नई शिक्षा नीति से विकसित भारत 2047 का लक्ष्य हासिल करने के लिए मानव पूंजी, तकनीकी शिक्षा और सांस्कृतिक मूल्यों पर समन्वित कार्य जरूरी
राजकीय महाविद्यालय नरेंद्रनगर में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के छह वर्ष पूर्ण होने पर हाइब्रिड पैनल परिचर्चा आयोजित
नरेंद्रनगर/देहरादून। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के छह वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर अखिल भारतीय शिक्षा समागम के अंतर्गत आयोजित एक माह तक चलने वाली विभिन्न गतिविधियों की श्रृंखला में राजकीय महाविद्यालय नरेंद्रनगर में हाइब्रिड मोड में पैनल परिचर्चा का आयोजन किया गया। परिचर्चा का केंद्रीय विषय नई शिक्षा नीति के माध्यम से विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की प्राप्ति रहा।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों ने प्रतिभाग किया। विशेषज्ञों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विभिन्न आयामों, बहुविषयक शिक्षा, कौशल विकास, तकनीकी एवं वैज्ञानिक शिक्षा, अनुसंधान तथा भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण पर अपने विचार रखे।
मानव पूंजी को विकसित करना जरूरी: प्रो. राजलक्ष्मी दत्ता
डीबीएस पीजी कॉलेज देहरादून की अर्थशास्त्र की प्रोफेसर राजलक्ष्मी दत्ता ने मुख्य पैनलिस्ट के रूप में कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए मानव पूंजी के प्रभावी उपयोग पर विशेष ध्यान देना होगा।
उन्होंने कहा कि मानव पूंजी के लाभांश, तकनीकी एवं वैज्ञानिक शिक्षा तथा सांस्कृतिक विश्वास और मूल्यों के विकास पर समन्वित रूप से कार्य किए जाने से राष्ट्रीय शिक्षा नीति विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
उनके अनुसार शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह देश के मानव संसाधन को सक्षम, नवाचारी और जिम्मेदार नागरिक के रूप में तैयार करने का महत्वपूर्ण आधार है।
बहुविषयक अध्ययन और कौशल विकास पर जोर
पैनलिस्ट डॉ. संजय महर ने नई शिक्षा नीति के अंतर्गत बहुविषयक अध्ययन और कौशल विकास को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि विद्यार्थियों को एक ही विषय तक सीमित रखने के बजाय विभिन्न विषयों के बीच समन्वय के अवसर उपलब्ध कराना आवश्यक है।
उन्होंने ABC ID सहित डिजिटल शैक्षणिक व्यवस्थाओं की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसी व्यवस्थाएं विद्यार्थियों को अपनी शैक्षणिक उपलब्धियों को व्यवस्थित करने तथा भविष्य में रोजगार के अवसर तलाशने में मददगार साबित हो सकती हैं।
उन्होंने कहा कि कौशल आधारित और बहुविषयक शिक्षा विकसित भारत के लिए आवश्यक मानव संसाधन तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
भारतीय शिक्षा नीति के इतिहास और वर्तमान स्वरूप पर चर्चा
परिचर्चा में डॉ. हरिश्चंद्र रतूड़ी ने भारतीय शिक्षा नीति के ऐतिहासिक विकास पर प्रकाश डाला। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में समय के साथ आए परिवर्तनों और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रमुख प्रावधानों एवं संभावित लाभों पर विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षा के बदलते स्वरूप को समझने तथा नई संभावनाओं के अनुरूप स्वयं को तैयार करने के लिए प्रेरित किया।
विद्यार्थियों के सवालों का समाधान
पैनलिस्ट डॉ. सोनी तिलारा ने विद्यार्थियों द्वारा पूछे गए विभिन्न प्रश्नों का समाधान किया। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रावधानों और विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध शैक्षणिक अवसरों को सरल तरीके से समझाया।
उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति का उद्देश्य विद्यार्थियों में केवल विषयगत ज्ञान विकसित करना नहीं, बल्कि उनकी रचनात्मकता, कौशल, तार्किक क्षमता और निर्णय लेने की क्षमता को भी मजबूत करना है।
MERU विश्वविद्यालयों को बताया विकसित भारत की रीढ़
पैनलिस्ट डॉ. विक्रम सिंह बर्त्वाल ने ‘बहुविषयक शिक्षा एवं अनुसंधान विश्वविद्यालय’ यानी MERU की अवधारणा पर विचार रखते हुए कहा कि इसके अंतर्गत चयनित 35 राज्य विश्वविद्यालय विकसित भारत के लिए ‘मेरुदंड’ की भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि इसके लिए केवल संरचनागत विकास पर्याप्त नहीं होगा। विश्वविद्यालयों को अपने सामाजिक एवं भौगोलिक परिवेश का वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अध्ययन करते हुए स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप शोध, नवाचार और शिक्षा की दिशा निर्धारित करनी होगी।
उन्होंने प्रतिपुष्टि आधारित कार्यप्रणाली को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों की योजनाओं और कार्यक्रमों को जमीनी अनुभवों एवं समाज से प्राप्त फीडबैक के आधार पर निरंतर बेहतर किया जाना चाहिए।
विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किया विकसित भारत पर प्रेजेंटेशन
कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय की एनएसएस यूनिट के विद्यार्थियों द्वारा विकसित भारत विषय पर पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन प्रतियोगिता भी आयोजित की गई।
विद्यार्थियों ने विभिन्न विषयों के माध्यम से विकसित भारत की अवधारणा, शिक्षा, युवा शक्ति, कौशल, तकनीक और राष्ट्र निर्माण से जुड़े अपने विचार प्रस्तुत किए।
इस गतिविधि ने विद्यार्थियों को केवल श्रोता के रूप में नहीं, बल्कि विचार प्रस्तुत करने वाले सक्रिय प्रतिभागी के रूप में मंच उपलब्ध कराया।
शिक्षा को रोजगार और राष्ट्र निर्माण से जोड़ने की आवश्यकता
पूरी परिचर्चा का मूल संदेश यह रहा कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है। इसके लिए ऐसी शिक्षा व्यवस्था आवश्यक है जो विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ कौशल, रोजगार, अनुसंधान, नवाचार, सामाजिक जिम्मेदारी और सांस्कृतिक चेतना से जोड़ सके।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में बहुविषयक शिक्षा, कौशल विकास, तकनीकी ज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा जैसे विभिन्न आयामों को महत्व दिए जाने के संदर्भ में विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को बदलती दुनिया के अनुरूप स्वयं को तैयार करने का आह्वान किया।
आयोजन से जुड़े लोगों को दी बधाई
कार्यक्रम के सफल आयोजन पर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर विजय सिंह नेगी ने पैनल परिचर्चा की संयोजक डॉ. भारती जायसवाल तथा पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन प्रतियोगिता के संयोजक मंडल की सदस्य डॉ. ज्योति शैली एवं डॉ. विजय प्रकाश भट्ट सहित समस्त महाविद्यालय स्टाफ को बधाई दी।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. जितेंद्र नौटियाल ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के छात्र-छात्राएं, शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
निष्कर्ष
राजकीय महाविद्यालय नरेंद्रनगर में आयोजित यह परिचर्चा इस दृष्टि से महत्वपूर्ण रही कि इसमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति को केवल शैक्षणिक सुधार के रूप में नहीं, बल्कि विकसित भारत के व्यापक लक्ष्य से जोड़कर देखा गया। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि यदि शिक्षा को कौशल, अनुसंधान, तकनीक, रोजगार, सांस्कृतिक चेतना और स्थानीय आवश्यकताओं से जोड़ा जाए तो देश की युवा शक्ति विकसित भारत 2047 की आधारशिला बन सकती है।
