उत्तराखण्ड में अब टीवी स्क्रीन पर भी दिखेंगे आपदा अलर्ट, डीटीएच के जरिये मिलेगा मौसम और आपदा का त्वरित संदेश
देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंहनगर में डीटीएच आधारित अर्ली वार्निंग सिस्टम का सफल परीक्षण, फ्लैश फ्लड, भूस्खलन और लू जैसी आपदाओं से पहले लोगों को किया जाएगा सतर्क
देहरादून, 25 मई 2026, SKS News।
उत्तराखण्ड में आपदा पूर्व चेतावनी तंत्र को और अधिक प्रभावी तथा आधुनिक बनाने की दिशा में राज्य सरकार लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। अब आमजन को मोबाइल फोन के साथ-साथ टीवी स्क्रीन पर भी आपदा एवं मौसम संबंधी अलर्ट प्राप्त होंगे। डीटीएच प्लेटफॉर्म के माध्यम से टेस्ट अलर्ट का सफल प्रसारण किया गया है, जिससे आने वाले समय में आपदाओं के दौरान लोगों तक त्वरित सूचना पहुंचाना और अधिक आसान हो जाएगा।
राज्य में अर्ली वार्निंग सिस्टम को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से प्रथम चरण में देहरादून, हरिद्वार तथा ऊधमसिंहनगर जनपदों में डीटीएच आधारित चेतावनी प्रणाली का परीक्षण किया गया। इस दौरान टाटा प्ले, एयरटेल डीटीएच, डी2एच और डिश टीवी जैसे प्रमुख डीटीएच प्लेटफॉर्म पर टीवी स्क्रीन में टेस्ट अलर्ट संदेश सफलतापूर्वक प्रदर्शित हुआ। यह संदेश लगभग 15 से 40 सेकंड तक स्क्रीन पर दिखाई दिया, जिससे लोगों का ध्यान तत्काल आकर्षित हुआ।
विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रणाली फ्लैश फ्लड, भूस्खलन, भारी वर्षा, आकाशीय बिजली, लू तथा अन्य प्राकृतिक आपदाओं से पूर्व लोगों को समय रहते सतर्क करने में अत्यंत प्रभावी सिद्ध होगी। टीवी स्क्रीन पर सीधे चेतावनी संदेश दिखाई देने से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक भी सूचना शीघ्र पहुंच सकेगी, जिससे जन-धन की हानि को कम करने में मदद मिलेगी।
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने कहा कि उत्तराखण्ड भौगोलिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील राज्य है, जहां समय पर चेतावनी का आमजन तक पहुंचना बेहद आवश्यक है। उन्होंने बताया कि डीटीएच आधारित अलर्ट प्रणाली आपदा पूर्व चेतावनी तंत्र को अधिक व्यापक, त्वरित और प्रभावी बनाएगी। राज्य सरकार आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए अर्ली वार्निंग सिस्टम को लगातार मजबूत कर रही है, ताकि किसी भी गंभीर मौसमीय परिस्थिति अथवा आपदा के दौरान समय रहते सटीक सूचना उपलब्ध कराई जा सके।
उन्होंने यह भी बताया कि विगत 02 मई को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण तथा सी-डॉट द्वारा उत्तराखण्ड सहित पूरे देश में सेल ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम के माध्यम से अलर्ट भेजने का सफल परीक्षण किया गया था। इस तकनीक के जरिए किसी भी आपदा की स्थिति में प्रभावित क्षेत्र में सक्रिय सभी मोबाइल टावरों की सीमा में आने वाले उपभोक्ताओं को स्वतः चेतावनी संदेश प्राप्त होगा।
सेल ब्रॉडकास्टिंग तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके लिए इंटरनेट या किसी मोबाइल ऐप की आवश्यकता नहीं होती। केवल मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध होना पर्याप्त है। यह प्रणाली स्थान-विशिष्ट चेतावनी प्रसारण को सक्षम बनाती है, जिससे केवल प्रभावित क्षेत्र के नागरिकों तक ही संदेश पहुंचता है और अनावश्यक भ्रम की स्थिति से बचाव होता है।
आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों का मानना है कि मोबाइल और डीटीएच दोनों माध्यमों से चेतावनी प्रणाली सक्रिय होने के बाद उत्तराखण्ड जैसे संवेदनशील पर्वतीय राज्य में आपदा प्रबंधन व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी तथा समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में सहायता मिलेगी।
