महाविद्यालय हल्द्वानी के इतिहास विभाग द्वारा आयोजित साप्ताहिक वैदिक साहित्य व्याख्यान माला का भव्य समापन
हल्द्वानी: एम.बी. राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, हल्द्वानी के इतिहास विभाग द्वारा आयोजित साप्ताहिक वैदिक साहित्य व्याख्यान माला का समापन हुआ। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. केशव चंद जोशी, सहायक आचार्य, संस्कृत विभाग, राजकीय महाविद्यालय जैती (अल्मोड़ा) उपस्थित रहे।
डॉ. जोशी ने वैदिक गुरुकुल परंपरा और शिक्षा के छह घटकों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि प्राचीन गुरुकुल प्रणाली में गुरु और शिष्य के मध्य समर्पण, विनय और ज्ञान की परंपरा थी। “गुरुकुल का अर्थ है – गुरु के समीप बैठकर शिक्षा प्राप्त करना,” उन्होंने कहा।
विभिन्न प्राचीन शिक्षा संस्थानों जैसे कॉल संस्थान, चरण संस्थान, धृतिका संस्थान और परिषद की संरचना का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि प्राचीन काल में प्रयाग, कन्नौज, कर्नाटक, तक्षशिला, पाटलिपुत्र और धर्मशिला जैसे स्थान शिक्षा के प्रमुख केंद्र थे।
डॉ. जोशी ने यह भी बताया कि आधुनिक विश्वविद्यालयों के कुलपति की अवधारणा भी गुरुकुल प्रणाली से ही प्रेरित है, जहां एक आचार्य 10,000 विद्यार्थियों की जिम्मेदारी निभाता था। रामचरितमानस में विश्वामित्र द्वारा राम और लक्ष्मण को दी गई शिक्षा का उल्लेख करते हुए उन्होंने गुरुकुल शिक्षा की व्यावहारिक दृष्टि को रेखांकित किया।
उन्होंने शिक्षा के दो प्रकार—पराशिक्षा और अपराशिक्षा—का वर्णन करते हुए कहा कि गुरु ही वह प्रकाश है जो अज्ञान रूपी अंधकार से निकालकर ज्ञान के मार्ग पर ले जाता है। उन्होंने गुरु के छः स्वरूपों का भी उल्लेख किया और बताया कि ग़, र, और ऊं से क्रमशः ब्रह्मा, विष्णु और महेश के ज्ञान स्वरूप का बोध होता है।
समापन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. एन.एस. बनकोटी ने इतिहास विभाग की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों में भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति रुचि जागृत होती है। प्रो. कमला पंत ने वैदिक साहित्य से संबंधित परीक्षाओं की जानकारी साझा की, वहीं डॉ. नवल किशोर लोहनी ने इस सार्थक आयोजन की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
आज के विषय विशेषज्ञ का स्वागत डॉ. ज्योति टम्टा द्वारा किया गया। कार्यक्रम में इतिहास विभाग के डॉ. सुरेश टम्टा, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. विमला देवी, डॉ. दिनेश कुमार, डॉ. देवेश गर्ब्याल, डॉ. सुधीर नैनवाल सहित अनेक शिक्षकगण उपस्थित रहे।
ऑनलाइन माध्यम से 72 तथा ऑफलाइन माध्यम से 164 छात्र-छात्राओं ने इस व्याख्यान में सहभागिता की। कार्यक्रम का संचालन और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. महिपाल सिंह कुटियाल द्वारा किया गया।
