सीडीओ वरुणा अग्रवाल ने वित्तीय साक्षरता, डिजिटल बैंकिंग, मुख्यमंत्री स्वरोजगार, पीएमएफएमई, केसीसी और बीमा योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की
टिहरी गढ़वाल, 20 अगस्त 2026। ग्रामीण क्षेत्रों तक बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं की पहुंच बढ़ाने तथा सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक समय पर पहुंचाने के उद्देश्य से जिला सलाहकार समिति एवं जिला स्तरीय समीक्षा समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता मुख्य विकास अधिकारी वरुणा अग्रवाल ने की।
बैठक में विभिन्न बैंकिंग सेवाओं, वित्तीय साक्षरता, डिजिटल बैंकिंग, स्वरोजगार योजनाओं, किसान क्रेडिट कार्ड, बीमा योजनाओं, आरसेटी, स्वयं सहायता समूहों के बैंक लिंकेज सहित ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।
146 बैंक शाखाओं और 170 बीसी/सीएसपी के माध्यम से बैंकिंग सेवाएं
बैठक में एलडीएम मनीष मिश्रा ने जिले में संचालित बैंकिंग एवं वित्तीय योजनाओं की प्रगति की जानकारी दी। आरबीआई के निर्देशों के क्रम में जिले के टीयर-6 सेंटरों तक बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाने के लिए विभिन्न माध्यमों से सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
जिले में वर्तमान में 146 बैंक शाखाओं, 239 पोस्ट पेमेंट बैंक तथा 170 बीसी/सीएसपी के माध्यम से लोगों को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ा जा रहा है।
यह व्यवस्था विशेष रूप से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां बैंक शाखा तक पहुंचना कई बार चुनौतीपूर्ण होता है।
जून में आयोजित हुए 302 वित्तीय साक्षरता कैंप
बैठक में वित्तीय साक्षरता एवं डिजिटल वित्तीय शिक्षा के तहत आयोजित शिविरों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि जून 2026 में जिले में कुल 302 वित्तीय साक्षरता कैंप आयोजित किए गए।
सीडीओ वरुणा अग्रवाल ने निर्देश दिए कि इन शिविरों में अधिक से अधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि वित्तीय साक्षरता केवल बैंक खाता खोलने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि लोगों को डिजिटल लेन-देन, ऑनलाइन बैंकिंग, साइबर सुरक्षा और वित्तीय योजनाओं के प्रति भी जागरूक किया जाना चाहिए।
उन्होंने अपेक्षाकृत कम प्रगति वाले बैंकों को अपनी गति बढ़ाने के निर्देश दिए। इसमें उत्तराखंड ग्रामीण बैंक सहित अन्य बैंक शामिल हैं।
डिजिटल बैंकिंग को बढ़ावा देने पर जोर
बैठक में बताया गया कि सभी बैंक डिजिटल बैंकिंग को प्रोत्साहित कर रहे हैं। ग्राहकों को ऑनलाइन लेन-देन, भीम ऐप के उपयोग और डिजिटल भुगतान के लाभों के बारे में जानकारी दी जा रही है।
पर्वतीय जनपद में डिजिटल बैंकिंग का विस्तार ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए समय और यात्रा दोनों की बचत कर सकता है। हालांकि इसके साथ डिजिटल सुरक्षा और साइबर धोखाधड़ी से बचाव की जानकारी देना भी उतना ही आवश्यक है।
मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना की प्रगति बढ़ाने के निर्देश
मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना की समीक्षा के दौरान अपेक्षाकृत कम प्रगति का मामला सामने आया। बैंकों की ओर से डॉक्यूमेंट पेंडेंसी और अंडर-प्रोसेस आवेदनों की जानकारी प्रस्तुत की गई।
सीडीओ ने निर्देश दिए कि सभी बैंक निर्धारित लक्ष्य को अंतिम तिमाही से पहले ही पूरा करने का प्रयास करें। उन्होंने लंबित आवेदनों के निस्तारण में अनावश्यक देरी नहीं करने के निर्देश दिए।
जिन खातों में सब्सिडी की धनराशि अभी तक प्राप्त नहीं हुई है, उनकी शाखावार सूची तैयार कर संबंधित विभाग को उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए।
पीएमएफएमई के लिए सितंबर तक 25 आवेदन उपलब्ध कराने का लक्ष्य
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) की समीक्षा के दौरान सीडीओ ने उद्यान विभाग को सितंबर माह के अंत तक न्यूनतम 25 आवेदन बैंकों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
यह योजना स्थानीय स्तर पर खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े छोटे उद्यमों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण है। पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानीय कृषि एवं बागवानी उत्पादों का मूल्य संवर्धन ग्रामीण युवाओं और स्वयं सहायता समूहों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर पैदा कर सकता है।
पर्यटन स्वरोजगार योजनाओं में आवेदन बढ़ाने के निर्देश
वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना की समीक्षा करते हुए पर्यटन विभाग को अधिक से अधिक पात्र आवेदकों के आवेदन बैंकों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
