट का संचालन कर रहीं जयमाला के अनुसार यूनिट के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को घर के नजदीक ही रोजगार उपलब्ध हो रहा है। विभागीय सहयोग से राष्ट्रीय ध्वज तैयार करने के ऑर्डर भी मिल रहे हैं, जिससे महिलाओं को बाजार से जुड़ने और अपनी अलग पहचान बनाने का अवसर मिला है।
उन्होंने बताया कि घर-परिवार की जिम्मेदारियों के साथ महिलाएं इसी यूनिट में काम कर आय अर्जित कर रही हैं। इससे उनके आत्मविश्वास और आर्थिक स्थिति में भी सुधार हुआ है।
15 अगस्त और 26 जनवरी पर बढ़ जाती है तिरंगों की मांग
आस्था क्लस्टर लेवल फेडरेशन के अंतर्गत चांदनी स्वयं सहायता समूह की सदस्य कविता ने बताया कि 15 अगस्त और 26 जनवरी के अवसर पर राष्ट्रीय ध्वज की मांग काफी बढ़ जाती है।
सिलाई यूनिट के माध्यम से समूह की महिलाएं अलग-अलग आकार के तिरंगे तैयार कर रही हैं। सरकारी विभागों, ब्लॉक कार्यालयों, स्कूल-कॉलेजों, सामाजिक संस्थाओं, राजनीतिक संगठनों और स्थानीय बाजार से भी इन हस्तनिर्मित तिरंगों की मांग प्राप्त हो रही है।
कविता ने कहा कि इस पहल ने महिलाओं को रोजगार के साथ अपनी प्रतिभा और पहचान प्रदर्शित करने का अवसर भी दिया है।
तिरंगा निर्माण से महिलाओं ने की करीब एक लाख रुपये की बचत
आस्था क्लस्टर लेवल फेडरेशन द्वारा हर वर्ष स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के लिए बड़ी संख्या में राष्ट्रीय ध्वज तैयार किए जाते हैं। बीते गणतंत्र दिवस के अवसर पर तिरंगा निर्माण एवं बिक्री के माध्यम से समूह की महिलाओं ने करीब एक लाख रुपये की बचत अर्जित की थी।
यह आंकड़ा बताता है कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हुनर और सरकारी योजनाओं के सहयोग से स्वयं सहायता समूह किस तरह आय सृजन के प्रभावी मॉडल में बदल सकते हैं।
रीप और एनआरएलएम से मिला महिलाओं को मंच
जिला परियोजना प्रबंधक रीप सोनम गुप्ता ने बताया कि ग्रामीण उद्यमिता एवं आजीविका परियोजना (रीप) के अंतर्गत सहसपुर ब्लॉक में सिलाई यूनिट स्थापित की गई है। इसी यूनिट में आस्था क्लस्टर लेवल फेडरेशन से जुड़ी महिलाएं राष्ट्रीय ध्वज तैयार कर रही हैं।
उन्होंने बताया कि इस समय करीब 15 से 20 महिलाएं तिरंगा निर्माण के कार्य में जुटी हैं। हर घर तिरंगा अभियान के तहत राष्ट्रीय ध्वज की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए समूह की महिलाओं से तिरंगे खरीदे भी जा रहे हैं।
स्थानीय बाजार के साथ सरकारी विभागों से भी मिल रही मांग
मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशन में रीप और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों की ग्रामीण महिलाओं को उनकी रुचि और क्षमता के अनुरूप कार्य उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता दिवस को देखते हुए महिलाएं विभिन्न आकार के राष्ट्रीय ध्वज तैयार कर रही हैं। जिला प्रशासन भी इन महिलाओं से तिरंगे खरीद रहा है। इसके अलावा स्थानीय बाजार में भी इनके उत्पादों की अच्छी मांग है।
उन्होंने कहा कि ‘हर घर तिरंगा’ अभियान से जुड़े लोग भी समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे गुणवत्तापूर्ण तिरंगे खरीद रहे हैं, जिससे महिलाओं की आय बढ़ने के साथ उनके कार्य को भी प्रोत्साहन मिल रहा है।
राष्ट्रीय उत्सव में भागीदारी के साथ आय का जरिया
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कहा कि रीप के सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों की स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में सक्रिय भागीदारी कर रही हैं। राष्ट्रीय ध्वज निर्माण के माध्यम से वे एक ओर देशभक्ति के राष्ट्रीय अभियान से जुड़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर अपनी आय का स्थायी स्रोत भी विकसित कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि समूह की महिलाएं केवल स्वरोजगार स्थापित करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि राष्ट्रीय पर्व के आयोजन में अपनी प्रतिभा और हुनर के माध्यम से महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
‘हर घर तिरंगा’ को मिल रहा लोकल हुनर का साथ
सहसपुर की महिलाओं की यह पहल ‘वोकल फॉर लोकल’, महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता को एक साथ जोड़ती है। स्थानीय कपड़े, स्थानीय हुनर और स्थानीय महिलाओं की मेहनत से तैयार हो रहा तिरंगा राष्ट्रीय पर्व की भावना को जमीनी स्तर पर मजबूत कर रहा है।
यह पहल इस संदेश को भी मजबूत करती है कि यदि स्थानीय उत्पादों को बाजार, प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं का सहयोग मिले तो ग्रामीण महिलाएं न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकती हैं, बल्कि राष्ट्रीय अभियानों की सफलता में भी महत्वपूर्ण भागीदार बन सकती हैं।
