दूसरे दिन भी आयुर्वेदिक चिकित्सकों का विरोध प्रदर्शन जारी, लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ जताया आक्रोश
काला फीता बांधकर किया सांकेतिक प्रदर्शन, एसीपी, डीएसपी, स्थायीकरण एवं विभागीय पुनर्गठन सहित कई मांगों पर कार्रवाई न होने से नाराज चिकित्सक
अल्मोड़ा, 09 जून 2026 | SKS News
सरकार के आयुष विभाग के प्रति उदासीन रवैये तथा आयुर्वेदिक चिकित्सकों की लंबे समय से लंबित मांगों की अनदेखी के विरोध में आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा सेवा संघ (उत्तराखंड) द्वारा संचालित चरणबद्ध आंदोलन दूसरे दिन भी जारी रहा। प्रदेशभर के चिकित्सकों ने सरकार की नीतियों के प्रति नाराजगी व्यक्त करते हुए अपनी मांगों के शीघ्र समाधान की मांग की।
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि एक ओर उत्तराखंड को “आयुष प्रदेश” के रूप में स्थापित करने की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर आयुर्वेदिक चिकित्सकों के साथ लगातार उपेक्षापूर्ण एवं सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद चिकित्सकों को आधार आधारित एवं मोबाइल एप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करने के लिए बाध्य किया जा रहा है, जिससे उन्हें अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
चिकित्सकों का कहना है कि उनकी वर्षों से लंबित महत्वपूर्ण मांगों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इनमें एसीपी (ACP), डीएसपी (DSP), संवर्ग निर्देशक की नियुक्ति, विभागीय ढांचे का पुनर्गठन तथा वर्ष 2024 बैच के चिकित्सा अधिकारियों का स्थायीकरण प्रमुख रूप से शामिल हैं। मांगों के निरंतर लंबित रहने से प्रदेशभर के आयुर्वेदिक चिकित्सकों में गहरा असंतोष व्याप्त है।
आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा सेवा संघ (उत्तराखंड) के आह्वान पर जिला संघ अल्मोड़ा द्वारा अध्यक्ष डॉ. कपिल शर्मा एवं सचिव डॉ. अनुपमा त्यागी के नेतृत्व में सभी चिकित्सा अधिकारियों ने अपने-अपने चिकित्सालयों में ओपीडी सेवाएं सामान्य रूप से संचालित करते हुए काला फीता बांधकर सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया।
संघ पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार एवं विभागीय स्तर पर उनकी जायज मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो प्रांतीय कार्यकारिणी के नेतृत्व में आंदोलन के आगामी चरणों को और अधिक व्यापक एवं प्रभावी बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों की पूरी जिम्मेदारी शासन एवं विभागीय अधिकारियों की होगी।
चिकित्सकों ने उम्मीद जताई कि सरकार आयुष सेवाओं को मजबूत बनाने और आयुर्वेदिक चिकित्सकों की समस्याओं के समाधान के लिए शीघ्र सकारात्मक कदम उठाएगी, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
