मखलोगी प्रखंड में दिनदहाड़े दिख रहे बाघ-भालू, अल्मोड़ा के जोशी खोला-थपलिया में तेंदुए की सक्रियता से लोग भयभीत
टिहरी/अल्मोड़ा | उत्तराखंड
उत्तराखंड के विभिन्न ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में बाघ, भालू और तेंदुए की बढ़ती सक्रियता से दहशत का माहौल है। हालात ऐसे हो गए हैं कि ग्रामीणों का रात्रि के समय घरों से बाहर निकलना दूभर हो गया है।
टिहरी गढ़वाल जनपद के मखलोगी प्रखंड के गांवों में बाघ एवं भालू न केवल रात बल्कि दिन के समय भी दिखाई दे रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार शाम के समय इन जंगली जानवरों द्वारा हमले के प्रयास भी किए जा चुके हैं। इस गंभीर समस्या को लेकर ग्रामीण तहसील दिवस में भी शिकायत दर्ज करा चुके हैं, बावजूद इसके अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
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वहीं अल्मोड़ा नगर के जोशी खोला और थपलिया क्षेत्र इन दिनों भय के साए में जी रहे हैं। जोशी खोला में तेंदुए को खुलेआम घूमते देखे जाने से क्षेत्रवासियों में दहशत और आक्रोश दोनों व्याप्त हैं। बीते कई दिनों से तेंदुए की लगातार सक्रियता सामने आ रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस और स्थायी कार्रवाई नहीं हो सकी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पूर्व में भी तेंदुए की मौजूदगी सामने आई थी, लेकिन उस समय वन विभाग द्वारा केवल औपचारिक गश्त कर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। नतीजतन आज एक बार फिर लोग अपने ही घरों और गलियों में खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
गांधी पार्क वार्ड के पार्षद एडवोकेट दीपक कुमार जोशी द्वारा सूचना दिए जाने पर सामाजिक कार्यकर्ता संजय पाण्डे ने वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क कर निरंतर रात्रिकालीन गश्त, पुलिस के माध्यम से व्यापक मुनादी तथा तेंदुए को पकड़ने के लिए तत्काल पिंजरा लगाए जाने की मांग सख्ती से रखी।
प्रभागीय वनाधिकारी दीपक कुमार ने आश्वासन दिया है कि वन विभाग की टीमें जोशी खोला एवं थपलिया क्षेत्रों में रात्रि गश्त बढ़ाएंगी और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि क्षेत्रवासियों का कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है।
इधर पार्षद एडवोकेट दीपक कुमार जोशी और सामाजिक कार्यकर्ता संजय पाण्डे ने संयुक्त रूप से प्रशासन से स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जन-सुरक्षा के मामलों में अब खानापूर्ति स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने क्षेत्रवासियों से अपील की है कि रात्रि के समय अनावश्यक रूप से बाहर न निकलें, बच्चों और बुजुर्गों को अकेला न छोड़ें तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत वन विभाग या पुलिस को दें।
