सुन लो दिल्ली देहरादून, उत्तराखंड मांगे भू कानून, गजा में निकाला मशाल जुलूस
सुन लो दिल्ली देहरादून, उत्तराखंड सख्त मांगे भू कानून, गजा में निकाला मशाल जुलूस
गजा, टिहरी गढ़वाल: विकास खंड चम्बा के नगर पंचायत गजा में मूल निवास भू कानून समन्वय समिति के ब्लॉक सह प्रभारी विलेंदर सिंह असवाल के नेतृत्व में एक मशाल जुलूस निकाला गया। इस जुलूस में “सुन लो दिल्ली, देहरादून, उत्तराखंड मांगे सख्त भू कानून”, “बोल पहाड़ी हल्ला बोल”, जैसे नारे गूंजते रहे। साथ ही, उत्तराखंड की अस्मिता को बचाने के लिए यह अभियान चलाया गया।
मशाल जुलूस के मुख्य नारे
इस जुलूस में शामिल युवाओं ने जोर देकर कहा कि यह पहाड़ की अस्मिता और स्वाभिमान को बनाए रखने के लिए किया जा रहा है। “उत्तराखंडी जागी जावा” जैसे गीतों के साथ जनता एकजुट हो रही थी।
भू कानून की मांग
विलेंदर सिंह असवाल ने बताया कि सरकार सख्त भू कानून लागू करने की बात कर रही है, लेकिन नगरपालिकाओं और नगर पंचायतों में जमीन की लूट के लिए खुली छूट दी गई है। साथ ही, एक ही प्रदेश में दो अलग-अलग व्यवस्थाएं लागू की जा रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भूमाफियाओं ने सैकड़ों नाली भूमि बिचौलियों के माध्यम से खरीद रखी है, और अब वहाँ बड़े-बड़े होटल और रिजॉर्ट बनाए जा रहे हैं।
मूल निवासियों के साथ विश्वासघात
समिति का कहना है कि सरकार ने मूल निवास को हटाकर स्थायी निवास का प्रावधान किया है, जो मूल निवासियों के साथ विश्वासघात है। जो लोग 1950 से यहाँ रह रहे हैं, उन्हें ही मूल निवास प्रमाण पत्र देकर रोजगार में वरीयता दी जानी चाहिए थी। सरकार इस मांग को लगातार अनदेखा कर रही है, जो कि उत्तराखंड के लोगों के साथ घोर अन्याय है।
स्वाभिमान का प्रतीक: मशाल जुलूस
मशाल जुलूस के माध्यम से सरकार को साफ संदेश दिया गया है कि उत्तराखंड के लोग अपनी अस्मिता और अधिकारों के लिए खड़े हैं। राज्य की जनता ने पृथक राज्य के लिए आंदोलन किया था, और अब वही लोग अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं।
समापन
इस मौके पर नगर पंचायत गजा के सभासद राजेंद्र सिंह चौहान, मदन सिंह खडवाल, कुशबीर सिंह पुंडीर, रघुबीर सिंह खाती, प्रवीन पंवार, शोभा राम उनियाल, विनीत सिंह सहित अनेक लोग मौजूद थे। पुलिस चौकी गजा के इंचार्ज मनीष नेगी और अन्य पुलिस कर्मी भी उपस्थित रहे।
निष्कर्ष:
उत्तराखंड के लोग अपने अधिकारों और अस्मिता की रक्षा के लिए सख्त भू कानून की मांग कर रहे हैं। इस मांग को पूरा करने में देरी राज्य की जनता के साथ अन्याय होगा।
