नई टिहरी में पहली बार वित्तीय साक्षरता कार्यशाला आयोजित, अधिकारियों को मिला लेखा प्रबंधन का प्रशिक्षण
महालेखाकार मोहम्मद परवेज आलम ने दिए महत्वपूर्ण निर्देश, पारदर्शी और संतुलित व्यय पर जोर
नई टिहरी (टिहरी गढ़वाल), 17 अप्रैल 2026।
जनपद टिहरी गढ़वाल में वित्तीय प्रबंधन को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए पहली बार एक दिवसीय वित्तीय साक्षरता कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला खेल परिसर सभागार, विकास भवन के निकट आयोजित हुई, जिसका संचालन महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी) उत्तराखण्ड शासन के तत्वावधान में किया गया।
📊 वित्तीय प्रबंधन और लेखांकन पर विशेष जोर:
कार्यशाला में विभिन्न विभागों के आहरण एवं वितरण अधिकारियों (DDOs) तथा कर्मचारियों ने भाग लिया।
इस दौरान:
वित्तीय साक्षरता और प्रबंधन के महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा।
सरकारी लेनदेन के सही लेखांकन की जानकारी।
पारदर्शिता और जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के उपाय।
यह कार्यक्रम भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के दिशा-निर्देशों के अनुरूप आयोजित किया गया।
🗣️ महालेखाकार ने दिए अहम निर्देश:
कार्यशाला को संबोधित करते हुए मोहम्मद परवेज आलम ने कहा कि:
वित्तीय वर्ष के अंतिम समय में अनावश्यक खर्च से बचें।
पूरे वर्ष संतुलित और योजनाबद्ध व्यय करें।
बजट लैप्स से बचने के लिए अनावश्यक धन हस्तांतरण न करें।
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि:
बिना पूर्ण वाउचर और दस्तावेजों के कोई भुगतान न किया जाए।
IFMS प्रणाली में सभी प्रविष्टियां सही और प्रमाणित हों।
बजट का उपयोग उसी मद में किया जाए, जिसके लिए आवंटन हुआ है।
👩💼 डीएम और सीडीओ ने बताई कार्यशाला की उपयोगिता:
जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल ने कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य अधिकारियों को अद्यतन जानकारी देना है, जिससे वे अपने दायित्वों का निर्वहन बेहतर तरीके से कर सकें।
वहीं मुख्य विकास अधिकारी वरुणा अग्रवाल ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम कार्यों में दक्षता, पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करते हैं।
👥 अधिकारी रहे उपस्थित:
इस अवसर पर उप महालेखाकार सुभाष चन्द्र ममगाई, डीएफओ टिहरी पुनीत तोमर, डीडीओ मो. असलम, वरिष्ठ कोषाधिकारी मनोज पाण्डेय सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
नई टिहरी में आयोजित यह वित्तीय साक्षरता कार्यशाला प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे सरकारी कार्यों में जवाबदेही और गुणवत्ता सुनिश्चित होगी।
