20 जुलाई से शुरू होगा भारतीय भाषाओं की समरसता पर राष्ट्रीय ऑनलाइन रिफ्रेशर कोर्स, देशभर के शिक्षाविद् करेंगे व्याख्यान
एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय का दो सप्ताह का यूजीसी मान्यता प्राप्त ऑनलाइन कार्यक्रम, शिक्षकों के लिए निःशुल्क पंजीकरण और CAS हेतु मान्य प्रमाणपत्र
श्रीनगर गढ़वाल | 19 जुलाई 2026 | सरहद का साक्षी, डिजिटल मीडिया
हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय (एचएनबीजीसीयू) के मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (MMTTC) द्वारा 20 जुलाई से 1 अगस्त 2026 तक “भारतीय भाषाओं की समरसता एवं बहुलता का स्वरूप” विषय पर दो सप्ताह का ऑनलाइन राष्ट्रीय पुनश्चर्या (रिफ्रेशर) पाठ्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग प्रोग्राम के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है।
इस राष्ट्रीय शैक्षणिक कार्यक्रम में देशभर के प्रतिष्ठित शिक्षाविद्, भाषाविद् और साहित्यकार भारतीय भाषाओं की विविधता, ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत पर व्याख्यान देंगे। विशेष बात यह है कि कार्यक्रम के लिए कोई पंजीकरण शुल्क नहीं रखा गया है।
नई शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों को मिलेगा बल
यह पुनश्चर्या पाठ्यक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह के संरक्षण, एमएमटीटीसी के निदेशक प्रो. देवेंद्र सिंह नेगी तथा कार्यक्रम समन्वयक प्रो. गुड्डी बिष्ट पंवार के मार्गदर्शन में आयोजित किया जाएगा।
कार्यक्रम समन्वयक प्रो. गुड्डी बिष्ट पंवार ने बताया कि इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के अनुरूप भारतीय भाषाओं की समृद्ध परंपरा, उनकी समरसता, बहुलता, भारतीय ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय एकता में उनकी भूमिका पर गंभीर अकादमिक विमर्श को बढ़ावा देना है।
इन महत्वपूर्ण विषयों पर होंगे व्याख्यान
दो सप्ताह तक चलने वाले इस ऑनलाइन कार्यक्रम में विशेषज्ञ निम्न विषयों पर व्याख्यान देंगे—
- भारतीय भाषाओं की समरसता एवं बहुलता
- भारतीय साहित्य एवं भारत-बोध
- भारतीय ज्ञान परंपरा
- हिमालयी क्षेत्र की भाषाएं एवं साहित्य
- भारतीय भाषाओं के अंतर्संबंध
- संस्कृति संरक्षण में भारतीय भाषाओं की भूमिका
- पूर्वोत्तर भारत की भाषाएं एवं साहित्य
- भारतीय बोलियों के साहित्य में जीवन मूल्य
- राष्ट्रीय एकता और भाषाई विविधता
देशभर के शिक्षक घर बैठे कर सकेंगे सहभागिता
यह रिफ्रेशर कोर्स विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी होगा। कार्यक्रम पूर्णतः ऑनलाइन माध्यम से संचालित होगा, जिससे देश के विभिन्न राज्यों के शिक्षक आसानी से इसमें भाग ले सकेंगे।
सभी सत्रों में नियमित उपस्थिति एवं मूल्यांकन परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण करने वाले प्रतिभागियों को यूजीसी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा, जो Career Advancement Scheme (CAS) के लिए मान्य होगा।
राष्ट्रीय एकता का सेतु बनेंगी भारतीय भाषाएं
एमएमटीटीसी के निदेशक प्रो. देवेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि भारतीय भाषाओं पर आधारित यह पहला ऐसा पुनश्चर्या पाठ्यक्रम होगा, जो भारत की सामासिक संस्कृति और भाषाई विविधता को राष्ट्रीय एकता के मजबूत सेतु के रूप में प्रस्तुत करेगा।
उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम भारतीय भाषाओं की सांस्कृतिक विरासत, समकालीन प्रासंगिकता और भारतीय ज्ञान परंपरा पर राष्ट्रीय स्तर पर सार्थक संवाद का मंच प्रदान करेगा।
80 से अधिक शिक्षकों ने कराया पंजीकरण
कार्यक्रम के प्रति शिक्षकों में उत्साह का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अभी तक 80 से अधिक प्रतिभागी अपना पंजीकरण करा चुके हैं।
प्रो. गुड्डी बिष्ट पंवार ने विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के शिक्षकों से समय रहते यूजीसी एमएमसी पोर्टल पर पंजीकरण कर इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय शैक्षणिक कार्यक्रम का लाभ उठाने की अपील की है।
कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर हुई समीक्षा बैठक
कार्यक्रम की सफलता सुनिश्चित करने के लिए 16 जुलाई 2026 को एमएमटीटीसी के निदेशक प्रो. डी.एस. नेगी की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
बैठक में कार्यक्रम समन्वयक प्रो. गुड्डी बिष्ट पंवार, संयुक्त निदेशक डॉ. राहुल कुँवर, सहायक निदेशक डॉ. सोमेश थपलियाल, डॉ. अमरजीत परिहार सहित अन्य सदस्यों ने कार्यक्रम की रूपरेखा एवं तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की।
मुख्य बिंदु (Highlights)
- 20 जुलाई से 1 अगस्त तक दो सप्ताह का ऑनलाइन राष्ट्रीय रिफ्रेशर कोर्स।
- विषय: “भारतीय भाषाओं की समरसता एवं बहुलता का स्वरूप”।
- देशभर के प्रतिष्ठित शिक्षाविद् और भाषाविद् देंगे व्याख्यान।
- कोई पंजीकरण शुल्क नहीं।
- यूजीसी मान्य प्रमाणपत्र एवं CAS के लिए मान्य।
- अब तक 80 से अधिक शिक्षकों ने कराया पंजीकरण।
