गंगा दशहरा 2026: मां गंगा के अवतरण का पावन पर्व, जानिए स्नान, दान और पूजा का धार्मिक महत्व
गंगा स्नान, दान-पुण्य और उपासना से मिलती है दस पापों से मुक्ति, ज्योतिषाचार्य हर्षमणि बहुगुणा ने बताया महत्व
विशेष प्रस्तुति: ज्योतिषाचार्य श्री हर्षमणि बहुगुणा
सनातन धर्म में गंगा दशहरा का पर्व अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना गया है। यह पर्व ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन स्वर्ग से मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था। कहा जाता है कि भगवान शिव ने मां गंगा के वेग को अपनी जटाओं में धारण कर पृथ्वी पर प्रवाहित किया, जिससे समस्त जीवों का कल्याण संभव हो सका।
गंगा दशहरा को “ज्येष्ठी दशहरा” के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन गंगा स्नान, जप-तप, दान-पुण्य, उपासना एवं पितृ तर्पण का विशेष महत्व बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन श्रद्धा और भक्ति से गंगा स्नान करने पर मनुष्य के दस प्रकार के पापों का शमन होता है, जिनमें तीन कायिक, चार वाचिक और तीन मानसिक पाप शामिल हैं।
गंगा दशहरा पर क्या करें?
गंगा दशहरा का सबसे महत्वपूर्ण कार्य गंगा स्नान माना गया है। यदि कोई श्रद्धालु गंगा नदी तक नहीं पहुंच सकता, तो वह घर में स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकता है।
इस दिन मां गंगा की पूजा-अर्चना विशेष फलदायी मानी जाती है। पूजा में गंगाजल, पुष्प, फल, दीप और मिठाई का उपयोग किया जाता है। कई श्रद्धालु इस दिन व्रत रखते हैं तथा गंगा आरती में भाग लेकर आध्यात्मिक शांति प्राप्त करते हैं।
धार्मिक ग्रंथों जैसे श्रीमद्भगवद्गीता, रामायण एवं महाभारत का पाठ भी इस दिन अत्यंत शुभ माना गया है।
गंगा दशहरा पर दान का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार गंगा दशहरा पर दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन विशेष रूप से जरूरतमंदों की सहायता करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
गंगा दशहरा पर क्या दान करें?
- भोजन दान — गरीब एवं जरूरतमंद लोगों को भोजन कराना सबसे श्रेष्ठ दान माना गया है।
- शर्बत वितरण — गर्मी के मौसम में लोगों को शर्बत पिलाना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।
- वस्त्र दान — जरूरतमंदों को नए या उपयोगी वस्त्र दान करना शुभ फल देता है।
- धन दान — धार्मिक संस्थाओं या गरीब लोगों को सहयोग राशि देना पुण्यकारी माना गया है।
- अन्य सामग्री — अनाज, बर्तन, तेल, साबुन एवं दैनिक उपयोग की वस्तुओं का दान भी शुभ माना गया है।
मोक्षदायिनी मां गंगा का आध्यात्मिक संदेश
मां गंगा को सनातन संस्कृति में मोक्षदायिनी कहा गया है। गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारतीय आस्था, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक हैं। गंगा दशहरा का पर्व मानव जीवन में पवित्रता, सेवा, दया और धर्म के महत्व को स्थापित करता है।
देशभर के गंगा घाटों पर इस अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना, गंगा आरती, भजन-कीर्तन एवं धार्मिक आयोजनों का आयोजन किया जाता है। श्रद्धालु मां गंगा से सुख, शांति और मोक्ष की कामना करते हैं।
सरहद का साक्षी, डिजिटल मीडिया परिवार की ओर से आप सभी को गंगा दशहरा पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं।
♦केदार सिंह चैहान ‘प्रवर’
