चम्बा विकासखंड की चर्चित जिला पंचायत वार्ड-19 (गौंसारी) सीट पर गरमा गया चुनावी समर, भाजपा प्रत्याशी गजेंद्र खाती, निर्दलीय ताजबीर खाती, ममता असवाल, भूपेंद्र धनोला समेत कई दमदार उम्मीदवार मैदान में।
गजा (टिहरी)। Report: D.P. Uniyal-
विकासखंड चम्बा की बहुचर्चित जिला पंचायत वार्ड-19 (गौंसारी सीट) पर चुनावी समर अब अपने निर्णायक मोड़ पर है। सभी प्रत्याशी जीत की जद्दोजहद में अपनी पूरी ताकत झोंक चुके हैं। 26 जुलाई की शाम के साथ ही चुनाव प्रचार का शोरगुल थम जाएगा और मतदाता मन बनाना शुरू कर देंगे कि वे किसकी नाव पार लगाएंगे।
इस सीट पर मुकाबला बहुकोणीय हो गया है। मैदान में हैं:
- गजेंद्र सिंह खाती (भाजपा अधिकृत प्रत्याशी)
- ताजबीर सिंह खाती (निर्दलीय)
- कुशला नंद उनियाल (निर्दलीय)
- भूपेंद्र सिंह धनोला (पूर्व सैनिक, निर्दलीय)
- श्रीमती ममता असवाल (यूकेडी समर्थित, मूल निवासी भू कानून संघर्ष समिति)
- मकान सिंह असवाल (निर्दलीय)
- श्रीमती मीना खाती, जो चुनाव आयोग एवं न्यायालय की तकनीकी उलझनों के चलते नामांकन वापस नहीं ले पाईं, इसलिए उनका नाम और चुनाव चिन्ह भी बैलेट पेपर पर रहेगा।
🔍 चुनावी तस्वीर और रोचकताएँ:
- इस सीट पर महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही है। न सिर्फ प्रत्याशियों के प्रचार की कमान महिलाओं ने संभाली, बल्कि मतदाता महिला वोट भी इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
- भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी गजेंद्र सिंह खाती ने नकोट-मखलोगी में भव्य रैली की, वहीं निर्दलीय ताजबीर खाती ने गजा से रैली निकाल कर जनसमर्थन की अपील की।
- यूकेडी समर्थित ममता असवाल भी पहले ही नकोट और गजा में प्रभावशाली जनसभाएँ कर चुकी हैं।
- कुशलानंद उनियाल, भूपेंद्र सिंह धनोला और मकान सिंह असवाल भी प्रचार अभियान में पूरी ताकत झोंक चुके हैं।
🔊 प्रचार के अंतिम दिन का माहौल:
- सड़कों पर पोस्टर, झंडे, रैलियाँ और जनसंपर्क का शोर रहा।
- महिलाओं का नेतृत्व और सहभागिता हर प्रत्याशी की ताकत बनी।
- चुनाव चिन्हों को सही ढंग से मतदाताओं तक पहुँचाने की होड़ रही। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन मतदाताओं की सोच को सही ढंग से प्रभावित करने में सफल होता है।
📊 राजनीतिक समीकरण और संभावनाएँ:
- पिछली बार यह सीट भाजपा के पास थी। इस बार कई सशक्त निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में हैं, जो भाजपा के लिए चुनौती बन सकते हैं।
- यूकेडी समर्थित ममता असवाल भू-कानून आंदोलन से जुड़ी रहीं हैं, जिससे उनका जनाधार भी सशक्त माना जा रहा है।
- पूर्व सैनिक भूपेंद्र धनोला अपनी सादगी और सेवा के इतिहास को प्रचार का आधार बना रहे हैं।
📌 निष्कर्ष (Conclusion):
गौंसारी सीट पर राजनीतिक घमासान चरम पर है।
प्रत्याशी, प्रचारक और कार्यकर्ता सब पूरी ताकत से जुटे हैं। लेकिन अब बारी मतदाताओं की है। 28 जुलाई को होने वाले मतदान में यह तय होगा कि भाजपा दोबारा अपनी सीट बचा पाती है या निर्दलीय किसी चमत्कार को अंजाम देते हैं।
महिला मतदाताओं का रुझान, स्थानीय मुद्दों की समझ, और चुनाव चिन्ह की पहुँच — यही तय करेंगे “मुकद्दर का सिकंदर”।
