जादुई पिटारा से बच्चों में सीखेने की प्रवृत्ति होगी विकसित: डॉ. धन सिंह रावत
पौड़ी और पिथौरागढ़ के 2327 प्राथमिक विद्यालयों को मिला प्रथम चरण में लाभ
3 से 8 वर्ष के बच्चों के लिये एनसीईआरटी द्वारा तैयार की गई खेल आधारित शिक्षण सामग्री
देहरादून/पौड़ी।
उत्तराखंड में प्राथमिक शिक्षा को रोचक, समावेशी और व्यवहारिक बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक अभिनव पहल की है। इसके अंतर्गत ‘जादुई पिटारा’ नामक एक खेल आधारित अधिगम सामग्री प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में वितरित की जा रही है।
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने इसे प्रदेश में नई शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन की दिशा में एक ठोस कदम बताया है। यह पिटारा 3 से 8 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है, जो पढ़ाई को रुचिकर बनाने के साथ-साथ उनकी बौद्धिक और भावनात्मक क्षमताओं के विकास में सहायक होगा।
क्या है ‘जादुई पिटारा’?
‘जादुई पिटारा’ में शामिल सामग्री को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) द्वारा विशेष रूप से तैयार किया गया है। इसमें बच्चों के लिए खिलौने, कठपुतलियां, रोचक कहानियां, पहेलियां, चित्रकला, संगीत, नृत्य और खेल आधारित गतिविधियां शामिल हैं। इसका उद्देश्य बच्चों में सीखने की प्रवृत्ति, समझ विकसित करने की क्षमता, भावनात्मक कल्याण, गणितीय सोच और रचनात्मक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करना है।
वितरण की वर्तमान स्थिति
डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि प्रथम चरण में ‘जादुई पिटारा’ को पौड़ी और पिथौरागढ़ जनपदों के 2327 प्राथमिक विद्यालयों में वितरित किया जा चुका है। इनमें पौड़ी के 1354 और पिथौरागढ़ के 973 विद्यालय शामिल हैं। उन्होंने बताया कि शेष 11 जनपदों के 8939 प्राथमिक विद्यालयों में यह सामग्री द्वितीय चरण में वितरित की जाएगी।
द्वितीय चरण में इन जनपदों को मिलेगा लाभ:
शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने की दिशा में कदम
पाबौं ब्लॉक के विद्यालयों में ‘जादुई पिटारा’ वितरित करते हुए डॉ. रावत ने कहा कि राज्य सरकार प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि ‘‘नई शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप, हम बच्चों के समग्र विकास पर बल दे रहे हैं। जादुई पिटारा बच्चों की पढ़ाई को बोझिल नहीं, बल्कि आनंददायक बनाएगा।’’
अभिभावकों और शिक्षकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका
डॉ. रावत ने यह भी कहा कि इस पिटारे का सही लाभ तभी मिलेगा जब अभिभावक और शिक्षक बच्चों को खेलने और सीखने के बीच संतुलन बनाने में सहयोग करें। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे कक्षा में जादुई पिटारे की सामग्री को एक नवाचार की तरह इस्तेमाल करें ताकि बच्चे पढ़ाई से जुड़ाव महसूस करें।
निष्कर्ष
‘जादुई पिटारा’ उत्तराखंड की प्राथमिक शिक्षा में एक महत्वपूर्ण बदलाव की पहल है। यह न केवल बच्चों के लिए शिक्षा को आसान और आकर्षक बनाएगा, बल्कि उन्हें सोचने, समझने और अपनी कल्पनाशीलता को अभिव्यक्त करने के लिए भी प्रोत्साहित करेगा। आने वाले समय में जब यह पिटारा पूरे प्रदेश के बच्चों तक पहुंचेगा, तब निश्चित ही यह नवाचार शिक्षा के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा।
