गढ़वाली भाषा और साहित्य पर डॉ. सृजना राणा की पुस्तक अब उपलब्ध
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गढ़वाली साहित्य के प्रारंभिक रचनाकारों की कविताएं और कहानियों का संकलन
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एम.ए. चतुर्थ सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं और गढ़वाली प्रेमियों के लिए अनमोल स्रोत
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गढ़वाली भाषा और संस्कृति का हिंदी अनुवाद के साथ विस्तार
देवप्रयाग, 2025:
डाॅ. सृजना राणा, ओंकारानंद सरस्वती राजकीय महाविद्यालय, देवप्रयाग, ने अपनी नई पुस्तक “गढ़वाली भाषा और साहित्य” के माध्यम से गढ़वाली भाषा, साहित्य और संस्कृति पर गहन जानकारी प्रदान की है। इस पुस्तक में गढ़वाली के प्रारंभिक साहित्यकारों जैसे तारादत्त गैरोला, भजन सिंह “सिंह”, गोविंद चातक, मोहनलाल नेगी, प्रेमलाल भट्ट आदि की कविताएं, कहानियां और निबंध संकलित हैं, जिनके माध्यम से गढ़वाली भाषा के शब्द सौंदर्य और साहित्यिक धरोहर पर प्रकाश डाला गया है।
डाॅ. सृजना राणा ने बताया कि यह पुस्तक श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय द्वारा संचालित एम.ए. चतुर्थ सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं के जनपदीय साहित्य (गढ़वाली साहित्य) के पाठ्यक्रम के लिए विशेष रूप से तैयार की गई है। हालांकि, गढ़वाली भाषा से लगाव रखने वाले और इस भाषा को जानने के इच्छुक पाठकों के लिए भी यह पुस्तक अत्यंत उपयोगी है। गढ़वाली साहित्य को समझने में सहूलियत प्रदान करने के लिए इसमें कविताएं, कहानियां, और निबंध का हिंदी अनुवाद भी शामिल किया गया है।
यह पुस्तक संभावना प्रकाशन, हापुड़ द्वारा प्रकाशित की गई है और अमेजन पर ऑनलाइन उपलब्ध है। इच्छुक पाठक इस लिंक पर जाकर पुस्तक खरीद सकते हैं:
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