युवा विधि शोधार्थी सुशील पुरोहित ने पीएचडी उपाधि प्राप्त कर बढ़ाया उत्तराखंड का गौरव
पीसीपीएनडीटी अधिनियम पर शोध को मिली सराहना, कन्या भ्रूण हत्या रोकथाम और महिला अधिकारों पर प्रस्तुत किया महत्वपूर्ण विधिक एवं सामाजिक अध्ययन
देहरादून | 26 जुलाई 2026 | सरहद का साक्षी, डिजिटल मीडिया
उत्तराखंड के युवा विधि शोधार्थी एवं चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में कार्यरत विधि अधिकारी सुशील पुरोहित ने जिज्ञासा विश्वविद्यालय, देहरादून (पूर्व में हिमगिरि जी विश्वविद्यालय) से विधि (एलएल.डी./पीएचडी) की उपाधि प्राप्त कर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। उनकी इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धि पर विभागीय अधिकारियों, शिक्षाविदों, विधि विशेषज्ञों एवं सामाजिक संगठनों ने उन्हें बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं।
यह उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि उत्तराखंड में विधिक अनुसंधान और महिला अधिकारों से जुड़े विषयों पर गंभीर शोध को भी नई दिशा देने वाली मानी जा रही है।
पीसीपीएनडीटी अधिनियम पर किया महत्वपूर्ण शोध
सुशील पुरोहित का शोध विषय था—
“गर्भाधान पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम, 1994 (पीसीपीएनडीटी) का सामाजिक एवं विधिक विश्लेषणात्मक अध्ययन – उत्तराखंड राज्य के विशेष संदर्भ में।”
इस शोध में कन्या भ्रूण हत्या की रोकथाम, लिंगानुपात में सुधार, पीसीपीएनडीटी अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन तथा उससे जुड़े सामाजिक, प्रशासनिक एवं कानूनी पक्षों का विस्तृत और विश्लेषणात्मक अध्ययन किया गया है।
शोध में उत्तराखंड की भौगोलिक एवं सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप कानून के क्रियान्वयन की चुनौतियों और उनके व्यावहारिक समाधान भी प्रस्तुत किए गए हैं।
नीति निर्माण और न्यायिक व्यवस्था के लिए उपयोगी शोध
यह शोध कार्य विधि संकाय के डॉ. भूपनेश कुमार के निर्देशन में पूर्ण हुआ। शोध में यह विश्लेषण किया गया है कि पीसीपीएनडीटी अधिनियम के प्रभावी अनुपालन के लिए प्रशासन, न्यायपालिका और समाज के बीच बेहतर समन्वय किस प्रकार स्थापित किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह शोध भविष्य में—
- महिला अधिकारों की सुरक्षा,
- कन्या भ्रूण हत्या की रोकथाम,
- स्वास्थ्य प्रशासन,
- न्यायिक विमर्श,
- तथा नीति निर्माण
के क्षेत्र में उपयोगी संदर्भ सामग्री के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
रुद्रप्रयाग के क्वीली गांव से राष्ट्रीय स्तर की उपलब्धि तक का सफर
सुशील पुरोहित जनपद रुद्रप्रयाग के क्वीली गांव के मूल निवासी हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गोपेश्वर में प्राप्त की। इसके बाद गढ़वाल विश्वविद्यालय के पौड़ी परिसर से एलएलबी एवं एलएलएम की शिक्षा पूरी की। विधि, समाज और जनहित से जुड़े विषयों में विशेष रुचि ने उन्हें शोध के क्षेत्र में सक्रिय किया। वर्तमान में वे चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में विधि अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं और विधिक जागरूकता, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा अनुसंधान के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं।
सामाजिक एवं विधिक अनुसंधान की महत्वपूर्ण उपलब्धि
विश्वविद्यालय के रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल के प्रभारी प्रो. मनीष ने इस शोध को सामाजिक एवं विधिक अनुसंधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह अध्ययन समाज की वास्तविक समस्याओं को विधिक दृष्टिकोण से समझने तथा उनके समाधान की दिशा में सार्थक योगदान प्रदान करता है।
शिक्षाविदों और समाज ने दी बधाई
सुशील पुरोहित की इस उपलब्धि पर शिक्षाविदों, विधि विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों, विभागीय अधिकारियों एवं शुभचिंतकों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि उनका यह शोध भविष्य में महिला अधिकारों की सुरक्षा, न्याय व्यवस्था की मजबूती तथा उत्तराखंड सहित देशभर में प्रभावी नीति निर्माण के लिए उपयोगी सिद्ध होगा।
मुख्य बिंदु (Highlights)
- 🎓 सुशील पुरोहित ने जिज्ञासा विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।
- ⚖️ पीसीपीएनडीटी अधिनियम पर किया महत्वपूर्ण विधिक एवं सामाजिक शोध।
- 👩⚖️ शोध में कन्या भ्रूण हत्या रोकथाम और लिंगानुपात सुधार पर विशेष फोकस।
- 📚 शोध को नीति निर्माण एवं न्यायिक व्यवस्था के लिए उपयोगी बताया गया।
- 🌄 रुद्रप्रयाग के क्वीली गांव से राष्ट्रीय स्तर की शैक्षणिक उपलब्धि हासिल की।
