"वृक्ष मानव" विश्वेश्वर दत्त सकलानी की धर्मपत्नी श्रीमती भगवती देवी सकलानी का निधन, राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार
“वृक्ष मानव” विश्वेश्वर दत्त सकलानी की धर्मपत्नी श्रीमती भगवती देवी सकलानी का निधन, राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार
टिहरी गढ़वाल, 07 जून 2026 | SKS News
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं “वृक्ष मानव” के नाम से विख्यात स्वर्गीय विश्वेश्वर दत्त सकलानी की धर्मपत्नी श्रीमती भगवती देवी सकलानी का रविवार प्रातः लगभग 7 बजे निधन हो गया। वह लगभग 85 वर्ष की थीं। उनके निधन से सकलाना क्षेत्र सहित समूचे टिहरी जनपद में शोक की लहर व्याप्त है।
स्वर्गीय सकलानी दम्पती के पुत्र संतोष स्वरूप सकलानी ने बताया कि उनकी माताजी का निधन देहरादून स्थित महंत इंद्रेश अस्पताल में उपचार के दौरान हुआ। विगत लगभग एक माह से उनके पैर में फ्रैक्चर होने के कारण उनका उपचार चल रहा था।
श्रीमती भगवती देवी सकलानी अपने पीछे चार पुत्र, बहुएँ, पोते-पोतियों सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं। उनके निधन का समाचार मिलते ही क्षेत्र के सामाजिक, राजनीतिक एवं पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों ने गहरा शोक व्यक्त किया है।
उल्लेखनीय है कि स्वर्गीय विश्वेश्वर दत्त सकलानी पर्यावरण संरक्षण एवं वृक्षारोपण के क्षेत्र में अपने अतुलनीय योगदान के कारण “वृक्ष मानव” के नाम से देश-विदेश में प्रसिद्ध रहे हैं। उन्होंने अपने जीवनकाल में लाखों वृक्षों का संरक्षण एवं रोपण कर पर्यावरण संरक्षण की एक मिसाल कायम की थी। सकलानी परिवार का सामाजिक और पर्यावरणीय क्षेत्र में विशेष योगदान रहा है।
परिजनों के अनुसार श्रीमती भगवती देवी सकलानी का अंतिम संस्कार सोमवार प्रातः ऋषिकेश स्थित पूर्णानन्द घाट में राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। अंतिम संस्कार के अवसर पर प्रशासन की ओर से उप जिलाधिकारी अथवा तहसीलदार की उपस्थिति सुनिश्चित रहेगी।
गौरतलब है कि उत्तराखण्ड शासन द्वारा वर्ष 2011 में जारी शासनादेश के अनुसार स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की विधवाओं के निधन पर भी राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किए जाने तथा अंतिम संस्कार हेतु निर्धारित अनुदान राशि प्रदान किए जाने का प्रावधान है।
श्रीमती भगवती देवी सकलानी के निधन को क्षेत्र ने एक मातृसुलभ व्यक्तित्व की क्षति के रूप में देखा है। उनके निधन से न केवल सकलानी परिवार बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय सरोकारों से जुड़े लोगों ने भी एक सम्मानित अभिभावक स्वरूप व्यक्तित्व को खो दिया है।
