टिहरी में स्वच्छ भारत मिशन के तहत मकान नंबर प्लेट लगाने का कार्य सौंपा बिहार के व्यक्ति को, स्थानीय लोगों में उठे सवाल
उत्तरकाशी और टिहरी में मकान नंबर प्लेट लगाने का ठेका एक ही पते के दो लोगों को, ठेका प्रक्रिया पर उठे सवाल
टिहरी गढ़वाल, 12 अक्टूबर 2025 | सरहद का साक्षी
राष्ट्रीय कार्यक्रम “स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण)” के अंतर्गत टिहरी जनपद की समस्त ग्राम पंचायतों में मकान नंबर प्लेट लगाने का कार्य शुरू किया जा रहा है। परंतु इस कार्य को उत्तराखंड के स्थानीय लोगों या स्वयं सहायता समूहों के बजाय बिहार राज्य के व्यक्ति को सौंपे जाने से स्थानीय स्तर पर सवाल उठने लगे हैं।
जारी हुआ आदेश
जिला पंचायत राज अधिकारी, टिहरी गढ़वाल कार्यालय से दिनांक 6 अक्टूबर 2025 को जारी आदेश (प्रसंग संख्या 1006/70-7/संप/नीओएचओ/2025-26)** के अनुसार “हमारा संकल्प स्वच्छ गांव” अभियान के तहत “घर-घर में शौचालय बनाएं, जिसके शौचालय हैं वही बाहर न जाएं” संदेश प्रसार के अंतर्गत प्रत्येक ग्राम पंचायत में मकान नंबर प्लेट लगाने का निर्णय लिया गया है।
इस कार्य की जिम्मेदारी श्री निपेन्द्र कुमार, मु. मित्तलाय कॉलोनी, फर्जगंज सासाराम, रोहतास (बिहार) को दी गई है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि प्रत्येक मकान पर ₹40 प्रति प्लेट की दर से यह कार्य किया जाएगा, जिसका भुगतान संबंधित परिवार द्वारा किया जाएगा।
प्लेट लगाने का उद्देश्य
मकान नंबर प्लेट लगाने की पहल जनगणना, मकान गणना, वोटर लिस्ट, राशन कार्ड एवं अन्य शासकीय कार्यों में सहयोग हेतु की जा रही है। आदेश में कहा गया है कि यह प्लेट भविष्य में ग्राम स्तर पर कई प्रशासनिक और जनसेवा संबंधी कार्यों में उपयोगी सिद्ध होगी।
स्थानीय लोगों ने उठाया सवाल — “क्या उत्तराखंड में क्षमता की कमी है?”
इस आदेश के जारी होने के बाद कई ग्राम प्रधानों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवाओं ने आपत्ति जताई है कि जब उत्तराखंड के प्रत्येक विकासखंड में दर्जनों स्थानीय युवा, स्वयं सहायता समूह (SHGs) और रोजगार संगठनों के पास पर्याप्त कौशल और संसाधन हैं, तो यह कार्य राज्य के बाहर के व्यक्ति को क्यों दिया गया?
स्थानीय लोगों का कहना है कि —
“स्वच्छ भारत मिशन का उद्देश्य केवल स्वच्छता नहीं, बल्कि ग्रामीण आत्मनिर्भरता भी है। ऐसे में अगर छोटे-छोटे कार्य भी बाहरी राज्यों को दिए जाएंगे, तो स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर कहाँ से मिलेंगे?”
प्रशासनिक दृष्टि से संभावित कारण
विभागीय सूत्रों के अनुसार संभव है कि यह कार्य किसी राज्यस्तरीय पैनल विक्रेता या स्वीकृत ठेकेदार के माध्यम से किया जा रहा हो। स्वच्छ भारत मिशन जैसी योजनाओं में कभी-कभी कार्यादेश राज्य मिशन निदेशालय या राष्ट्रीय स्तर की एजेंसियों से स्वीकृत होते हैं।
हालांकि, इस संबंध में जिला पंचायत राज कार्यालय से औपचारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी है।
विशेषज्ञों की राय
सामाजिक विकास से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि —
“यदि ऐसे कार्यों में स्थानीय समूहों, महिला स्वयं सहायता समूहों या पंचायत स्तर के उद्यमियों को प्राथमिकता दी जाए, तो न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय रोजगार और आत्मनिर्भरता को भी बल मिलेगा।”
ग्रामीणों की अपेक्षा
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि भविष्य में इस प्रकार के कार्यों में स्थानीय ठेकेदारों, स्वयं सहायता समूहों या पंचायत क्लस्टर इकाइयों को वरीयता दी जाए, ताकि स्वच्छ भारत मिशन का “गांव-गांव आत्मनिर्भर भारत” का लक्ष्य वास्तविक अर्थों में साकार हो सके।
टिहरी जनपद में स्वच्छता और विकास के लिए चल रहे प्रयास सराहनीय हैं, परंतु स्थानीय जनता का यह सवाल भी उतना ही प्रासंगिक है —
“जब उत्तराखंड में क्षमता, संसाधन और श्रमशक्ति उपलब्ध है, तो कार्य बाहर के व्यक्ति को क्यों?”
प्रशासन यदि इस पर संवेदनशीलता से विचार करे, तो यह पहल स्वच्छता के साथ-साथ ग्रामीण सशक्तिकरण का भी प्रतीक बन सकती है।
दोनों ठेकेदार बिहार निवासी, पता एक ही — ग्रामीण क्षेत्रों में ठेका आवंटन को लेकर पारदर्शिता पर उठी शंका
देहरादून/टिहरी/उत्तरकाशी, 14 अक्टूबर 2025
उत्तराखंड के उत्तरकाशी और टिहरी जिलों में ग्रामीण क्षेत्रों के मकानों पर नाम और नंबर प्लेट लगाने का कार्य अब विवादों में घिरता नजर आ रहा है। जानकारी के अनुसार, उत्तरकाशी में उपेन्द्र कुमार और टिहरी में निपेंद्र कुमार नामक व्यक्तियों को यह ठेका सौंपा गया है।
चौंकाने वाली बात यह है कि दोनों ठेकेदारों का स्थायी पता एक ही बताया गया है, और दोनों ही बिहार के निवासी हैं। इससे ठेका आवंटन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में हो रहा नाम प्लेट लगाने का कार्य
प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में प्रत्येक मकान पर नाम और नंबर प्लेट लगाने का कार्य स्थानीय स्तर पर चलाया जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर यह काम ग्राम पंचायतों के माध्यम से कराया जा रहा है, जिसका उद्देश्य भविष्य में जनगणना, मकान गणना, वोटर लिस्ट तैयार करने और सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता लाना है।
एक ही पते से दो ठेके—क्या नियमों का पालन हुआ?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि दोनों ठेकेदारों का पता समान है, तो यह ठेका आवंटन प्रक्रिया की निष्पक्षता और वैधानिकता पर प्रश्नचिह्न लगाता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि इस मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न उत्पन्न हो।
ग्रामीणों में नाराजगी, पारदर्शी जांच की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि स्थानीय लोगों को रोजगार देने के बजाय बाहरी राज्यों के लोगों को ठेका सौंपना प्रशासन की नीति पर सवाल उठाता है। उनका कहना है कि जब उत्तराखंड में ही स्वयं सहायता समूह और स्थानीय ठेकेदार उपलब्ध हैं, तो बाहर के लोगों को प्राथमिकता क्यों दी गई?
