मुख्यमंत्री उद्यमशाला चौपाल में दिखी टिहरी की महिला उद्यमिता की ताकत, क्रेता-विक्रेता सम्मेलन में स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़ने पर जोर
क्रीड़ा भवन टिहरी में आयोजित चौपाल-2026 में स्वयं सहायता समूहों ने लगाए स्टॉल, लखपति दीदियों और उद्यमियों से हुआ संवाद
टिहरी/21 अगस्त 2026। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने तथा स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ग्राम्य विकास विभाग द्वारा क्रीड़ा भवन, टिहरी में मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना के अंतर्गत चौपाल-2026 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण क्रेता-विक्रेता सम्मेलन रहा, जिसमें स्थानीय उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों और संभावित खरीदारों को एक मंच पर लाकर उत्पादों के विपणन और बाजार विस्तार की संभावनाओं पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ विशिष्ट अतिथियों द्वारा विधि-विधान से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इसके बाद अतिथियों ने स्वयं सहायता समूहों एवं ग्रामीण उद्यमियों द्वारा लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण किया और स्थानीय स्तर पर तैयार किए जा रहे उत्पादों की जानकारी ली।
कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं, उद्यमियों एवं अन्य प्रतिभागियों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का अभिभाषण लाइव वर्चुअल माध्यम से सुना। मुख्यमंत्री के संदेश में उद्यमिता, स्वरोजगार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था तथा महिला सशक्तीकरण को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं की जानकारी दी गई।
उत्पादन के साथ बाजार तक पहुंच जरूरी: सीडीओ
मुख्य विकास अधिकारी वरुणा अग्रवाल ने कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना और चौपाल के उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि टिहरी जनपद के स्वयं सहायता समूहों द्वारा विभिन्न प्रकार के गुणवत्तापूर्ण स्थानीय उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं, लेकिन इन उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाना अभी भी एक महत्वपूर्ण चुनौती है।
उन्होंने कहा कि उत्पाद तैयार करने के साथ-साथ उसकी मार्केटिंग, ब्रांडिंग और बाजार उपलब्ध कराना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना के अंतर्गत क्रेता-विक्रेता सम्मेलन और चौपाल जैसी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
सीडीओ ने बताया कि मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना की स्थापना वर्ष 2022 में की गई थी और इसके माध्यम से टिहरी जनपद में अब तक लगभग ढाई करोड़ रुपये तक का लाभ समूहों को प्राप्त हो चुका है। कार्यक्रम के दौरान लखपति दीदियों, ग्रामीण उद्यमियों, क्रेताओं एवं विक्रेताओं से संवाद भी किया गया।
मातृशक्ति छोटे अवसरों को बड़े उद्यम में बदल रही: जोत सिंह बिष्ट
उपाध्यक्ष ग्रामीण निर्माण विभाग जोत सिंह बिष्ट ने महिला स्वयं सहायता समूहों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि मातृशक्ति आत्मनिर्भरता की दिशा में जिस तरह कार्य कर रही है, वह सभी के लिए प्रेरणादायक है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं ने छोटे-छोटे अवसरों को अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा के बल पर बड़े उद्यमों में परिवर्तित किया है। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि जो लोग कभी केवल क्रेता के रूप में बाजार में आते थे, आज वही अपने उत्पाद लेकर विक्रेता और उद्यमी के रूप में सामने आ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री उद्यमशाला चौपाल के माध्यम से महिलाओं को अपने उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
उत्पाद बनाना ही नहीं, उनका विपणन भी जरूरी
राज्य स्तरीय महिला उद्यमिता परिषद की उपाध्यक्षा विनोद उनियाल ने कहा कि एक ही मंच पर क्रेता और विक्रेता को संवाद का अवसर मिलना अपने आप में महत्वपूर्ण पहल है।
उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में भ्रमण के दौरान यह बात सामने आई कि महिला स्वयं सहायता समूहों के सामने उत्पाद तैयार करने के साथ-साथ उनके विपणन और बाजार उपलब्ध कराने की चुनौती भी है। इस समस्या के समाधान के लिए अधिकारियों को सकारात्मक एवं प्रभावी तरीके से कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि मातृशक्ति लगातार बेहतर कार्य कर रही है और मुख्यमंत्री का विजन महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, स्वरोजगार से जोड़ने तथा उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने का है।
टिहरी के उत्पादों को देश-विदेश तक मिल रहा मंच
उपाध्यक्ष युवा कल्याण परिषद विनोद सुयाल ने उपस्थित लोगों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उत्तराखंड राज्य गठन के बाद प्रदेश निरंतर विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। टिहरी की बहनों द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पाद अब केवल स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्हें प्रदेश, देश और विदेशों तक पहुंचाने के लिए मंच उपलब्ध कराया जा रहा है।
यह बदलाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्थानीय उत्पादों को नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
सरकार की योजनाओं से बढ़ रहा उद्यमिता का दायरा
उपाध्यक्ष अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग परिषद खेम सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा कृषि, उद्योग और अन्य क्षेत्रों में उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहायता एवं अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने का सपना अब धरातल पर साकार होता दिखाई दे रहा है। सरकार युवाओं को रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ने के साथ-साथ पर्यटन सहित विभिन्न क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा दे रही है।
उन्होंने पंचायतों में मातृशक्ति को 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व दिए जाने को भी महिला सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
उत्कृष्ट स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाली स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इससे महिलाओं में अपने कार्य को और आगे बढ़ाने का उत्साह दिखाई दिया।
वहीं विभिन्न समूहों द्वारा लगाए गए स्टॉलों के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को प्रदर्शित किया गया। क्रेता-विक्रेता सम्मेलन में उत्पादों की गुणवत्ता, बाजार की मांग, विपणन तथा संभावित बाजारों से जुड़ने के संबंध में जानकारी एवं मार्गदर्शन दिया गया।
मुख्यमंत्री उद्यमशाला चौपाल का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह रहा कि इसमें स्थानीय संसाधन, स्थानीय हुनर और स्थानीय बाजार को एक-दूसरे से जोड़ने का प्रयास दिखाई दिया।
टिहरी जैसे पर्वतीय जनपद में स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे स्थानीय उत्पाद ग्रामीण महिलाओं के लिए अतिरिक्त आय का साधन बनने के साथ-साथ गांवों में रोजगार सृजन की संभावनाएं भी पैदा कर रहे हैं। यदि इन उत्पादों को बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग, गुणवत्ता प्रमाणन, डिजिटल मार्केटिंग और नियमित बाजार उपलब्ध हो सके तो छोटे ग्रामीण उद्यम बड़े व्यवसाय का रूप ले सकते हैं।
इसी दृष्टि से क्रेता-विक्रेता सम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि उत्पादन से बाजार और हुनर से रोजगार तक की पूरी श्रृंखला को मजबूत करने की पहल के रूप में देखा जा सकता है।
कार्यक्रम में अध्यक्ष नगर पालिका टिहरी मोहन सिंह रावत, प्रमुख चंबा सुमन सजवाण, प्रमुख थौलधार सुरेंद्र भंडारी, प्रभारी पीडी डीआरडीए एवं प्रशिक्षु आईएएस ज्योति, डीडीओ मो. असलम, सिडकुल मैन्युफैक्चरिंग फर्म से हरेंद्र गर्ग, दिल्ली से कैलाश खेड़े, रानीचौरी की उन्नति ग्राम संगठन से शांति कैंतुरा, मुन्नी देवी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, जनप्रतिनिधि, क्रेता-विक्रेता तथा स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित रहीं।
संपादकीय दृष्टिकोण
ग्रामीण उद्यमिता की असली सफलता तब मानी जाएगी, जब गांव में तैयार उत्पाद केवल स्टॉल तक सीमित न रहकर नियमित बाजार, डिजिटल प्लेटफॉर्म और बड़े खरीदारों तक पहुंचें। मुख्यमंत्री उद्यमशाला चौपाल इस दिशा में एक उपयोगी सेतु बन सकती है। टिहरी की महिलाओं के पास हुनर और उत्पाद दोनों हैं; अब आवश्यकता है उन्हें स्थायी बाजार, मजबूत ब्रांड और निरंतर मार्गदर्शन देने की। यही ग्रामीण आत्मनिर्भरता को वास्तविक आर्थिक शक्ति में बदलने की दिशा होगी।
