स्वच्छता – हमारी जिम्मेदारी
स्वच्छता का संकल्प
मिट्टी की खुशबू कहती है,
“मुझ पर कूड़ा मत फैलाओ।”
धरती माँ की कोख को अब,
गंदगी से मत भर जाओ।
हर गली, हर पगडंडी पर,
हम सबका भी हक़ है, यारो!
पर सफ़ाई का हक़ तभी होगा,
जब कूड़ा न बिखरे चारों ओर।
झाड़ू केवल एक औज़ार नहीं,
ये कर्म का प्रतीक है प्यारा,
जो खुद को साफ़ रखता है,
वो समाज का दीपक है उजियारा।
स्वच्छ हवा, निर्मल पानी,
सबका ये अधिकार बने,
चलो संकल्प लें मिलकर हम —
भारत फिर से सुंदर बने।
कूड़े को डिब्बे तक पहुँचा दो,
प्लास्टिक को दूर भगाओ,
हर दिन बस पाँच मिनट दो,
अपने घर, गली को चमकाओ।
साफ़ जगह पर मन भी खिले,
हृदय में आए शांति की लहर,
स्वच्छ भारत हो, सुंदर भारत —
यही हो हम सबका अवसर।
*Editor
Sarhad Ka Sakshi, Digital Media.
