📰 बैसाख की 14 गते लगता है यह पारंपरिक मेला, अब रेगुलर पुलिस की निगरानी में होगा आयोजन
टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड: मखलोगी प्रखंड के ग्रामीण कस्बे नकोट, जिसे पहले सेन्दुलाधार के नाम से जाना जाता था, में इस वर्ष भी पारंपरिक थौल मेला का आयोजन रविवार, 27 अप्रैल को होने जा रहा है। यह मेला हर वर्ष बैसाख मास की 14 गते को लगता है और क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा है।
एक समय इस प्रखंड में 10 गते बैसाख को माता राजराजेश्वरी मंदिर जलेड के समीप धारू नामक स्थल पर विशाल मेला लगता था, जो अब लगभग समाप्त हो चुका है।
🔸 क्षेत्रीय सहभागिता और उत्सव की परंपरा
नकोट मेले में मखलोगी पट्टी ही नहीं, बल्कि धारअकरिया, सारज्यूला, क्वीली, कुजणी, मनियार जैसे क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग भाग लेते हैं। मेले में व्यापारियों द्वारा दुकानों के लिए पहले से ही बाजार में स्थान आरक्षित कर लिए गए हैं।
🔸 प्रशासनिक सहयोग विहीन मेला, अब रेगुलर पुलिस की देखरेख में
अब तक यह मेला बिना किसी प्रशासनिक सहयोग के आयोजित होता रहा है। पूर्व में यह क्षेत्र राजस्व पुलिस के अधीन था, और मेले के दौरान एक भी होमगार्ड नहीं दिखाई देता था। वर्तमान में यह क्षेत्र रेगुलर पुलिस (चंबा) के अधीन है, जिससे उम्मीद है कि अब मेले में प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
यह क्षेत्र सदैव शांतिप्रिय रहा है और यहां के स्थानीय लोगों द्वारा कभी दबंगई नहीं की गई। लेकिन कुछ समय से बाहरी असामाजिक तत्वों की गतिविधियों के कारण क्षेत्र की छवि प्रभावित हो रही है। अपराधों की अधिकांश घटनाएं बाहरी लोगों द्वारा अंजाम दी जाती हैं, जिससे स्थानीय भोली-भाली जनता अनजान रह जाती है।
🛑 भू-माफियाओं की नज़र और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी
बीते वर्षों में देखा गया है कि इस क्षेत्र पर भू-माफियाओं की नजर लगी हुई है और वे अपने मंसूबों में काफी हद तक सफल भी हुए हैं। यह चिंता का विषय है कि स्थानीय जनप्रतिनिधि और नागरिक इन मामलों पर चुप्पी साधे हुए हैं।
यदि समय रहते जन-जागरूकता नहीं बढ़ी, तो आने वाले समय में यहां के स्थानीय लोगों को क्षेत्र छोड़ने तक की नौबत आ सकती है और अपराधियों का दबदबा बढ़ सकता है।
✅ समाधान और अपील
यह आवश्यक है कि क्षेत्र का हर नागरिक आगे आकर एक जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभाए, तभी यहां का सामाजिक, शैक्षिक, राजनैतिक और आर्थिक विकास संभव हो सकेगा।
