हरिकृष्ण भट्ट: चौथे थोक के मनीषी व्यक्तित्व ने अपनी कन्या दान देकर जमीन भी उपहार स्वरूप प्रदान की
सावली गांव के सम्मानित व्यक्तियों में हरिकृष्ण भट्ट परिवार के सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। सावली की माटी का अद्भुत गुण यहां पर निवास करने वाले महान व्यक्तित्व के धनी ही पहिचान सकते हैं, शेष व्यक्ति कैसे गुण-धर्म की विवेचना कर पायेंगे।
गुणों का धारण और अवगुणों का त्याग सभी के लिए चाहे वे द्विजाति हो या अन्य सब के लिए इष्ट है। गुणों को धारण करने के लिए तामसी पदार्थों का त्याग सर्वोत्तम है। यही कारण था कि इस गांव के सम्मानित व्यक्तियों में भट्ट परिवार के सदस्यों की महत्व पूर्ण भूमिका रही है। इन मनीषियों को याद कर यह लगता है कि हमारी हृदय की ग्रन्थियां खुल गई है।
भिद्यते हृदयग्रन्थि श्छिद्यन्ते सर्वसंशया। क्षीयन्ते चास्य कर्माणि मयि दृष्टेsखिलात्मनि।।
जिनका इतिवृत अनुपम रहा। अपने समय के अद्वितीय मनीषी कर्मकाण्ड व ज्योतिष के प्रकाण्ड पण्डित जिनका जन्म पं० डिम्मेश्वर प्रसाद जी के घर सन् १८९५ के लगभग हुआ तथा सितंबर १९७६ को पंचतत्व में विलीन हुए।
आपके छोटे भाई श्री बालकृष्ण भट्ट जी ने भी अपने दो पुत्रों श्री कुलानन्द भट्ट व श्री मस्तराम भट्ट जी को छोड़कर अपना महत्वपूर्ण जीवन भगवान के श्री चरणों में अर्पित किया।
भट्ट परिवार को सावली के बहुगुणा अपने साथ लाए थे व चौथे थोक के मनीषी व्यक्तित्व ने अपनी कन्या दान देकर जमीन भी उपहार स्वरूप प्रदान की। बहुत पुराना इतिहास तो याद नहीं है, किन्तु श्री छोटेराम भट्ट जी के दो सुपुत्रों में श्री मोला राम व श्री माणिक राम जी थे। नाम में कुछ अन्तर हो सकता है।
मोला राम जी के डिम्मेश्वर उनके दो पुत्र- छोटे बाल कृष्ण जी व बड़े श्री हरिकृष्ण भट्ट जी के तीन सुपुत्रों में श्री जीवन प्रसाद भट्ट जी का जन्म सन् १९३७ में हुआ।
अपने जीवन काल में सन् १९५७-५८ में रानीचौंरी में कुछ दिन व्यक्तिगत विद्यालय में शिक्षण का कार्य किया, फिर राजस्व विभाग में सेवा की। सेवा निवृत्त होने के बाद १२ फरवरी २०१० को अपनी समस्त अच्छाई को छोड़कर इस गांव की माटी को अलविदा कहा। इसका कारण यह भी हो सकता है कि अपने छोटे भाई श्री दर्शन लाल भट्ट जी की अकाल कवलितता न देखी गई, जिनका जन्म सन् १९४३ को हुआ था, व दुर्योग से १६ नवंबर २००८ को असामयिक निधन का वरण करना पड़ा।
तीसरे सुपुत्र श्री रोशन लाल भट्ट जी राजकीय सेवा से सेवा निवृत्त होकर अपने दोनों बड़े भाइयों के परिवारों पर अपनी कृपा दृष्टि बना कर हर सम्भव मदद करने का प्रयास कर रहे हैं, अब देहरादून में निवास कर रहे हैं।
श्री छोटे राम जी के दूसरे सुपुत्र श्री माणिक राम जी के चार सुपुत्रों में श्री दौलत राम जी के श्री विश्वेश्वर व उनके श्री रामेश्वर भट्ट जी उनकी वंश वेल आगे बढ रही है जो ऋषिकेश में निवास कर रहे हैं।
दूसरे श्री बागेश्वर जी के दो सुपुत्र श्री छोटेलाल व श्री वेदानन्द, छोटे लाल जी के श्री सतीश भट्ट व श्री वेदानन्द जी के श्री जगदम्बा प्रसाद भट्ट सभी प्रात: स्मरणीय, वंश वेल आगे बढ रही है।
तीसरे सुपुत्र श्री उदमपति भट्ट इनके तीन सुपुत्र श्री दर्शन लाल श्री शम्भू प्रसाद व श्री मंगलानन्द भट्ट जी हैं जो देहरादून (शमशेर गढ़) में निवास करते हैं। चौथे सुपुत्र श्री शालीग्राम जी के श्री छज्जू राम भट्ट जी ने अपना आशियाना शमशेर गढ़ बनाकर स्वयं इस असार संसार से विदा ले ली थी।
बड़ा कष्ट है कि सावली में अपनी वृद्धि न देख कर मात्र आदरणीय श्री कुलानन्द भट्ट जी श्री मस्त राम भट्ट जी श्री जगदम्बा प्रसाद भट्ट जी की बड़ी पुत्र वधू व श्री राकेश व सुरेश भट्ट जी ही सम्भवतः अन्य मनश्क रह रहे हैं।
भट्ट परिवार के सभी महामानवों को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनसे व परमपिता परमेश्वर से तथा सावली की पवित्र माटी से यह प्रार्थना करता हूं कि इस गांव में रहने वाले विद्वान लोगों के वंश की वृद्धि करने का आशीर्वाद देते हुए सभी भट्ट बन्धुओं की उन्नति का मार्ग प्रशस्त करने का आशीर्वाद प्रदान करने की कृपा अवश्य करेंगे। क्योंकि बहुगुणा वशं के उत्थान में आपका महत्वपूर्ण योगदान है। मानव जीवन का समय अत्यंत दुर्लभ है साथ ही बड़ा भारी कीमती भी है, तभी तो कहा है-
दुर्लभो मानुषो देहो देहिनां क्षणभंगुर:। तत्रापि दुर्लभं मन्ये वैकुण्ठप्रियदर्शनम्।।
मनुष्य जीवन का आनंद बार बार नहीं मिल सकता है और सावली में भी जन्म दुबारा नहीं मिलेगा। अतः करोड़ों कार्य छोड़ कर मनुष्य जीवन की पुनरावृत्ति हेतु प्रयास आवश्यक है। मन की ग्रन्थि काटने की जरूरत है। अपने पूर्वजों के प्रति निष्ठा व मार्ग दर्शन की अभिलाषा रखनी होगी तभी सब का कल्याण सम्भव है।
* प्रस्तुति: हर्षमणि बहुगुणा
