श्री भगत सिंह कोश्यारी जी: एक शीतल और प्रेरणादायक व्यक्तित्व
चंदनं शीतलं लोके चंदनादपि चंन्द्रमा:
चंद्रचंदनयोर्मध्ये शीतला साधु संगति:
चंदन को इस संसार में सबसे अधिक शीतल माना गया है, लेकिन चंद्रमा चंदन से भी अधिक शीतल होता है। परंतु जब समाज को श्री भगत सिंह कोश्यारी जी जैसे मित्र, समाजसेवी, कुशल प्रशासक और मार्गदर्शक मिलते हैं, तो उनका व्यक्तित्व चंद्रमा और चंदन से भी अधिक शीतल और प्रेरणादायक प्रतीत होता है।
अयं निज परो वेति गणना लघु चेतसाम्
उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्
श्री भगत सिंह कोश्यारी जी (पूर्व मुख्यमंत्री, उत्तराखंड एवं पूर्व राज्यपाल, महाराष्ट्र और गोवा) एक विशाल हृदय के व्यक्ति हैं, जो निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा करने के लिए जाने जाते हैं। उनका मानना है कि “वसुधैव कुटुम्बकम्” का अर्थ यह है कि पूरी दुनिया उनके परिवार की तरह है, और इसी भावना से वे अपने कर्तव्यों को निष्ठा और समर्पण के साथ पूरा करते हैं। चाहे परिस्थिति कितनी भी कठिन हो, श्री कोश्यारी जी हर काम को सहजता, सरलता और निर्भयता के साथ पूर्ण करने की क्षमता रखते हैं।
पुस्तक विमोचन कार्यक्रम
9 मार्च 2025 को इंदिरा गांधी कला केन्द्र (IGNC), नई दिल्ली में श्री मदन मोहन सती (मीडिया समन्वयक, मुख्य मंत्री उत्तराखंड) द्वारा संकलित श्री भगत सिंह कोश्यारी जी के जीवन पर आधारित एक पुस्तक का विमोचन हुआ। इस मौके पर लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस भव्य कार्यक्रम में अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने भी शिरकत की।
निजी संबंध और अनुभव
हमारे परिवार के श्री कोश्यारी जी के साथ गहरे संबंध रहे हैं। उन्होंने हमेशा मानवता के आधार पर अपने कर्तव्यों का पालन किया है और समाज के प्रति अपने दायित्वों को निष्ठापूर्वक निभाया है। वे आज भी एक विशाल वटवृक्ष की तरह समाज को ज्ञान और प्रेरणा प्रदान कर रहे हैं। इस विमोचन कार्यक्रम में हमें भी सपरिवार सम्मिलित होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, जिसके लिए हम आभारी हैं।
आभार और शुभकामनाएं
हम श्री भगत सिंह कोश्यारी जी को उनके महान कार्यों के लिए बार-बार बधाई और साधुवाद देते हैं। साथ ही, हम भगवान श्री बदरीकेदार जी से प्रार्थना करते हैं कि वे सदैव स्वस्थ, निरोगी और दीर्घायु रहें, ताकि उनका मार्गदर्शन समाज को निरंतर मिलता रहे।
समाज के लिए प्रेरणा
श्री कोश्यारी जी जैसे समाज सुधारक और मार्गदर्शक से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि हम भी निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा करें। उनका कृतित्व और व्यक्तित्व समाज के लिए एक आदर्श है, और हमें इसी प्रेरणा से आगे बढ़ना चाहिए।
पं०/ई०सुन्दर लाल उनियाल (मैथिल ब्राह्मण)
नैतिक शिक्षा एवं आध्यात्मिक प्रेरक
दिल्ली/गा०बाद/देवभूमि उत्तराखंड