टिहरी जैसे पर्यटन संभावनाओं वाले जिले में होमस्टे, पर्यटन गतिविधियों और स्थानीय सेवाओं से जुड़े छोटे उद्यम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
किसान क्रेडिट कार्ड के रिजेक्ट आवेदनों की होगी जांच
बैठक में किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना की भी समीक्षा की गई। बैंक द्वारा डिसक्वालिफाई एवं रिजेक्ट किए गए आवेदनों के संबंध में सीडीओ ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक आवेदन की जांच कर उचित कारण सहित सूचना उपलब्ध कराई जाए।
इससे पात्र किसानों के आवेदन अनावश्यक रूप से लंबित या निरस्त होने की स्थिति की पहचान की जा सकेगी तथा वास्तविक कमियों को दूर करने में मदद मिलेगी।
बीमा योजनाओं में करीब एक लाख खातों की कमी पर चिंता
प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में खातों की संख्या में लगभग एक लाख की कमी सामने आने पर मुख्य विकास अधिकारी ने इसे गंभीरता से लेते हुए संबंधित खातों की जांच के निर्देश दिए।
उन्होंने अधिकारियों को गांवों में जाकर लाभार्थियों से संपर्क करने और यह पता लगाने को कहा कि संबंधित खातों से बीमा की किश्त जमा हुई है या नहीं तथा योजनाओं में इतनी बड़ी गिरावट के वास्तविक कारण क्या हैं।
यह निर्देश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बीमा योजनाओं में नामांकन के साथ-साथ उनका निरंतर सक्रिय रहना भी जरूरी है, ताकि जरूरत के समय लाभार्थी को सुरक्षा मिल सके।
आरसेटी और स्वयं सहायता समूहों के बैंक लिंकेज की समीक्षा
बैठक में ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETI) कार्यक्रम की प्रगति की भी समीक्षा की गई। सीडीओ ने निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध रूप से पूरा करने के निर्देश दिए।
इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यम स्थापना तथा स्वयं सहायता समूहों के बैंक लिंकेज के अंतर्गत विभिन्न योजनाओं की प्रगति पर भी चर्चा हुई। इनमें—
- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM)
- वाहन योजना
- होमस्टे योजना
- पीएम स्वनिधि
- ग्रामीण उद्यम स्थापना से संबंधित योजनाएं
शामिल रहीं।
योजनाओं की सफलता केवल लक्ष्य पूरा करने से नहीं, लाभार्थी तक पहुंचने से होगी
बैठक से यह स्पष्ट है कि जिले में बैंकिंग और सरकारी वित्तीय योजनाओं का व्यापक नेटवर्क मौजूद है, लेकिन चुनौती अब इन सुविधाओं को वास्तविक लाभार्थियों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने की है।
302 वित्तीय साक्षरता शिविरों का आयोजन एक सकारात्मक पहल है, लेकिन इन शिविरों की वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि कितने ग्रामीणों ने बैंकिंग सेवाओं को समझा, कितने लोगों ने डिजिटल भुगतान अपनाया, कितने युवाओं ने स्वरोजगार के लिए ऋण लिया और कितने किसानों एवं महिलाओं को योजनाओं से वास्तविक आर्थिक लाभ मिला।
इसी तरह मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, पीएमएफएमई, पर्यटन स्वरोजगार और होमस्टे जैसी योजनाएं तभी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति दे सकती हैं, जब आवेदन से लेकर बैंक ऋण, सब्सिडी और उद्यम स्थापना तक पूरी प्रक्रिया समयबद्ध और पारदर्शी हो।
बैंक और विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर
बैठक में विभिन्न बैंकों और विभागों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में योजनावार प्रगति की समीक्षा की गई। इससे यह संदेश भी गया कि सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए बैंकों और विभागीय अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
सीडीओ के निर्देशों का मुख्य फोकस लंबित आवेदनों, कम प्रगति वाले बैंकों, सब्सिडी भुगतान, बीमा खातों में कमी और स्वरोजगार योजनाओं के लक्ष्यों को समय से पूरा करने पर रहा।
यदि इन निर्देशों का प्रभावी अनुपालन होता है तो टिहरी के ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन, स्वरोजगार और उद्यमिता को और गति मिल सकती है।
बैठक में एचडीएफसी बैंक के शाखा प्रबंधक दीपक केंथुरा, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से सुनील कुमार, इंडियन बैंक से एस.एस. राणा, आईडीबीआई बैंक से अनंत पांडे, नैनीताल बैंक से आर.के. शर्मा, केनरा बैंक से अनिल, डीसीबी बैंक से चिराग बिष्ट, इंडियन ओवरसीज बैंक से रंजन और बैंक ऑफ बड़ौदा से अश्विनी सहित विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
इसके अलावा मत्स्य विभाग से प्रतिभा, क्रिसिल फाउंडेशन से अंकित, उद्यान विभाग से पंकज, रीप से ब्रह्मकांत भट्ट, डीआरडीए से चंद्रप्रकाश डंगवाल सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।
