महिला सशक्तिकरण की मिसाल: रानीचौरी की सुषमा बहुगुणा ने स्वरोजगार से बदली सैकड़ों महिलाओं की जिंदगी
जैविक उत्पादों से धूपबत्ती निर्माण और कुटीर उद्योग के जरिए महिलाओं को बता रहीं हैं आत्मनिर्भरता का नया रास्ता
रानीचौरी (चंबा), टिहरी गढ़वाल, रिपोर्ट: सोमबारी लाल सकलानी ‘निशांत‘
टिहरी गढ़वाल जनपद के रानीचौरी क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जहां सुषमा बहुगुणा ने स्वरोजगार के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। वे न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि सैकड़ों ग्रामीण महिलाओं को भी रोजगार और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर प्रदान कर रही हैं।
सुषमा बहुगुणा “आराधना धूपबत्ती लघु उद्योग प्रशिक्षण केंद्र” का संचालन कर रही हैं, जहां स्थानीय महिलाओं को घर पर ही प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है। इस केंद्र में पूरी तरह जैविक पदार्थों जैसे वनस्पतियों, फूलों और गोबर का उपयोग कर सस्ती और पर्यावरण अनुकूल धूपबत्तियां तैयार की जाती हैं।
इसके साथ ही केंद्र में अपशिष्ट पदार्थों से सुंदर टोकरियां, हैंड बास्केट, उपहार सामग्री और खिलौने बनाने का कार्य भी किया जाता है। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दे रही है, बल्कि महिलाओं को रचनात्मक कार्यों से जोड़कर आय का स्रोत भी बना रही है।
समूह बनाकर महिलाओं को प्रशिक्षण देने की इस पहल से सैकड़ों महिलाएं लाभान्वित हो चुकी हैं। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद महिलाएं स्वयं उत्पादन कर बाजार में अपने उत्पाद बेच रही हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आया है।
सुषमा बहुगुणा के इस कार्य में उनके पति संजय बहुगुणा का भी महत्वपूर्ण योगदान है। दोनों मिलकर टीम भावना के साथ कार्य करते हुए क्षेत्रीय विकास और महिला सशक्तिकरण के लिए लगातार प्रयासरत हैं। “लोकल फॉर वोकल” की अवधारणा को जमीनी स्तर पर साकार करने में यह दंपत्ति अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
कुटीर उद्योग के इस मॉडल को देखने के लिए कई बार प्रशासनिक अधिकारी, न्यायिक अधिकारी, पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि और समाजसेवी यहां पहुंच चुके हैं और इस पहल की सराहना कर चुके हैं।
विशेष रूप से अनिल जोशी (हैस्को के अध्यक्ष) द्वारा भी इस प्रयास को प्रोत्साहन दिया गया है। उनके मार्गदर्शन से इस पहल को और मजबूती मिली है।
सुषमा बहुगुणा को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए “देवभूमि नारी शक्ति सम्मान”, “कल्याणी सम्मान” सहित कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। आज वे युवा पीढ़ी, महिलाओं और स्वरोजगार के क्षेत्र में कार्य करने वाले लोगों के लिए एक प्रेरणास्रोत बन चुकी हैं।
