उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग में विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती पर उठे गंभीर सवाल, मामला मानवाधिकार आयोग पहुंचा
आरटीआई दस्तावेजों के आधार पर शिकायत; विशेषज्ञ पंजीकरण और योग्यता संबंधी नियमों की अनदेखी का आरोप, स्वतंत्र जांच की मांग
देहरादून, 11 जून 2026 | SKS News
उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मामला अब उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग के समक्ष पहुंच गया है। आरटीआई कार्यकर्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता चन्द्र शेखर जोशी ने विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति एवं तैनाती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर आयोग में विस्तृत शिकायत दर्ज कराई है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार द्वारा विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती के दौरान निर्धारित नियमों एवं वैधानिक प्रक्रियाओं का पूर्ण रूप से पालन नहीं किया गया। शिकायत के अनुसार 28 अप्रैल 2025 को सचिव चिकित्सा, उत्तराखंड द्वारा जारी आदेश के माध्यम से 45 चिकित्सकों को विभिन्न सरकारी चिकित्सालयों में विशेषज्ञ के रूप में तैनात किया गया था, जबकि तैनाती के समय उनमें से केवल 10 चिकित्सक ही आवश्यक पात्रता एवं वैध विशेषज्ञ पंजीकरण की शर्तों को पूरा कर रहे थे।
शिकायतकर्ता का दावा है कि सूचना का अधिकार (RTI) के माध्यम से प्राप्त अभिलेखों एवं विभागीय दस्तावेजों से यह तथ्य सामने आया कि कई चिकित्सकों के पास उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल (UMC) में विशेषज्ञ के रूप में वैध पंजीकरण उपलब्ध नहीं था तथा कुछ चिकित्सकों ने संबंधित विषय की स्नातकोत्तर (PG) परीक्षा भी उत्तीर्ण नहीं की थी।
मामले को और गंभीर बताते हुए शिकायत में उल्लेख किया गया है कि महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य द्वारा 30 जनवरी 2026 को जारी पत्र संख्या-2980 में स्वयं यह स्वीकार किया गया था कि तैनाती हेतु प्रस्तावित 30 विशेषज्ञ चिकित्सकों में से केवल 12 चिकित्सकों के पास ही वैध विशेषज्ञ पंजीकरण उपलब्ध था। शिकायत के अनुसार 16 चिकित्सकों के पास विशेषज्ञ पंजीकरण प्रमाणपत्र नहीं था तथा 2 चिकित्सकों ने पीजी परीक्षा तक उत्तीर्ण नहीं की थी। इसके बावजूद 17 मार्च 2026 को सभी 30 चिकित्सकों की तैनाती को स्वीकृति प्रदान कर दी गई।
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि पूर्व में तैनात किए गए विशेषज्ञ चिकित्सकों में से एक चिकित्सक को सितारगंज उप-जिला चिकित्सालय में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ के रूप में नियुक्त किया गया था, जिनकी योग्यता एवं पंजीकरण को लेकर प्रश्न उठाए गए थे। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि तैनाती के कुछ समय बाद उपचार के दौरान एक महिला मरीज की मृत्यु हुई, जिसके संबंध में जांच एवं आपराधिक मुकदमे की कार्रवाई भी सामने आई।
शिकायतकर्ता ने कहा है कि जब विभागीय अधिकारियों को संबंधित चिकित्सकों की पात्रता एवं पंजीकरण की स्थिति की जानकारी थी, तब भी उनकी नियुक्ति एवं तैनाती को स्वीकृति देना नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवन के अधिकार से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय है। शिकायत में इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद-21 के अंतर्गत प्रदत्त जीवन के अधिकार के संभावित उल्लंघन से जोड़ते हुए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की गई है।
मानवाधिकार आयोग से पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने, दोषी अधिकारियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई करने, अयोग्य अथवा अपंजीकृत विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती समाप्त करने तथा भविष्य में विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति से पूर्व UMC एवं NMC पंजीकरण तथा शैक्षणिक योग्यता के अनिवार्य सत्यापन की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से समाचार लिखे जाने तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई थी। यदि जांच में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला उत्तराखंड के स्वास्थ्य प्रशासन एवं नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े सबसे गंभीर विवादों में से एक साबित हो सकता है।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह समाचार मानवाधिकार आयोग में प्रस्तुत शिकायत, आरटीआई के माध्यम से प्राप्त अभिलेखों तथा उपलब्ध विभागीय दस्तावेजों में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों की अंतिम पुष्टि सक्षम जांच एजेंसी, मानवाधिकार आयोग अथवा न्यायिक प्रक्रिया के निष्कर्षों के अधीन होगी। संबंधित पक्षों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
